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Vishwakarma Jayanti 2019: इस शुभ मुहूर्त में करें विश्वकर्मा पूजा, जानिए पूजन विधि और महत्व

Sarweshwari Mishra

Publish: Sep 16, 2019 12:08 PM | Updated: Sep 16, 2019 12:08 PM

Varanasi

देवताओं का शिल्पकार” के नाम से भी जाना जाता है भगवान विश्वकर्मा

वाराणसी. सृजन और निर्माण के देवता विश्वकर्मा जी की जयंती 17 सितम्बर मनाया जाएगा। । मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में विश्‍वकर्मा को देवशिल्‍पी यानी कि देवताओं के वास्‍तुकार के रूप में पूजा जाता है। पूजा को ”देवताओं का शिल्पकार” के नाम से भी जाना जाता है। विश्‍वकर्मा पूजा के मौके पर ज्‍यादातर दफ्तरों में छुट्टी होती है और कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान औजारों, मशीनों और दुकानों की पूजा करने का विधान है।
आइए जानते हैं किस तरह करें विश्वकर्मा की पूजा और क्या है शुभ मुहूर्त….

भगवान विश्वकर्मा की पूजन विधि
भगवान विश्वकर्मा की पूजा के दिन फेक्ट्रियों, ऑफिस और उघोगों में लगी हुई मशीनों की पूजा की जाती है। सबसे पहले अक्षत अर्थात चावल, फूल, मिठाई, फल रोली, सुपारी, धूप, दीप, रक्षा सूत्र, मेज, दही और भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर इत्यादि लें। इसके बाद अष्टदल की बनी रंगोली पर सतनजा बनाएं। फिर श्रद्धा और विश्वास के साथ विश्वकर्मा जी की मूर्ति या फोटो पर फूल चढ़ाकर कहें- हे विश्वकर्मा जी आइए, मेरी पूजा स्वीकार कीजिए।

इसके बाद सभी मौजूद औजारों पर तिलक और अक्षत लगाएं फिर फूल चढ़ाकर और सतनजा पर कलश रख दें। इसके बाद कलश को रोली-अक्षत लगाएं फिर दोनो को हाथ में लेकर ओम पृथिव्यै नमः ओम अनंतम नमः ओम कूमयि नमः ओम श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः का मंत्र पढ़कर सभी मशीनों, विश्वकर्मा पर और कलश पर चारों तरफ छिड़क दें, साथ ही फूल भी चढ़ा दें। फिर भगवान को मिठाई खिलाएं। इसके बाद फैक्ट्री, दुकान, ऑफिस आदि जगहों पर आप पूजा कर रहे हों, अपने कर्मचारियों और दोस्तों के साथ भगवान विश्वकर्मा की आरती करें और प्रसाद बांट दें।

विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त 2019
इस वर्ष कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा का आयोजन हो रहा है। यह एक शुभ स्थिति है। संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7 बजकर 2 मिनट से है। इस समय पूजा आरंभ किया जा सकता है।


सुबह 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल है और शाम 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक राहुकाल रहेगा। इन समयों को छोड़कर दिन में कभी भी पूजा आरंभ कर सकते हैं।