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मूक पशु-पक्ष‍ियों की सेवा में जुटे हैं एक दशक से, बेजुबान भी बदले में देते हैं इन्‍हें प्‍यार, इनके जज्‍बे को सलाम..

Madhulika Singh

Publish: Sep 20, 2019 14:40 PM | Updated: Sep 20, 2019 14:40 PM

Udaipur

एक दशक से दिन रात की चिंता किए बिना गौसेवा के साथ साथ बेजुबान पक्षियों तोता, कबूतर, चिड़िया आदि के उपचार ओर सेवा के कार्योंं में लगे रहते हैंं गजेंद्र सोलंकी

द‍िलीप कोठारी/धरियावद . वो बेजुबानों के लिए मसीहा है सड़क या अन्य दुघर्टना में घायल बीमार बेजुबानों की सेवा के लिए सदैव तत्‍पर रहते हैं धरियावद निवासी गौसेवक गजेंद्र सोलंकी। सोलंकी विगत एक दशक से दिन रात की चिंता किए बिना गौसेवा के साथ साथ बेजुबान पक्षियों तोता, कबूतर, चिड़िया आदि के उपचार ओर सेवा के कार्योंं में लगे रहते हैंं। बदले में ये बेजुबान गजेंद्र की एक आवाज सुनकर दौड़कर उनके पास पहुंंच जाते हैं। जिन जानवरों सांड या बैैल के पास आम आदमी जाने से घबराते हैं , वो जानवर गजेंद्र के सिर और चेहरे पर दुलार करते दिखाई देते हैंं। साल में 150 से 200 बीमार घायल गायों का उपचार करने के साथ साथ तारों या रस्सियों में फंसे कई तोता, कबूतर को बचाने का कार्य कर चुके हैंं। सेवा का ऐसा जुनून की अपनी दुकान व्यापार की चिन्ता किये बिना दुकान बन्द कर सेवा के लिये निकल जाते। कस्बे के पुराना बस स्टैंड के पास शृृंगार की छोटी सी दुकान चलाने वाले गजेंद्र सोलंकी की दिनचर्या की शुरूआत इन्‍हीं बेजुबानों के साथ होती है। परिवार के अन्य सदस्य भी उनके सेवा कार्योंं में सहयोग करते हैंं, घर के आसपास गायों के लिये चारा हरी सब्जी डालने के साथ ही प्रतिदिन सुबह 8 से 9 के बीच नगर में अपनी बाइक के साथ भ्रमण को निकलते गजेंद्र इस दौरान जहां भी बीच सड़क या चौराहा गली मोहल्ले में इनको कोई बीमार बेसहारा गाय दिखती वहां पहुचकर उनकी देखरेख और मरहम पट्टी के साथ उपचार में लग जाते हैं । जब तक वो बेजुबान सही नहींं हो जाता तब तक उसकी मरहम पट्टी और खाना पीना का पूरा ध्यान गजेंद्र स्वयंं रखते हैंं, इसके लिए एक पशु उपचार किट हमेशा उनके साथ रहता है।

पशुचिकित्सालय में स्वयंं के जेब से देते राशि‍

नगर सहित आसपास की जगहों पर सड़क के बीच या अन्य जगह पर घायल बीमार गायों का अपने स्तर पर उपचार के बाद गोसेवक गजेंद्र अपने अन्य साथियों की मदद से हाथठेला गाड़ी में डालकर बेजुबान को पशु चिकित्सालय लेकर जाते जहां चिकित्सकों की फीस तक यह चुकाते हैंं। बेजुबान को

मिले स्थाई निवास खुले गौशाला-

एक दशक से गौसेवा में लगे गजेंद्र की पीड़ा है कि सड़क और गली मोहल्ले में घूमती ओर हादसों का शिकार होने वाली गायों के लिए स्थाई समाधान पंचायत या प्रशासन की ओर से नही किया। गजेंद्र चाहते है कि क्षेत्र में गायों के लिए एक गौशाला खोली जाए।

सन्त के प्रवचनों ने बदली जिंदगी-

गौसेवा के कार्य मे लगे गजेंद्र बताते है कि कुछ वर्षों पूर्व धरियावद में एक गौ सन्त के प्रवचन हुए थे तब एक दिन गजेंद्र भी प्रवचन सुनने चले गए सन्त के प्रवचनों का इतना प्रभाव पड़ा कि तब से वो गौ सेवा में जुटे हुए हैंं।