स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

जन्माष्टमी 2019: अगर इस दिन ऐसे मूर्ति की कर लेंगे पूजा, तो पूरी हो जाएगी मनोकामना

Sarweshwari Mishra

Publish: Aug 19, 2019 14:10 PM | Updated: Aug 19, 2019 14:10 PM

Varanasi

इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला भी झूलाने की परंपरा भी है

वाराणसी. भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्माष्टमी का त्योहार मनाते है। इस त्योहार को श्री कृष्ण के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में धरती पर आठवां अवतार लिया था। भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे इसलिए इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी और जन्माष्टमी के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में झांकियां सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला भी झूलाने की परंपरा भी है। अगर पूजा करने के लिए मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी और चरण स्पर्श करती हुई लक्ष्मी जी की तस्वीर मिल जाए तो बेहतर रहता है।

 

कृष्ण जन्माष्टमी पर कैसे करें पूजन


1. व्रत के पूर्व रात्रि को हल्का भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।


2- सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें।


3- व्रत के दिन सुबह स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं।


4- इसके बाद जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें।


5- ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥


6- अब शाम के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए 'सूतिकागृह' नियत करें।


7- इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।


8- मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अगर ऐसा चित्र मिल जाए तो बेहतर रहता है।


9- इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः लेना चाहिए।


10- फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें


11-'प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः। वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः। सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।'


12- अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें।