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विदिशा में राघवजी के घर जाकर बोले थे गौर- घायल की गति घायल ही जाने...

Krishna singh

Publish: Aug 22, 2019 07:03 AM | Updated: Aug 21, 2019 23:24 PM

Vidisha

जुलाई 2016 में जब बाबूलाल गौर विदिशा आने पर राघवजी के घर पहुंचे थे

विदिशा. मंत्री पद से हटाए जाने के बाद बाबूलाल गौर बहुत दुखी थे, उसी दौरान पूर्व वित्तमंत्री राघवजी भी अपने ऊपर लगे आरोपों और पार्टी से बाहर होने के दर्द से उबर नहीं पाए थे। जुलाई 2016 में जब गौर विदिशा आने पर राघवजी के घर पहुंचे थे तो गौर ने राघवजी का हाथ थामकर अपने ही अंदाज में कहा था कि घायल की गति घायल ही जाने...। वे यादव महासभा के एक कार्यक्रम में विदिशा आए थे तो वे अपने मित्र पूर्व वित्तमंत्री राघवजी के घर जाना नहीं भूले थे। राघवजी के घर पहुंचे गौर ने खुद गुलदस्ता देकर राघवजी का स्वागत किया था, इस पर राघवजी ने इससे इंकार करते हुए कहा था कि ऐसा नहीं होगा, आप हमारे घर आए हैं स्वागत मैं करूंगा। इसके बाद दोनों बुजुर्ग नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ थामकर ठहाके लगाए। इस पर राघवजी ने कहा कि ये गौर साहब का अंदाजे बयां है। कुछ देर की औपचारिक चर्चा के बाद राघवजी और गौर की अकेले में मंंत्रणा हुई।

 

मुलाकात हुई, क्या बात हुई...
राघवजी के घर से गौर की वापसी पर मीडिया ने पूछा- मुलाकात हुई, क्या बात हुई? इस पर गौर मुस्करा कर बोले थे- क्या बात होना थी, जो हाल मेरा है, वही उनका भी है। जब उनसे पूछा गया था कि पार्टी ने 75 वर्ष की उम्र को अनफिट माना है लेकिन आप 83 में भी फिट हैं, क्या राज है? वे बोले थे- इसका राज गीता, योग और गोसेवा है।

 

...और कहा था, मैं कभी मैदान नहीं छोडूंगा
गौर ने विदिशा में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि जब मैं सीएम था तब नेतृत्व परिवर्तन पर मुझसे पूछा गया था। खुद लालकृष्ण आडवाणी ने मुझसे फोन पर बात की थी। लेकिन मंत्री पद छोडऩे को लेकर ऐसा नहीं हुआ। प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान और प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे आए थे और बोले कि पद छोडऩा है। मैंने पूछा कि पार्टी का कोई आदेश लेकर आए हैं तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए और बोले थे कि हम सिर्फ संदेश वाहक हैं। मैंने उनसे कहा था कि संदेश लिखित में होना चाहिए। तब उन्होंने कहा कि महामंत्री से बात करिए। मैंने राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल से बात की तो उन्होंने कहा कि पद छोड़ दीजिए। इसके बाद मैंने पद छोड़ दिया। विदिशा आगमन पर यादव महाभा के कार्यकर्ताओं ने खूब नारे लगाए थे। उनके नारे थे कि- गौर साहब के सम्मान में कार्यकर्ता मैदान में...। ये सुनने के बाद गौर बोले थे कि गौर भी मैदान में और कार्यकर्ता भी मैदान में। मैं कभी मैदान नहीं छोड़ूंगा।

 

इतना मलाल तो सीएम पद छोडऩे पर भी नहीं हुआ था...
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर जुलाई 2016 में विदिशा में यादव युवा महासभा के कार्यक्रम से पहले यादव महासभा के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश यादव के निवास पर पहुंचे थे। तब गौर ने अपना दर्द मीडिया से साझा किया था। उन्होंने कहा था कि सीएम का पद छोडऩे पर इतना मलाल नहीं हुआ था, जितना इस बार मंत्री पद छोडऩे को लेकर हुआ। मैं 89 साल का हूं, अच्छा होता कि 10 साल पहले ही मुझे बोल दिया जाता, आखिर इतने सालों तक मुझे क्यों ढोया गया? वे बोले थे कि जब कोई व्यक्ति टिकट लेकर ट्रेन में बैठ जाता है तो उसे बीच में नहीं उतारा जा सकता।

 

राघवजी बोले- मेरा और गौर का 60 साल से था याराना
पूर्व वित्तमंत्री राघवजी गौर को अपना बहुत अच्छा दोस्त मानते थे। वे कहते हैं कि मेरी उनसे करीब 60 साल पुरानी दोस्ती थी। उम्र में वे मुझसे 4 साल बड़े थे जबकि विधायक मैं गौर साहब से पहले बना था। वे 1970 के मेरे चुनाव में विदिशा आए थे और पालकी-ठर्र आदि की पोलिंग उन्होंने ही संभाली थी। जबकि गौर ने पहला चुनाव 1974 में लड़ा और जीता था। राघवजी कहते हैं कि मुझ पर जब आरोप लगाकर बदनाम किया गया तब भी गौर मेरे साथ थे और हर जगह कहते थे कि उनके साथ गलत हो रहा है। सीएम से भी उन्होंने आपत्ति जताई थी। वे विदिशा में ज्योति शाह के नपाध्यक्ष पद के शपथ ग्रहण में भी आए थे। राघवजी बताते हैं कि मैं गौर के सीएम रहते हुए उनके मंत्रीमंडल में भी रहा और बहुत करीब से देखा कि वे बहुत अच्छे प्रशासक भी थे, अन्यथा बुल्डोजर मंत्री का तमगा ऐसे ही किसी को नहीं मिल सकता। वे रबड़ी खाने के शौकीन थे। मीसाबंदी अशोक गर्ग कहते हैं कि 1975 में आपात काल के दौरान मैं और गौर साहब एक साथ भोपाल जेल में थे। गौर अपनी बेबाकी, मजाकिया अंदाज और जिन्दादिली के लिए जाने जाते थे।