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इस बार देश में पेपरलेस जनगणना

bhuvanesh pandya

Publish: Aug 18, 2019 19:38 PM | Updated: Aug 18, 2019 19:38 PM

Udaipur

- मोबाइल एप से होगा काम -

- २०२१ में होगी गणना

- राज्य के तीन जिलों के क्षेत्रों को किया शामिल

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर. देश में २०२१ की जनगणना पेपरलेस होगी। इसके लिए बकायदा सरकार ने एप लांच किया है जिसके माध्यम से जनगणना की जाएगी। इस बार की जनगणना के कई मानक बदलेंगे। वक्त और जरूरत के हिसाब से इनमें बदलाव किया जाएगा। जनगणना से पहले सरकार ने इसका प्री टेस्ट शुरू कर दिया है। इसे लेकर देश के अलग-अलग जगहों को चिह्नित कर इसमें काम शुरू किया जाएगा। राजस्थान में तीन जिलों उदयपुर, जैसलमेर और जयपुर जिलों के कुछ क्षेत्रों को इसमें मॉडल कार्य के लिए चुना गया है।

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ये रहेंगे क्षेत्र - उदयपुर जिला: गिर्वा क्षेत्र के २४ गांवों के ११५ ब्लॉक को इसमें शामिल किया गया है। - जैसलमेर जिला: २० गांव ९८ ब्लॉक - जयपुर जिला: निगम क्षेत्र में पुराने परिसीमन के आधार पर वार्ड ३५ के ७० ब्लॉक

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खास बिन्दु: - किसानांे की दशा-: खासकर ग्रामीण इकॉनमी और किसानों की दशा के बारे में कहा गया है कि इनकी असली दशा को समझने के लिए इस बार कई नए मानक जोड़े जाएंगे। कई मोर्चे पर जनगणना या नेशनल सैंपल सर्वे से मिले आंकड़ों से सही तस्वीर सामने नहीं आ पाती है, इसे देखते हुए यह परिवर्तन किया जा रहा है। - जातियों की गणना नहीं होगी-: इस बार बताया जा रहा है कि गणना में सभी जातियों को शामिल नहीं किया जाएगा। 2011 की जनगणना में भी इसका प्रावधान नहीं था, लेकिन बाद में राजनीतिक विरोध के कारण इसे जोड़ा गया। - ओबीसी को तवज्जो- साल 2021 की जनगणना में आजाद भारत में पहली बार अन्य पिछड़े वर्गों, ओबीसी से संबंधित आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे। यह कदम 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।- जनगणना अधिनियम 1948 की अधिनियम संख्या 37 की धारा तीन के तहत प्रदत्त शक्तियों के मुताबिक केंद्र सरकार जनगणना करवाएगी। - भारत की पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी और तब देश की जनसंख्या 121 करोड़ थी।

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एेसे होगा एप का इस्तेमाल:

- रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया आरजीआई की ओर से करवाई जा रही है 2021 की जनगणना का डेटा एक मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र होगा। डेटा संग्रह के लिए प्रगणकों को अपने स्वयं के मोबाइल फ ोन का उपयोग करना होगा। जिसके लिए उन्हें उचित पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा। पेपर शेड्यूल के माध्यम से डेटा एकत्र करने और रिकॉर्ड करने का विकल्प भी होगा, लेकिन यह अनिवार्य नहीं होगा। आधुनिक वैज्ञानिक स्वरूप में देश की पहली जनगणना वर्ष १८६५ से १८७२ के बीच हुई थी। यह ब्रिटिश शासन ने करवाई थी। इसके बाद वर्ष १८८१ से अब तक लगातार हर दस वर्ष में जनगणना होती रही है।

- डेटा संग्रह के लिए तैंतीस लाख प्रगणकों को जुटाया जाएगा, जिसके लिए अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के बर्फ ीले क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2020 तय की गई है, जबकि शेष देश के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2021 है।

- खुद ऑनलाइन भर सकेंगे घर.परिवार का ब्योरा: यह जनगणना इस बार हाईटेक होगी। कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपने मकान और परिवार का ब्योरा ऑनलाइन भर सकेगा। यह जनगणना महानिदेशालय द्वारा तैयार वेब पोर्टल के जरिये भरा जाएगा। जनगणना में इस बार आपको अपना मोबाइल नंबर भी दर्ज कराना होगा।

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ये है प्री टेस्ट: इस साल 12 अगस्त से 30 सितंबर तक देश भर में जनगणना 2021 का प्री-टेस्ट आयोजित किया जाएगा। जनगणना 2021 का हो रहा पूर्व परीक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पहली बार क्षेत्र में डेटा संग्रह के डिजिटल मोड का परीक्षण किया जाएगा। डेटा संग्रह का डिजिटल मोड यदि जनगणना 2021 में अपनाया जाता है तो नीति निर्माण और अनुसंधान में मदद करने वाले जनगणना डेटा का तेजी से प्रकाशन होगा। यहां १२ अगस्त से जो प्री टेस्ट शुरू होना था, वह हो नहीं पाया है।

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इस बार २०२१ में देश की जनगणना मोबाइल एप के माध्यम से होगी। इसका प्री टेस्ट प्रदेश में तीन जिलों के चयनित क्षेत्रों से हो रहा है। पेपरलेस जनगणना की यह शुरुआत है, हालंाकि कागज के उपयोग का जरूरत पर विकल्प मिलेगा, लेकिन बाध्यता नहीं है। अपने जिले में गिर्वा को प्री टेस्ट के लिए चुना गया है। पुनीत शर्मा, मुख्य आयोजना अधिकारी उदयपुर