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7वें वेतनमान के लिए एमटीए ने किया सामूहिक अवकाश

Krishna singh

Publish: Jul 18, 2019 06:02 AM | Updated: Jul 17, 2019 23:17 PM

Vidisha

जिला अस्पताल में मरीज हुए परेशान, मांगे नहीं मानने पर चरणवद्ध आंदोलन करते हुए देंगे त्यागपत्र

विदिशा. चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन (एमटीए) सातवां वेतनमान दिए जाने सहित विभिन्न मांगों के निराकरण के लिए बुधवार को सामूहिक अवकाश पर रहा। इस दौरान काली पट्टी बांधकर सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं दी गईं। इनकी हड़ताल से जिला अस्पताल का काम भी प्रभावित हुआ और उपचार कराने आए मरीजों की ओपीडी में लम्बी-लम्बी कतारें लगी रहीं।

 

सुबह साढ़े दस बजे अटल बिहार वाजपेयी शासकीय चिकित्सा मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा शिक्षक एकत्रित हुए और हाथों पर काली पट्टी बांधकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. डी परमहंस ने बताया कि एक जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान लागू हुआ है, लेकिन तीन साल बाद भी उन्हें सातवां वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के ही अन्य कर्मचारियों को इसका लाभ मिल रहा है। इसलिए चिकित्सा शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। इसके साथ ही चाइल्ड केयर लीड महिला चिकित्सा शिक्षकों को दी जाए, समयवद्ध विभागीय पदोन्नती की जाए, ग्रेच्युटी का लाभ दिए जाने सहित नेशनल पेंशन स्कीम लागू करने की मांग की गई।

 

...तो देंगे सामूहिक त्यागपत्र
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि वे लंबे समय से सांतवा वेतनमान दिए जाने सहित अन्य मांगों के निराकरण की मांग करते आ रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा मंत्री से लेकर पीएस, डायरेक्टर, विधायक आदि कई वरिष्ठों को ज्ञापन दे चुके, लेकिन प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में इन मांगों का निराकरण नहीं हुआ। इसलिए यदि एक दिन के सामुहिक अवकाश के बाद भी सुनवाई नहीं हुई, तो चिकित्सा शिक्षक संघ 24 जुलाई से तीन दिनी सामूहिक अवकाश पर जाएगा और इस दौरान कोई इमरजेंसी सेवाएं भी नहीं दी जाएंगीं। इसके बाद भी सरकार मांगों का निराकरण नहीं करेगी, तो सभी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा शिक्षक सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने को मजबूर होंगे।

मरीजों की लगी रही भीड़
मालूम हो कि जिला अस्पताल में एमटीए के डॉक्टर भी नियमित रूप से ओपीडी में बैठते हैं। लेकिन इनकी हड़ताल के कारण सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं देने वाले एमटीए के डॉक्टर जिला अस्पताल पहुंचे। ऐसे में जिला अस्पताल के डॉक्टर्स को ही पूरी ओपीडी संभालनी पड़ी और डॉक्टर्स की कुछ कुर्सियां खाली नजर आईं। सर्जीकल की ओपीडी में जिला अस्पताल के सिर्फ एक डॉक्टर मौजूद थे। इसी तरह दोपहर के बाद तो अधिकांश ओपीडी कक्ष में एक या दो डॉक्टर ही नजर आए और ज्यादातर कुर्सियां खाली नजर आईं। जिससे मरीज डॉक्टर्स को दिखाने के लिए परेशान हुए।

 

मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा शिक्षकों के अवकाश के कारण जिला अस्पताल के डॉक्टर्स ने ही पूरी व्यवस्था संभाली।
-संजय खरे, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल विदिशा