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जिले में जीवन रक्षक उपकरणों के बिना दौड़ रही एंबूलेंस

Bhupendra Malviya

Publish: Sep 16, 2019 13:35 PM | Updated: Sep 16, 2019 13:35 PM

Vidisha

जिले में मरीजों की सेवा के लिए एंबूलेंस बहुत है, लेकिन इनमें अधिकांश एंबूलेंस में निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा।

विदिशा। जिले में मरीजों की सेवा के लिए एंबूलेंस बहुत है, लेकिन इनमें अधिकांश एंबूलेंस में निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा। इस तरफ न स्वास्थ्य विभाग ध्यान दे रहा, न ही जिला परिवहन विभाग। फलस्वरूप जीवन रक्षक उपकरणों के बिना एंबूलेंस सड़कों पर दौड़ रही हैं और मरीजों को जान का जौखिम उठाना पड़ रहा है।

एंबूलेंस की संख्या बढ़ती जा रही
मालूम हो कि जिले में स्कूली वाहन, यात्री बसों, लोडिंग वाहनों के खिलाफ कई बार लगातार चैकिंग होती आई है लेकिन लोगों के जीवन से जुड़ी एंबूलेंस सेवा की अनदेखी हो रही। इससे एंबूलेंस की संख्या बढ़ती जा रही है।


सड़कों पर सरपट दौडऩे की छूट मिली हुई है
शासकीय एंबूलेंस के अलावा निजी वाहनों में भी नीली बत्ती लगा लेने व एंबूलेंस लिख देने से इन वाहनों को एंबूलेंस मानते हुए सड़कों पर सरपट दौडऩे की छूट मिली हुई है और इस तरह के एंबूलेंस वाहनों से मरीजों की जान खतरे में आ रही है। जिला परिवहन विभाग जिले में कुल 34 एंबूलेंस दर्ज होना मान रहा है लेकिन इस सेवा से जुड़े कर्मचारियों के मुताबिक करीब 50 एंबूलेंस सड़कों पर दौड़ रही है।

 

कर्मचारी भी बता चुके खामियां
प्राइवेट एंबूलेंस के अलावा शासकीय एंबूलेंस में भी खामियां सामने आ रही है। पिछले दिनों 108 एंबूलेंस से जुड़े कर्मचारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भी दिया था। इसमें कर्मचारियों ने अपनी मांगों के साथ ही इन एंबूलेंसों में आवश्यक दवाएं उपलब्ध न होने व उपकरणों की कमी को उजागर किया था, लेकिन प्रशासन ने फिर भी एंबूलेंस सेवाओं की खामियों पर ध्यान नहीं दिया है।

 

एंबूलेंस में यह उपकरण जरूरी
मिली जानकारी के अनुसार एंबूलेंस में केटेगिरी के अनुसार स्टे्रचर, आक्सीजन, कार्डिक मानीटर, टे्रक्शन डिवाइस, डायग्रोस्टिक इक्कीवमेंट, बीपी मापने की मशीन आदि होना जरूरी है, लेकिन अधिकांश एंबूलेंस में इन पर्याप्त उपकरणों की कमियां हैं।

 

अस्पताल परिसर में दो दिन से 108 एंबूलेंस खड़ी
यहां तक कि अधिकांश एंबूलेंस में फस्र्ट एड बॉक्स तक कइ्र एंबूलेंस में नहीं मिलेेंगे। इस हाल में एंबूलेंस सेवा जिला अस्पताल परिसर में दो दिन से 108 एंबूलेंस खड़ी है। इस सेवा से जुड़े कर्मचारियों के मुताबिक एंबूलेंस का सेल्फ खराब हो गया और भोपाल से आना है। ऐसे में दो दिन से इस एंबूलेंस की सेवा बंद है।


भोपाल ले जाना पड़ता है
वहीं 108 एंबूलेंस में आक्सीजन की व्यवस्था भी भोपाल से होती है। अगर जिले में किसी एंबूलेंस में आक्सीजन खत्म हो जाए तो एंबूलेंस को भोपाल ले जाना पड़ता है या भोपाल से आक्सीजन सिलेंडर आता है। तब तक एंबूलेंस बिना आक्सीजन के मरीजों को उपलब्ध रहती है।


मनमानी राशि देना पड़ रही है
वहीं इन एंबूलेंस की सर्विसिंग सागर में होती है। ऐसे में एंबूलेंस को करीब दो दिन लग जाते हैं। वहीं बड़ी संख्या में प्राइवेट एंबूलेंस भी हैं लेकिन इनका कोई किराया निर्धारित नहीं है। इससे रेफर मरीज को भोपाल या अन्य स्थानों पर जाने के लिए मनमानी राशि देना पड़ रही है।


जिले की सभी एंबूलेंस की जांच की जाएगी। नियमों का पालन कराया जाएगा। एंबूलेंस के लिए सीएमएचओ व सिविल सर्जन के प्रमाणित पत्र पर ही फिटनेस प्रमाण जारी किए जाएंगे।
गिरिजेश वर्मा, जिला परिवहन अधिकारी