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दो दिन के लिए घर छूटा, तो ट्रेन को ही बना लिया अपना आशियाना...

Lalit Saxena

Publish: Sep 19, 2019 09:14 AM | Updated: Sep 18, 2019 23:30 PM

Ujjain

Ujjain News: राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने उज्जैन आए देश के विभिन्न रेल मंडलों के रेलकर्मियों के लिए स्पेशल ट्रेन में ही सोने-रहने की व्यवस्था की गई है।

उज्जैन. स्टेशन के प्लेटफॉर्म नं. 8 पर खड़ी दो स्पेशल ट्रेन रेलकर्मियों के लिए आशियाना बन गईं। करीब 5-6 हजार रेलकर्मी इसी में अपनी नित्य क्रिया कर रहे हैं। राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने उज्जैन आए देश के विभिन्न रेल मंडलों के रेलकर्मियों के लिए स्पेशल ट्रेन में ही सोने-रहने की व्यवस्था की गई है। हालांकि आला अधिकारियों को अन्यत्र स्थानों पर ठहराया गया, लेकिन बाकी कर्मियों के लिए दो दिनों से यह ट्रेन उनका आशियाना बन गई।

महिलाओं का शोषण न हो, उनके आत्मसम्मान का ध्यान रखा जाए

रेलवे स्टॉफ में सेवारत महिलाओं का किसी भी तरह का शोषण नहीं होना चाहिए, उनके आत्मसम्मान का पूरी तरह से ध्यान रखा जाए। नारी को मत मारिए, नारी जग की शान...नारी है दुर्गा-काली, नारी है तूफान...। कुछ इस तरह के नारे और उद्बोधन देते हुए महिलाएं मंच से गरजीं, तो सामने बैठी अन्य महिलाओं में जोश भर गया और पुरुषों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। पश्चिम रेलवे मजदूर संघ की राष्ट्रीय इकाई नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन का दो दिवसीय २९वां राष्ट्रीय अधिवेशन बुधवार को समाप्त हो गया। अधिवेशन के अंतिम दिन महिलाओं और युवतियों का सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें उन्होंने बेबाकी से अपनी पीड़ा सुनाई और अनुभव साझा किए।

मंच से सुनाई नारी के आत्मसम्मान की हकीकत

गुजरात के अहमदाबाद से आई जूनियर क्लर्क दीपा वी. शाह ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा एक महिला अपने अधिकारी के पास शिकायत लेकर पहुंची तो बॉस बोलता है कि उसने कुछ किया तो नहीं ना, सिर्फ इशारे ही तो किए हैं। अब ऐसी परिस्थितियों में महिला का आत्मसम्मान कहां बचा। उसका अपना स्टॉफ और बॉस ही साथ नहीं दे रहा, तो दूसरों से वह क्या उम्मीद रखे।

मैटरनिटी लीव के दौरान अवकाश दिया जाए
इ.वे. रेलवे उड़ीसा से आई मैकेनिकल डिपार्टमेंट की रूनी बेहरा ने कहा रेलवे स्टॉफ में मौजूद सभी महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव के अलावा ऋतुचक्र के दौरान तीन दिन का अवकाश मिलना चाहिए। साथ ही परिवार के लिए अलग से कोटा दिया जाए, ताकि ट्रेनों में यात्रा के दौरान उनके परिवारों को किसी तरह की परेशानी न हो।

शिफ्ट वाइज हो महिलाओं की ड्यूटी
कमर्शियल डिपार्टमेंट बैंगलूरू से आई सरला एंथोनी ने कहा कि जिन घरों में महिला और पुरुष दोनों ही रेलवे में कार्यरत हों, तो ऐसे में कई बार एक ही समय में दोनों की ड्यूटी लग जाती है। कई बार इससे परिवार और बच्चों के लिए परेशानी हो जाती है। मेरा ये सुझाव है कि पति और पत्नी की ड्यूटी एक समय न लगाकर शिफ्ट वाइज हो, ताकि परिवार परेशानियों से बच सकें।

मंच से मिला सम्मान

अधिवेशन के आखिरी दिन महिला सम्मेलन में शामिल देशभर से आई ऐसी महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने क्षेत्र में अच्छा कार्य प्रदर्शन किया और सच्ची निष्ठा व लगन से अलग पहचान बनाई थी। ऐसी चुनिंदा महिला रेल कर्मियों का शॉल ओढ़ाकर व प्रमाण पत्र देकर सम्मान किया गया। इस मौके पर महामंत्री डॉ एम. राघवैया, संघ के महामंत्री जेजी माहुरकर ने महिला सम्मेलन में उद्बोधन दिया।