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पांचवीं बार औसत से पार वर्षा

Shailesh Vyas

Publish: Sep 19, 2019 21:51 PM | Updated: Sep 19, 2019 21:51 PM

Ujjain

इस बार इंद्र देवता खासे मेहरबान रहें है। 10 वर्ष में पांचवीं बार बरसात का आंकड़ा औसत से पार चला गया। बरसात के सीजन में इस वर्ष 110 में 74 दिन बादल बरसे है।

उज्जैन. इंद्र देवता इस बार खासे मेहरबान हैं। यही वजह है कि बारिश के सीजन के अभी तक के कुल 110 दिन में से 74 दिन तक बरसात हुई। इसके चलते गुरुवार तक 1196.0 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके चलते यह अभी रेकॉर्ड वर्षा में शुमार हो गई है। 10 वर्ष में पांचवीं बार वर्षा का आंकड़ा औसत से पार गया है। वैसे मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अभी रुक-रुक कर बरसात का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इस बार उज्जैन में सबसे अधिक बरसात का कीर्तिमान बना, लेकिन कभी भी बाढ़ की स्थिति नहीं बनी। दरअसल इस वर्ष बरसात का सिलसिला रुक-रुक कर जारी रहा। इससे एकदम जलभराव की स्थिति नहीं बनी। इस वर्ष अभी तक बंगाल की खाड़ी से करीब 13 कम दबाव के क्षेत्र एक के बाद एक कर आते रहे। इससे बेहतर बरसात का क्रम बना हुआ है।
सितंबर में सबसे अधिक
जीवाजी वेधशाला के ज्ञात रेकॉर्ड के अनुसार जाते मानसून के वक्त सितंबर में सबसे अधिक वर्षा का रेकॉर्ड इस बार बन गया और वह भी सितंबर में केवल 18 दिन में। जीवाजी वेधशाला के सितंबर में पूरे माह में सबसे अधिक बरसात 2012 में 290.4 मिमी दर्ज की गई थी। इस बार 18 सितंबर तक ही 331 मिमी दर्ज की गई है। अभी वर्षाकाल के 12 दिन शेष हैं।
साल दर साल बारिश
वर्ष बरसात
2009 809.2 मिमी
2010 617.2 मिमी
2011 1098.0 मिमी
2012 978.0 मिमी
2013 1010.0 मिमी
2014 496.4 मिमी
2015 1419.0 मिमी
2016 1003.0 मिमी
2017 807.6 मिमी
2018 842.0 मिमी
( उक्त वर्षा 30 सितंबर तक की स्थिति में )
2019 (18 सितंबर तक) 1196.0 मिमी.
जारी रहेगा बरसात का सिलसिला

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक वर्तमान में एक कम दबाव का क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में बन चुका है। प्रदेश में भी मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी आने का सिलसिला बना हुआ है। इससे रुक-रुक कर बौछारों का सिलसिला सितंबर अंत तक बने रहने की संभावना है।