स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

बिना यंत्रों को जांच करने पहुंचा ये विभाग

Ashish Sikarwar

Publish: Sep 19, 2019 12:00 PM | Updated: Sep 19, 2019 00:16 AM

Ujjain

शहर के सर्विसिंग सेंटर संचालकों को बुधवार को प्रदूषण विभाग के अफसरों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

नागदा. शहर के सर्विसिंग सेंटर संचालकों को बुधवार को प्रदूषण विभाग के अफसरों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान उज्जैन से पहुंचे कनिष्ठ वैज्ञानिक आरडी बाघ, प्रदूषण विभाग के आरपी शर्मा, एमएल सिंदल ने प्रजापत सर्विस सेंटर, साईं सर्विस सेंटर, महावीर सर्विस सेंटर, जय माता दी सर्विस सेंटर, बाबा सर्विस सेंटर, आजाद ढाबा सर्विस सेंटर, रांगोली ढाबा सर्विस सेंटर से जांच के लिए नमूने लिए। सेंटरों पर होने वाले वाहनों की धुलाई से निकलने वाली पानी के सैंपल को विभागीय अधिकारियों ने एकत्र किया। विडंबना यह है कि कार्रवाई करने पहुंचे अधिकारियों ने बिना किसी इंस्टूमेंट के नमूने एकत्र कर डिब्बे में रख लिए। नियमानुसार कांच के बीकर की सहायता से नमूना एकत्र कर डिब्बे में रखा जाता है।
क्या है पूरा मामला : दरसअल शहर के सर्विंसिंग सेंटर संचालकों द्वारा वाहनों की धुलाई की जाती है। इस दौरान निकलने वाला डीजलयुक्त पानी शहर की नालियों में बहाया जा रहा है। जो सीधे चंबल में जाकर नदी को दूषित कर रहा है। उक्त कथन प्रदूषण विभाग के कनिष्ठ वैज्ञानिक आरडी वाघ का है। कार्रवाई करने पहुंचे बाघ द्वारा सर्विसिंग सेंटर संचालकों को लीगल नोटिस देते हुए प्रदूषित पानी की निकासी के लिए एक टैंक की व्यवस्था करने की बात कही गई। साथ ही टैंक में उपस्थित होने वाले पानी को रिसाइकिल कर नालियों में छोड़े जाने की समझाइश दी।
बिना यंत्रों के पहुंचे कार्रवाई
करने : परेशानी यह है कि शहर में प्रदूषण विभाग की ओर से यदा कदा कार्रवाई की जाती है। अधिकारियों से सवाल पूछे जाने पर वह यह तक स्पष्ट नहीं कर पाते कि कार्रवाई किसकी शिकायत और किसके कहने पर की जाती है। शहर में प्रदूषण विभाग का कार्यालय तो मौजूद है, लेकिन वह केवल दिखावे के लिए। कार्यालय की बागडोर एक सैंपलर के भरोसे है, जबकि कनिष्ठ वैज्ञानिक की नियुक्ति नहीं होने से शहर में प्रदूषण को लेकर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। बुधवार को की गई कार्रवाई के दौरान भी इसी प्रकार की स्थिति देखने को मिली। कार्रवाई करने पहुंचे अधिकारी केवल प्लास्टिक का डिब्बा लेकर सैंपल एकत्र करने पहुंचे थे।
आधा दर्जन सर्विस सेंटरों पर प्रदूषण विभाग की ओर से कार्रवाई कर लीगल नोटिस दिए गए हैं। साथ ही उन्हें समझाइश दी गई है कि सर्विसिंग के बाद निकलने वाले पानी को एक टैंक में एकत्र करें और उसका उचित निष्कासन करें।
आरडी बाघ, कनिष्ठ वैज्ञानिक, प्रदूषण विभाग