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नियुक्ति मामले में छात्रों के आरोपों से BHU प्रशासन का इंकार, कहा, सभी नियम कानून का किया जा रहा पालन

Ajay Chaturvedi

Publish: Oct 22, 2019 20:25 PM | Updated: Oct 22, 2019 20:25 PM

Varanasi

- BHU में चयन प्रक्रिया भारत सरकार के दिशा निर्देश के तहत

-पिछले एक सप्ताह से छात्र हैं आंदोलित

-छात्र आंदोलन के चलते भाजपा महासचिव राम माधव के काफिले को मोड़ना पड़ा था

वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में चल रही शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर जहां अभ्यर्थी छात्र अनियमितता का आरोप लगा कर एक सप्ताह से आंदोलित हैं। लगातार धरना-प्रदर्शऩ कर रहे हैं वहीं मंगलवार को बीएचयू प्रशासन ने उनके विरोध प्रदर्शन को सिरे से नकार दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि यूनिवर्सिटी में केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के अनुरूप ही नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। बता दें कि इस नियुक्ति प्रक्रिया के विरोध में चल रहे छात्रों के प्रदर्शन में सोमवार को भाजपा महासचिव जम्मू व कश्मीर के प्रभारी राम माधव का काफिला फंस गया था। जिसे लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की काफी किरकिरी हुई।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि 21 व 22 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के विधि संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए होलकर भवन में चयन समिति की बैठक निर्धारित थी। इनमें आरक्षित और अनारक्षित, दोनों ही श्रेणियों की रिक्तियां शामिल थीं। आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी के पदों के लिए साक्षात्कार में शामिल होने की अनुमति की मांग को लेकर कुछ छात्र और बाहरी लोग होलकर भवन (चयन एवं आकलन प्रकोष्ठ) के बाहर धरने पर बैठ गए। इस धरने के कारण होलकर भवन में प्रवेश बाधित हुआ और चयन प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने में भी रुकावट आई।

विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ राजेश सिंह ने बताया कि विभिन्न विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 438 रिक्त पदों को विज्ञापित किया गया था। संबद्ध समितियों द्वारा आवेदकों की शॉर्टलिस्टिंग के पश्चात नियमित रूप से साक्षात्कार कराए जा रहे हैं। शॉर्टलिस्ट किये गए अभ्यर्थियों की सूची, शॉर्टलिस्ट नहीं किए गए और अयोग्य पाए गए अभ्यर्थियों की सूची के साथ, साक्षात्कार की तारीख निर्धारित होने के काफी पहले ही बीएचयू की वेबसाइट पर नियमित रूप से जारी की जाती है।

उन्होंने बताया कि इस प्रकार के विज्ञापित पदों के लिए पूर्व में हुए साक्षात्कारों में भी, बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी थे, जो आरक्षित वर्ग से तो थे, लेकिन उन्होंने अनारक्षित वर्ग की रिक्तियों के लिए आवश्यक अहर्ता से किसी भी छूट का लाभ नहीं लिया था। ऐसे अभ्यर्थियों को न केवल शॉर्टलिस्ट कर साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था बल्कि वे वरीयता सूची में स्थान पाने में भी सफल हुए थे। इतना ही नहीं, ऐसे कई अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में उनकी परफॉर्मेन्स के आधार पर अनारक्षित पदों पर चयनित भी किया जा चुका है।

डॉ सिंह ने बताया कि आरक्षित श्रेणी में नेट की योग्यता रखने वाले आवेदकों की अनारक्षित पदों के लिए अयोग्यता के संदर्भ में विश्वविद्यालय को कुछ अभिवेदन मिले थे, जिन्हें रेक्टर और विधि प्रकोष्ठ के संयोजक की समिति को भेजा गया था। इस संदर्भ में भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों तथा उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय के निर्णयों के मद्देनज़र, समिति ने ये फ़ैसला लिया कि इस बारे में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के ऑफिस मेमोरेन्डम के तहत जिन अभ्यर्थियों ने आरक्षित श्रेणी में नेट के लिए छूट का लाभ लिया है, उन्हें केवल आरक्षित श्रेणी के पदों के लिए होने वाले साक्षात्कार के लिए ही शॉर्टलिस्ट किया जा सकता है, न कि अनारक्षित श्रेणी के पदों के लिए।

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इस विषय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मांगे गए स्पष्टीकरण के जवाब में यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालय को चयनित अभ्यर्थियों की श्रेणी और नेट प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता का यूजीसी से सत्यापन कर लेना चाहिए। यूजीसी के स्पष्टीकरण के अनुसार जहां तक असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में अहर्ता का प्रश्न है, विश्वविद्यालय को इस बारे में भारत सरकार और यूजीसी के नियमों का पालन करना चाहिए।

इस विषय पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग से भी एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिस पर कुलपति ने पुनः विश्वविद्यालय के विधि प्रकोष्ठ के संयोजक से चर्चा की। विधिक राय ने इस बात को दोहराया है कि आरक्षित श्रेणी के केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी के पदों के लिए साक्षात्कार के लिए बुलाया जा सकता है जिन्होंने नेट क्वॉलिफाई करने के लिए आरक्षित श्रेणी के तहत कोई छूट नहीं ली है, क्योंकि असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए नियुक्ति में नेट परीक्षा अनिवार्य न्यूनतम अहर्ताओं में से एक है।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों और धरनारत लोगों व कुछ शिक्षकों के बीच कई चरण की वार्ता भी हुई, जिसमें विश्वविद्यालय ने इस संबंध में यूजीसी से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के बीएचयू के प्रयासों को भी विस्तार से बताया गया, हालांकि धरनारत लोग अपनी मांग को दोहराते रहे।

इस विषय को वाराणसी ज़िला व पुलिस प्रशासन के संज्ञान में लाया गया है। 21 अक्टूबर को सायं 5.00 बजे प्रदर्शनकारी छात्र चले गए। आज उनके द्वारा किसी प्रकार का धरना नहीं दिया गया।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों के लिए चल रही चयन प्रक्रिया में भारत सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों और दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन हो रहा है और इस बारे में विरोध प्रदर्शित कर रहे कतिपय लोगों के दावे इन दिशानिर्देशों/नियमों के अनुरूप नहीं हैं।