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ऐसे चुने गए ट्रैफिक सिग्नल की लाइट के रंग, येलो कलर रखने की वजह है सबसे रोचक

Vivhav Shukla

Publish: Oct 23, 2019 18:22 PM | Updated: Oct 23, 2019 18:22 PM

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ऐसे चुने गए ट्रैफिक सिग्नल की लाइट के रंग

नई दिल्ली। पहले के जमाने में लोग सड़को पर जैसे मन वैसे चलते रहते थे। जिसकी वजह से रोजाना ढेरों सड़क दुर्घटनाएं देखने को मिलती थी। इसके बाद ट्रैफिक नियम बना दिए गए। इन नियमों के आने बाद से दुर्घटनां में काफी कमी आ गई। इसी नियमों में ट्रैफिक सिग्नल को भी रखा गया। जिसके लिए चौराहों पर एक खम्भे पर तीन लाइटें लगाई गई। जिसमें लाल, पीला और हरा रंग को चुना गया।

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IMAGE CREDIT: google

दरअसल, दुनिया में सबसे पहला ट्रेफिक लाइट 10 दिसंबर 1868 को लंदन के ब्रिटिश हाउस ऑफ पार्लियामेंट के सामने लगाया गया था। इस लाइट को रेलवे के अभियंता जेके नाईट ने लगाया था। रात में दिखने के लिये इसमें गैस का प्रयोग किया जाता था। उस समय सिर्फ दो ही रंगों का प्रयोग किया जाता था लाल और हरा। लेकिन बाद में इसमें पीले रंग को भी जोड़ दिया गया। लेकिन क्या आपको पता हैं कि ट्रैफिक लाइट में इन्हीं रंगों का उपयोग क्यों किया गया?। नहीं पता तो कोई बात नहीं आज हम आपको इसकी असली वजह इसके बारे में बताते हैं।

 ट्रैफिक सिग्नल
IMAGE CREDIT: google
  • ट्रैफिक लाइट में लाल रंग रखने की वजह इसका चटकार होना था। लाल रंग का प्रयोग इस बात का भी संकेत देता है कि आगे खतरा है, आप रूक जाएं। लाल रंग अन्य रंगों की अपेक्षा में बहुत ही गाढ़ा होता है। यह दूर से ही दिखने लगता है। लाल रंग का प्रयोग इस बात का भी संकेत देता है कि आगे खतरा है, आप रूक जाएं। इसके साथ ही ये बहुत दूर से ही दिखने लगता है।
  • पीला रंग ऊर्जा का प्रतीक है। इसे ट्रैफिक लाइट में इस लिए जोड़ा गया ताकी ये रंग जब आपको दिखाई दे तो आप वापस अपनी ऊर्जा को समेट कर तैयार हो जायें और आगे बढ़ने के लिए तैयार हो जाए
  • हरा रंग को सबसे सुंदर रंग कहा जाता है। इसे प्रकृति से जोड़ कर देखा जाता है। ये रंग सबकुछ सही है इस बात की जानकारी देता है। ट्रैफिक लाइट में इसका उपयोग वाहनों को आगे बढ़ाने के लिये किया जाता है।