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सपना बनकर रहकर गया फ्रीगंज पुल, देवासगेट बस अड्डा को इसकी दरकार

rishi jaiswal

Publish: Sep 20, 2019 08:00 AM | Updated: Sep 20, 2019 01:06 AM

Ujjain

2021 के मान से बनी योजनाओं के दर्जनों काम अधूरे, पुराने शहर के यातायात को सुगम करने मार्ग चौड़ीकरण भी नहीं, सिंहस्थ ने दिए पंख, अब दो साल और शेष...

उज्जैन. मास्टर प्लान-२०२१ में रखे गए शहर विकास के सपनों को पूरा करने में अब से महज दो साल ओर बचे हैं। इस योजना के बनने से अब तक के १३ सालों में शहर विकास को सिंहस्थ महापर्व के चलते पंख लगे लेकिन अब भी कई काम धरातल पर नहीं उतर सके। इनमें माधव क्लब से देवासगेट तक प्रस्तावित पुल, देवासगेट बस स्टैंड का संख्याराजे धर्मशाला तक विस्तार, पुराने शहर के मार्गो का चौड़ीकरण, ट्रांसपोर्ट नगर, पिकअप बस स्टैंड, नए औद्योगिक क्षेत्र विकास अहम है। इन मुद्दों पर कागजी योजनाएं तो बनती रही ंलेकिन अमल नहीं हो सका। शहर की आगामी जरूरतों के मान से योजनाओं पर आगामी समयावधि में काम होना जरूरी है। ताकि अब तैयार हो रहे मास्टर प्लान-२०३१ में इससे अलग योजनाओं को शामिल किया जा सकें।
७ लाख की आबादी को दृष्टिगत रखते हुए तैयार हुई विकास योजना में अब भी कई जरूरी योजनाओं पर क्रियान्वयन नहीं हो सका। कभी राजनीतिक खींचतान, स्वार्थ कारणों व कमजोर प्रशासनिक इच्छाशक्ति में काम अटके रहे। वह तो सिंहस्थ २०१६ के दरमियान ११ सेतू की सौगात, एमआर मार्ग निर्माण, आंतरिक चौराहों का विस्तारीकरण हो गया, अन्यथा योजना २०२१ केवल कागजी ही रह जाती। पत्रिका ने एेसे कुछ प्रोजेक्ट तलाशे, जो योजना में शामिल तो थे, लेकिन इन पर मैदानी अमल नही हो पाया।
ये कुछ बड़े काम, जो शहर की जरूरत, लेकिन अधूरे
१. माधव क्लब से देवासगेट या फ्रीगंज के समानांतर पुल
योजना में माधवक्लब से देवासगेट तक नवीन ब्रिज प्रस्तावित है। इसको लेकर कई बार मुद्दा उठा, बाद में इसकी जगह फ्रीगंज पुल के समानांतर नया पुल बनाने की योजना बनी। सिंहस्थ पहले ये मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री के सामने उठता रहा। वहीं देवास रोड से धतरावदा पंचक्रोशी मार्ग को मिलाने का पुल भी नहीं बन सका।
दिक्कत : राजनीतिक खींचतान और इच्छाशक्ति के अभाव में अब तक अधूरा है। पूर्व सरकार ने इसके लिए राशि मंजूर भी कर दी थी, बावजूद यह काम नहीं हो सका।
जरूरत : फ्रीगंज पुल सर्वाधिक व्यस्त मार्ग है। इसके विकल्प के तौर पर नया पुल जरूरी है। ताकि यातायात जाम से निजात मिले।
२. मकोडि़या आम नाका और मक्सी रोड पर बस अड्डा
शहर में बसों के दबाव को कम करने मकोडि़या आम नाका आगर रोड व डालडा फैक्ट्री मक्सी रोड पर बस अड्डा निर्माण। ये काम सिंहस्थ से पहले भी नहीं हो सके। इसके साथ ही देवासगेट बस स्टैंड के पास थाना, डाकघर, सख्याराजे धर्मशाला की भूमि अधिगृहीत कर इसका विकास प्रस्तावित था। यहां एेसा कुछ नहीं हुआ।
दिक्कत : भूमि अधिग्रहण करने में आ रही व्यवहारिक अड़चन व योजना अनुरूप कोई प्रयास नहीं होने से ये प्रस्ताव कागजों तक ही सीमित है। जनप्रतिनिधियों ने भी इस काम मेंं कोई रुचि नहीं दिखाई, वहीं कुछ ने इसका विरोध किया।
