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बारिश ने कारण नहीं चल सकी बसें, दिनभर परेशान होते रहे यात्री

Bhupendra Malviya

Publish: Sep 11, 2019 10:46 AM | Updated: Sep 11, 2019 10:46 AM

Vidisha

बारिश के कारण मंगलवार को कई रूटों पर यात्री बसें नहीं चल पाई।

विदिशा। बारिश rain के कारण मंगलवार को कई रूटों पर यात्री बसें Buses could not run नहीं चल पाई। इससे यात्री परेशान passenger upset होते रहे। कुछ रास्ता खुलने के इंतजार में बैठे रहे तो कई यात्रियों को यात्रा स्थगित करना पड़ी। बस स्टैंड पर कुछ ही रास्तों पर बसें संचालित करने की स्थिति थी।

बासौदा-अशोकनगर मार्ग बंद रहा
शेष अन्य मार्गों पर नदी, पुलियाओं, रपटों पर बारिश का पानी होने से इन मार्गों पर बसों का परिवहन बंद रखा गया। बस स्टैंड से मिली जानकारी के मुताबिक बासौदा-अशोकनगर मार्ग बंद रहा।

 

सागर मार्ग मार्ग ही चालू रह पाया
विदिशा से सिरोंज के लिए बसें नहीं चल पा रही। इसी तरह विदिशा से गैरतगंज, विदिशा से नटेरन मार्ग भी बंद रहा। सिर्फ विदिशा से शमशाबाद, विदिशा-भोपाल एवं विदिशा सागर मार्ग मार्ग ही चालू रह पाया।


रास्ते नहीं खुल पाएंगे
यहां बस स्टैंड आए ग्राम गूजरखेड़ी रामलाल अहिरवार, , ताजखजूरी कलीबाई कुशवाह आदि बसों का इंतजार कर वापस अपने घर व कुछ रिश्तेदारों के यहां रुकने के लिए बस स्टैंड से वापस लौटे। इधर बस सेवा से जुड़े कैलाश नागर ने बताया कि मंगलवार की रात में बारिश हुई तो बुधवार को भी रास्ते नहीं खुल पाएंगे।

आकड़ा प्रतिदिन बड़ रहा है
उधर मंगलवार को 31 मिमी बारिश हुई जिसके चलते बारिश का आकड़ा 1213 मिमी पहुच गया। जबकि पिछले वर्ष इस समय तक 771 मिमी बारिश हुई थी। इस तरह अभी तक 460 मिमी बारिश अधिक हो चुकी है। जो सामान्य से भी अधिक है। इसकी चपेट में आने से कच्चे मकान से लेकर पक्के मकान भी भरभरा कर गिर रहे है। जिनका आकड़ा प्रतिदिन बड़ रहा है।

 

मवेशी भी अपनी जान गवा चुके
अभी तक 480 मकान धराशायी और क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जिनकी चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। कई व्यक्ति घायल भी हो चुके हैं। मवेशी भी अपनी जान गवा चुके हैं।

 

क्योकि बारिश लगातार हो रही है। जिसके कारण सबसे Óयादा नुकसान क'चे मकानों में हो रहा है। पानी भर जाने के कारण गिर रहे हंै। नगर में ही 50 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। मंगलवार को भी बारिश का दौर रूक-रूक कर चलता रहा।

 

शहर से सम्पर्क टूट गया
सिरोंज-बासौदा, इमलानी, कुरवाई मार्ग भी बंद रहे। क्योंकि इन रास्तों पर पडऩे बाले पुलों से उपर कई फुट पानी बह रहा था। ग्रामीण क्षेत्र के कई मार्ग बंद होने से ग्रामीणो ंका शहर से सम्पर्क टूट गया। सब्जी, दूध भी कम मात्रा में शहर में आ सका जिसके कारण इनकी किल्लत रही।

 

क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें मिली
अब बारिश लोगों के लिए परेशानियों का कारण बनती जा रही है। वहीं एसडीएम के निर्देश पर क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे का काम किया जा रहा है। 478 क्षतिग्रस्त होने या गिरने की जानकारी प्रशासन के पास है। तीन दिनों की बारिश में कई मकान गिरने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें मिली हैं।

खातों में भी राशि जमा की जाएगी
वहीं 226 हितग्राहियों के खातों में 9 लाख से अधिक की राशि तहसीलदार के द्वारा प्रकरण स्वीकृत होने के बाद इनके खातों में जमा करा दी गई है। शेष हितग्राहियों के प्रकरण बनाकर मंजूरी के लिए कलेक्टर को भेजे जा रहे है। जहां से सूचना मिलने के बाद इनके खातों में भी राशि जमा की जाएगी।

नाबालिग लड़की की मौत हो गई
वहीं ग्राम पठेरा बुरान में मकान गिरने से बुजुर्ग की मौत हो गई थी। जिसके बाद परिजनों को 4 लाख की राशि स्वीकृत हुई है। इसी तरह बिजली गिरने से मल्सीपुर में एक नाबालिग लड़की की मौत हो गई थी। उसके परिजनों को भी सहायता राशि का प्रकरण स्वीकृत हो गया है। बाकि प्रकरणो में राशि डलना शेष है।


सर्वे के काम में बरती जा रही है लापरवाही
लगातार हो रही बारिश के चलते सोयाबीन, उड़द की फसल पूरी तरह से बरबाद हो गई है। इसके बाद भी जिम्मेदारो के द्वारा गम्भीरता से फसलों का सर्वे नही करवाया जा रहा है। जबकि पिछले दिनों कलेक्टर के निर्देश पर पटवारियों को सर्वे करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी कई पटवारी इस काम को गम्भीरता से नहीं ले रहे है।

पानी गिरने के कारण नष्ट होने की कंगार पर
किसानों का कहना है कि बारिश ने तो हमारी फसल को चौपट ही कर दिया है। जो बची है वह भी पानी गिरने के कारण नष्ट होने की कंगार पर है। इल्ली का प्रकोप भी सोयाबीन की फसल में तेजी से बड़ रहा है। बारिश के चलते कीटनाशक दवा का छिड़काव भी नहीं कर पा रहे हैं। सरकार के द्वारा भी किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। तभी तो सर्वे का काम प्रारंभ नहीं हुआ है। वैसे ही किसान कर्ज के तले दबे हुए हैं।

 

प्राकृतिक कहर का सामना
हर साल अन्नदाताओं को प्राकृतिक कहर का सामना करना पड़ता है। हर बार अच्छी फसल होने की उम्मीद में फसल लगाते हैं। जब फसल आने बाली होती है तो मौसम भी विपरित हो जाता है। पिछले साल बारिश नही होने के कारण। इस बार अधिक बारिश होने के कारण फसलें चौपट हो गई हैं।