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जनसुनवाई में 224 में से 150 से अधिक आवेदन सिर्फ बाढ़ पीडि़तों के

Anil Kumar Soni

Publish: Sep 18, 2019 11:17 AM | Updated: Sep 18, 2019 11:17 AM

Vidisha

किसी ने कुटीर, किसी ने सर्वे, तो किसी ने की मुआवजे की मांग

विदिशा। जिला पंचायत में मंगलवार को हुई जनसुनवाई में दिनभर बाढ़ पीडि़तों का मेला जैसा लगा रहा। जनसुनवाई में कुल 224 आवेदन आए इनमें से 150 से अधिक आवेदन सिर्फ बाढ़ पीडि़तों के रहे। किसी ने घर गिरने के कारण राहत राशि की मांग की, तो किसी ने बर्बाद फसल का सर्वे कराकर राहत राशि के लिए कहा। किसी ने घर का सारा सामान पानी में खराब होने पर राहत राशि की मांग की। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के लोग समूहों में जनसुनवाई में पहुंचे। वहीं कुछ किसान अपनी बर्बाद फसल को लेकर फरियाद लगाने पहुंचे।

कुटीर योजना का लाभ भी नहीं दिया जा रहा

ग्राम ढाढौन से आई उमाबाई अहिरवार, उमेदीबाई और फरूबाई अहिरवार आदि कई ग्रामीणों ने बताया कि बारिश में उनके कच्चे घर गिर गए और गृहस्थी का सारा सामान बर्बाद हो गया, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सर्वे करने तक नहीं पहुंचा। वहीं गरीबों को कुटीर योजना का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। ग्राम दीताखेड़ी से आई विनीता और पूना अहिरवार आदि ने बताया कि उनके गांव में भी कई घरों में पानी भराने से घर का सारा सामान खराब हो गया। वहीं सुभाषनगर सहित शहर के कई क्षेत्रों से बाढ़ पीडि़त भी मुआवजे की मांग के लिए जनसुनवाई में पहुंचे।

हर संभव मदद का भरोसा दिलाया
ग्राम गमाकर से आए दो दर्जन से अधिक ग्रामीण जनसुनवाई में पहुंचे, तो डिप्टी कलेक्टर बृजबिहारी श्रीवास्तव जनसुनवाई कक्ष से बाहर जिपं के प्रवेश द्वार पर आ गए और सभी की समस्या सुनी। रामगुलाम और गौरेलाल सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बारिश में अधिकांश लोगों के कच्चे घर गिर गए हैं तथा कई घरों में पानी भराने से गृहस्थी का सामान खराब हो गया है। वहीं गांव में 300 की कुटीर मंजूर हुई और सिर्फ 33 को योजना का लाभ मिला। श्रीवास्तव ने जांच कराकर योजना का लाभ दिलाने की बात कही। जनसुनवाई में सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर तीन बजे के बाद तक आवेदक पहुंचते रहे।

बर्बाद फसल लेकर पहुंचे किसान
जनसुनवाई में कुछ किसान सोयाबीन और उड़द आदि की बर्बाद फसल को लेकर पहुंचे। किसानों ने बताया कि अधिक बारिश के कारण उनकी फसलें 100 प्रतिशत बर्बाद हो गई हैं। लेकिन अभी तक सर्वे करने कोई नहीं पहुंचा। इसलिए जल्द से जल्द सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिलवाया जाए। वहीं कुछ किसानों का कहना था कि फसल का नुकसान 100 प्रतिशत हुआ है और प्रशासन महज 10-12 प्रतिशत नुकसान होना बता रहा है।