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प्रधानमंत्री आवासों में बंदरबांट, दो मंजिला पक्के मकान वालों को भी दे दिए आवास

Govind Saxena

Publish: Oct 21, 2019 11:17 AM | Updated: Oct 21, 2019 11:17 AM

Vidisha

लोकायुक्त के पत्र पर जांच के बाद खुली पोल-एक ही व्यक्ति को दो-दो आवास भी बांटे जाने का खुलासा

विदिशा। नगर परिषद शमशाबाद द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना में भी बंदरबांट किए जाने का खुलासा हुआ है। ऐसे लोगों को भी प्रधानमंत्री आवास आबंटित कर योजना की किश्त जारी कर दी गई, जिनके पास पहले से ही पक्के मकान और दुकान थे। दो मंजिला मकान के मालिकों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल गया। इतना ही नहीं एक महिला के नाम से दो-दो आवास आबंटित किए जाने का भी खुलासा हुआ है।

टीम गठित कर जांच की
लोकायुक्त भोपाल को शमशाबाद के कृष्णगोपाल धाकड़ द्वारा की गई शिकायत के बाद एसडीएम ने तहसीलदार से मामले की जांच कराई। तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह ने अपनी टीम गठित कर जांच की। इस जांच में यह बात उजागर हुई कि वार्ड 2 निवासी इसरार खां के पास पहले से पक्का मकान और पक्की दुकान होने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास आबंटित कर दो लाख का भुगतान कर दिया गया।

आवास योजना का लाभ दे दिया गया
इसी वार्ड के मुबीन खान के पास पहले से दो मंजिला पक्का मकान था, इसके बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास आबंटित कर दिया गया। वार्ड 13 के शालिगराम, वार्ड 2 के मोहनबाबू तथा राधाबाई के पास पक्के मकान होते हुए भी उनको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दे दिया गया।

दो-दो आवास आबंटित कर दिए गए
प्रधानमंत्री आवासों की सूची में 32 वें क्रम पर सबोदरा बाई और 50 वें नंबर पर सरोज बाई का नाम दर्ज है, जबकि जांच के बाद पाया गया कि दोनों नाम एक ही महिला के हैं, मजे की बात यह है कि दोनों ही नामों से एक ही महिला को दो-दो आवास आबंटित कर दिए गए।


नगरीय निकाय द्वारा किया जाता है
इसी तरह अन्य मामलों में भी अपात्रों को योजना का लाभ दे दिया गया। जांच प्रतिवेदन में लिखा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत योजना के हितग्राहियों का चयन नगरीय निकाय द्वारा किया जाता है, इस चयन सूची को संबंधित एसडीएम के माध्यम से कलेक्टर अनुमोदित करते हैं।

स्वयं के पक्के मकान
नगर परिषद शमशाबाद में भी यही व्यवस्था लागू है। इस जांच प्रतिवेदन के आधार पर संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन भोपाल ने विभागीय रिपोर्ट में कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के जिन व्यक्तियों को आवास आबंटित किए गए हैं, उनके पास पूर्व से उनके स्वयं के पक्के मकान हैं, जो पात्रता की श्रेणी में नहीं आते हैं। उन्हें भी आवास आबंटन कर दिया गया है जो नियम के विपरीत है।