स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

हर तीसरे दिन बदल जाते हैं 'गुरुजी'

pankaj vaishnav

Publish: Sep 21, 2019 02:44 AM | Updated: Sep 21, 2019 02:44 AM

Udaipur

बच्चों की पढ़ाई चौपट, भीण्डर के दो स्कूलों में सामने आई स्थिति, प्रतिनियुक्ति नियम बनाए रखने के तोड़ में निकाली गली

भीमराज मेनारिया/भींडर . उदयपुर जिले के कई क्षेत्रों में शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने का अजीब खेल चला रहा है। हर तीन दिन बाद स्कूलों में शिक्षक बदल जाते हैं। बच्चों को पता ही नहीं होता कि तीन दिन बाद कौन सा शिक्षक पढ़ाने आएगा। दरअसल प्रतिनियुक्ति नियमों के दायरे में रहते हुए शिक्षकों को स्कूलों में भेजा जा रहा है। नियम भी नहीं टूटे और अंधेरगर्दी भी हो गई।

शिक्षा विभाग ने प्रतिनियुक्ति का कायदा बनाए रखते हुए शिक्षकों की कमी का तोड़ निकालने की तकनीक अपनाई है। उदाहरण भींडर क्षेत्र के दो स्कूल हैं। बडग़ांव राजकीय उत्कृष्ट बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय और दूसरा केदारिया ग्राम पंचायत के मोगजी खेड़ा का स्कूल। एक में 95 छात्राएं तो दूसरे में 50 बच्चे अध्ययनरत हैं। बात इन दो स्कूलों की ही नहीं उदयपुर जिले में कई ऐसे उदाहरण मिलेंगे। प्रतिनियुक्ति के कायदे और शिक्षकों की हाजिरी की औपचारिकता को बनाए रखने के लिए यह तरीका जिले के हर चौथे-पांचवें सरकारी स्कूल में देखने को मिलेगा।
डेढ़ साल से बने हालात
बडग़ांव राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के अधीनस्थ राजकीय बालिका उत्कृष्ठ उच्च प्राथमिक विद्यालय बडग़ांव, राजकीय प्राथमिक विद्यालय विजयमगरी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय भीलबस्ती में डेढ़ वर्ष से हर तीन दिन बाद शिक्षक बदल जाते हैं। हर तीन दिन बाद एसएमसी शिक्षक भेजे जाते हैं।

वजह: नियमों की पैचीदगी

स्कूलों में विभागीय अव्यवस्था चरम पर है। शिक्षकों को बदलने के पीछे विभाग का तर्क है कि तीन दिन से ज्यादा किसी एसएमसी शिक्षक को प्रतिनियुक्ति पर नहीं रखा जा सकता। लिहाजा हर तीसरे दिन गुरुजी बदल जाते हैं।
'क्या होमवर्क दे गए गुरुजी'
बडग़ांव के स्कूलों में हर तीन दिन बाद नए शिक्षक स्कूल पहुंचकर बच्चों से पूछते हैं कि 'पहले वाले गुरुजी क्या होमवर्क देकर गए।' बच्चे पिछले गुरुजी का दिया होमवर्क और पाठ की जानकारी देते हैं, तब नए गुरुजी कुछ पढ़ा पाते हैं। स्थाई नियुक्ति नहीं होने से बेहतर परिणाम की चिंता नहीं होती। ऐसे में महज तीन दिन के लिए ही कार्यरत होना मानकर ज्यादातर शिक्षक बिना पढ़ाए ही दिन गुजार देते हैं।

दुर्गम क्षेत्रों में परेशानी अधिक

दुर्गम क्षेत्रों में नौकरी करने से शिक्षक कतराते हैं। ऐसे में दुर्गम स्कूलों में शिक्षकों की कमी रहती है। कोई अध्यापक ऐसे स्कूलों में जाने को राजी नहीं होते। रसूकदार शिक्षक प्रभावों के इस्तेमाल से सड़क के नजदीकी स्कूलों में पहुंचते हैं।
आंदोलन की चेतावनी
पूर्व पंचायत समिति सदस्य सुरेश कुमार खटीक, बडग़ांव स्कूल के एसएमसी प्रधान विष्णु कुमावत, हुक्मीचंद कुमावत, ऊंकार कुमावत, हजारी लाल गाडरी, प्रकाश कुमावत, माधवपुरी गोस्वामी, भगवानपुरी गोस्वामी, राजकुमार ने कहा कि स्कूल में डेढ़ साल से एसएमसी अध्यापक को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है। जुलाई में शिक्षक नियुक्ति के 10 दिन बाद दूसरे स्कूल प्रतिनियुक्त कर दिया। जबकि यहां पहले ही शिक्षकों की कमी है। विजय मगरी स्कूल तो प्रतिनियुक्त शिक्षकों के भरोसे ही संचालित है। तीन दिन में यहां स्थाई नियुक्त शिक्षक नहीं भेजा गया तो तालाबंदी की जाएगी।

इनका कहना

शिक्षकों की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। बडग़ांव से भेजे गए शिक्षक को सूचना दे दी गई है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
भैरुलाल सालवी, एबीइओ (प्रारंभिक शिक्षा), भींडर

किसी विद्यालय में विषय अध्यापक नहीं होने से अन्य स्कूल में भेजा गया है। राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय बडग़ांव की शिक्षका को उर्दू विषय के लिए सूरजपोल भींडर में भेज रखा है। कन्या प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक की जरुरत पड़ी तो शिक्षक की व्यवस्था की जाएगी।

महेंद्र बड़ाला, बीइओ, भींडर