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घटिया निर्माण कार्य में उलझा विद्यालय भवन, कार्य रुकवाया

Surendra Singh Rao

Publish: Jul 21, 2019 00:26 AM | Updated: Jul 21, 2019 00:26 AM

Udaipur

जेईएन को मौके पर बुलाया, सुनाई खरी-खरी
पेड़ की छाव तले पढने को मजबूर छात्र, ग्रामीण बोले- नहीं चाहिए ऐसा भवन, जिसमें सुरक्षित नहीं हमारी संतानें नौ माह बाद भी नहीं बन पाया भवन

 

उदयपुर. कानोड़. ग्राम पंचायत आकोला के नोडल केन्द्र बरगटों का खेड़ा प्राथमिक विद्यालय को क्रमोन्नति के आठ वर्ष बाद भी भवन नसीब नहीं हो पाया है। वर्ष २०१८ में सरकार ने भवन निर्माण की स्वीकृति जारी की। इसके बाद भवन का कार्य भी शुरू हो गया, लेकिन विभागीय अधिकारियों के साथ ही ठेकेदार की लापरवाही से इस वर्ष भी छात्र खुले में पेड़ की छांव में पढऩे को मजबूर है। ग्रामीण लंबे समय से घटिया निर्माण की शिकायत कर रहे थे। इस बीच शनिवार को जेईएन ने मौके पर पहुंच कर कार्य रुकवा दिया। कार्य शुरू होने के करीब नौ माह बाद भी भवन पूर्ण नहीं होना अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है । भवन निर्माण की मांग को लेकर पत्रिका ने मुहिम चलाकर सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कर सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था। इसके बाद भवन की स्वीकृति तो जारी हो गई लेकिन, जिम्मेदार अधिकारियों की देख-रेख के अभाव में घटिया निर्माण कार्य जारी रहा। इस बीच इस भवन का अगला हिस्सा गिर गया। जिसका दस दिनों से पुन: निर्माण जारी है। इधर, ग्रामीणों ने फिर घटिया निर्माण का आरोप लगाते हुए विभाग के जेईएन संदीप कुमार को मौके पर बुलाकर खरीखरी सुनाते हुए काम जांचने को कहा तो अधिकारी ने कार्य को घटिया मानते हुए काम रुकवा दिया। दूसरी ओर इस सत्र में विद्यालय के ३३ छात्र पेड़ की छांव तले पढ़ाई करने को मजबूर है। जहां कई बार उनकी पाठ्य पुस्तकें पशु खा जाते हैं तो बारिश आने पर छात्रों को घर भेजने की मजबूरी है।
हालात पर एक नजर

वर्ष २०१९ में ३३ छात्रों के नामांकन वाला यह विद्यालय २०१२ में क्रमोन्नत हुआ। ग्रामीणों को आस बंधी कि जल्द भवन बन जाएगा। विभाग ने जमीन मांगी तो ग्रामीणों ने सहमति बनाकर देवरे के पास पड़ी जमीन भी उपलब्ध करवा दी, लेकिन बजट नहीं मिला। इसके बाद वर्ष २०१४ तक यह विद्यालय बरगद के पेड़ के नीचे चला। २०१५ के सत्र में गांव के लक्षमण मीणा ने कच्चा छप्पर मुहैया करवाया, लेकिन परिवार के भी पास में रहने व खाना बनाने से धुएं से परेशानी होने लगी। परेशान छात्र जैसे-तैसे पढ़ाई करने लगे लेकिन मकान मालिक को जगह कम पडऩे से फिर विद्यालय सड़क पर आ गया। कुछ समय देवरे में चलने के बाद गांव के शांति लाल मीणा का कच्चा मकान मिला। उसमें सत्र पूरा किया गया। वर्ष २०१६-१७ में लालुराम मीणा ने पक्के मकान का एक कमरा मुहैया करवाया, लेकिन उस समय ४२ छात्रों की पांच कक्षाओं को एक कमरे में पढ़ाना शिक्षकों के लिए मुश्किलभरा था और छात्र कमरे के बाद बकरों के साथ पढ़ाई करने को विवश हुए। २०१८ में स्वीकृति के बाद भवन का कार्य शुरू हो गया। उम्मीद थी कि २०१९ में भवन नसीब होगा लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते वही ढाक के तीन पात जैसी स्थिति बनी है । ग्रामीण देवीलाल रावत, नवलराम, लक्ष्मण, शांतिलाल, ऊंकार लाल, भगवतीलाल, हीरालाल, गोविंद सहित ग्रामीणों ने विभाग से घटिया निर्माण कार्य की शिकायत करते हुए कार्य को सुधारते हुए जल्द कार्य को निपटाने की मांग की है ।
उच्चाधिकारियों से बात करेंगे

लंबी मांग के बाद विद्यालय भवन का कार्य शुरू हुआ लेकिन विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते घटिया निर्माण कार्य की शिकायतें मिल रही है। मौका देख उच्चाधिकारियों से चर्चा की जाएगी। नौ माह बाद भी भवन नहीं बनने से छात्र पेड़ की छाव में पढ़ रहे हैं। यह चिंता जनक है।
दिनेश चौधरी, सरपंच, ग्राम पंचायत आकोला

ठेकेदार को जारी किया नोटिस
ग्रामीणों की ओर से घटिया निर्माण कार्य की शिकायत के बाद मैंने मौके पर जाकर भवन को देखा है। घटिया निर्माण कार्य देखकर निर्माण कार्य को रुकवाते हुए संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया है।

संदीप कुमार, जेईएन, सर्वशिक्षा विभाग