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कुओं में महज 5 से 10 फीट दूर रहा पानी

Manish Joshi

Publish: Oct 21, 2019 02:13 AM | Updated: Oct 21, 2019 02:13 AM

Udaipur

MONSOON: 13 वर्ष के बाद भूजल स्तर में जबर्दस्त सुधार, छलछला उठे कुएं, 4 हजार हैक्टेयर तक बढ़ेगा रकबा

मेनार . इस साल अतिवृष्टि और सितंबर में लगातार मूसलाधार बारिश से जिलेभर के सभी नदी-नाले उफनने के साथ बांध, तालाब सहित अभी जलाशय छलछला गए हैं।

मानसून से पूर्व जिन कुओं का पानी मार्च-अप्रेल में बिल्कुल सूख गया था, उनमें अब किसान झुककर या 5 10 फीट की रस्से से बाल्टी बांधकर पानी भर रहे है। वल्लभनगर उपखण्ड सहित मेनार के समीपवर्ती इलाकों में सैकड़ों कुओं का जलस्तर 80 फीट तक ऊपर आया है। ग्रामीणों ने बताया कि इस साल अच्छी बारिश से भले ही खरीफ की फसल खत्म हो गई है लेकिन किसानों को अब रबी फसल में बम्पर पैदावार की उम्मीद है। मेनार सहित रुंडेडा, नवानिया, तारावट, बामणिया, बरोडिय़ा, अमरपुरा खालसा सहित नेशनल हाईवे किनारे बसे सभी गांवों में स्थित कुओं में जलस्तर बढ़ा है।

कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्र में औसत 600 मिमी के मुकाबले में इस बार 864 मिमी बारिश हुई। वल्लभनगर तहसील के क्रिटिकल जोन में आने वाले कुओं का जलस्तर भी बढ़ेगा जिससे फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। साथ ही तालाबों के लबालब होने से मवेशियों को फायदा मिलेगा।

रिकॉर्ड 44 दिन तक छलका धण्ड तालाब
कस्बे के ब्रह्मसागर, धण्ड तालाब सहित चारों एनीकट के छलकने से मेनार से राणेरा तालाब तक 15 किलोमीटर दायरे के गांवों में स्थित कुओं में जलस्तर बढ़ गया। करीब 13 साल के बाद कुओं में जलस्तर बढऩे से किसानों में खुशी छाई है। धंड तालाब इस बार रिकॉर्ड 44 दिन तक छलका, जो इससे पहले 2006 में 33 दिन छलका था।

इस बार पड़ेगी कड़ाके की सर्दी

बारिश का दौर अक्टूबर के पहले सप्ताह तक रहने से जानकारों का कहना है कि इस बार क्षेत्र में कड़ाके की ठंड बढऩे की संभावना है। किसानों के लिए ठंड फायदेमंद रहेगी क्योंकि गेंहू का उत्पादन बढ़ेगा।

फसलों में भी होगा बदलाव
किसानों की मानें तो कुओं का जलस्तर सुधरने से अब फसलों की बुवाई में भी बदलाव होगा। पहले की तरह खेतों में कपास, सरसों, अरंडी, गेहूं, जौ, मिर्च आदि फसलों की बुवाई की जाएगी, ताकि उसके उत्पादन से अधिक आय प्राप्त हो सके।

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भारी बारिश से भूमिगत जलस्तर में काफी सुधार हुआ है। कई क्षेत्रों में तो बोरवेल से पानी ओवरफ्लो हुआ है। कुओं में जलस्तर बढऩे से इस बार रबी फसल का रकबा 4 से 5 हजार हेक्टेयर बढऩे की संभावना है। गेंहू , चना, तारामीरा आदि फसलों का रकबा बढ़ेगा। अत्यधिक ठंड पड़ेगी जिससे गेंहू की फसल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। किसान अन्य फसलों पर भी प्रयोग करेंगे।
मदन सिंह शक्तावत, कृषि अधिकारी भींडर