जरूरत : शहर के बीच होने से देवासगेट पर अत्यधिक दबाव रहता है। दो नए बस अड्डे बनने से यात्रियों को सुविधा व यातायात नियंत्रण में मदद मिलेगी।
३ - शहनाई उद्यान पर खेल प्रशाल व नानाखेड़ा स्टेडियम विकास
महानंदा नगर स्थित शहनाई उद्यान पर खेल प्रशाल विकसित करने प्रस्तावित था। खेल क्षेत्र तो विकसित हुआ लेकिन घर के अंदर खेलों के लिए सुविधाएं नहीं। नानाखेड़ा स्टेडियम का भी विकास नहीं हो सका। यह अब भी बदहाल हैं। साथ ही अन्यत्र उपयुक्त भूमि पर खेल गतिविधियों का विस्तार होना था, जो नहीं हुआ।
दिक्कत: शहनाई उद्यान उज्जैन विकास प्राधिकारण के स्वामित्व का है। इसको निजी संस्था को देने के बाद कानूनी विवाद। सालों तक मामला उलझा रहा। लिहाजा कोई बेहतर योजना नहीं बनी।
जरूरत : खिलाडि़यों के लिए शहर में आधुनिक खेल सुविधाओं का अभाव है। इससे प्रतिभाओं को निखरने का मौका नहीं मिलता, जबकि इसकी दरकार है।
४ - आंतरिक मार्गों का चौड़ीकरण नहीं, समस्याएं बरकरार
पुराने शहर में कोयला फाटक से छत्रीचौक मार्ग, केडी गेट से इमली तिराहा, बीमा अस्पताल चौराहा से बडऩगर मार्ग बड़े पुल तक मार्ग चौड़ीकरण योजना में प्रस्तावित है। कभी मुआवजे का संकट तो कभी प्रभावितों के विरोध में इस पर अमल नहीं हो सका।
दिक्कत : चौड़ीकरण के लिए प्रयास हुए, लेकिन इसके साथ विरोध शुरू। जनप्रतिनिधि एकमत नहीं हुए तो प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण के लिए राशि कि समस्या।
जरूरत : मुख्य बाजार होने से वाहनों का अत्यधिक दबाव होने से दिनभर जाम लगता है। बाहर के लोग भी काफी संख्या में आते हैं। चौड़ीकरण होने से यातायात सुगम बनेगा।
ये है योजना २०२१ के अहम बिंदु
योजना तैयार - साल २००५ में
समयावधि - साल २०२१ तक
प्रस्तावित राशि - १८५० करोड़
भूमि अधिग्रहण - ५००६ हेक्टेयर
अब कितना समय - ०२ साल और
योजना में शामिल ये काम भी अधूरे
एमआर २२ से २६ मार्ग का विस्तार व निर्माण
मोलूखेड़ी में नए औद्योगिक क्षेत्र का विकास
इंदौर मार्ग के ग्राम मेंडिया में ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना।
गंभीर बांध के अलावा वैकल्पिक जल संग्रहण इकाई व नवीन बांध।
क्षिप्रा नदी पर दो मेगावॉट बिजली उत्पादन का बिजलीघर।
योजना के ये बड़े काम जो बने सौगात
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में ५५० बिस्तर का चरक अस्पताल।
सिंहस्थ से पूर्व विभिन्न स्थानों पर ११ सेतु व नवीन उपमार्ग।
कार्तिक चौक क्षेत्र में महाकाल सवारी मार्ग चौड़ीकरण।
महाकालेश्वर मंदिर सुविधा केन्द्र व रुद्रसागर विकास।
हरिफाटक पुल से मकोडि़याआम (आगर मार्ग) तक चौड़ीकरण।
चामुंडा चौराहा से प्रेमछाया होते हुए एटलस चौराहा तक नवीन मार्ग निर्माण।
बन रही २०३१ की योजना
शहर विकास को नई दिशा देने अब साल २०३१ के मान से विकास योजना तैयार हो रही है। पिछली बार के अधूरे कामों को इसमें शामिल किया जाएगा। नए क्षेत्रों में विकास के आयाम प्रस्तावित होंगे। इसके लिए सर्वे शुरू हो चुका है। जानकारों के सुझाव लेकर इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। २०२० तक इसे अंतिम रूप देने का लक्ष्य है।