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जेल है या ऐशगाह: सजा की बजाय गुनहगारों को मिलता ‘मद-मोबाइल का मजा’

bhuvanesh pandya

Publish: Sep 14, 2019 11:03 AM | Updated: Sep 14, 2019 13:17 PM

Udaipur

- पिछले छह माह में १५ से अधिक जेलों में निरीक्षण में मिले मोबाइल-सिम सहित अन्य सुविधाएं

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर . प्रदेश की जेल कैदियों के लिए किसी एेशगाह से कम नहीं है। कैदी मनमर्जी से जो चाहें वह मंगवा सकते हैं। भले ही बैरकों में सख्ती बरतने के कसीदे पढ़े जाए, लेकिन जेलों में प्रहरियों से लेकर जेल अधिकारी किस तरह अपराध में आकंठ डूबे हैं, जिसकी पोल पिछले छह माह में हुए निरीक्षणों में खुलकर सामने आ गई है। जेलों में बंद अपराधी को उगाही की एवज में नशा लुटाया जाता है, वहीं मुंहमांगी सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है।

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जेलों में पनपते भ्रष्टाचार की कहानियां
केन्द्रीय कारागृह जोधपुर

१ जनवरी १९ से छह जून १९ तक उच्चाधिकारियों की तलाशी में महिला बंदी मनचली बाई के पास मोबाइल मिला। बबलूसिंह व भवानीसिंह के पास मोबाइल व सिम मिला। राकेश के पास मोबाइल व सिम, राकेश से सिम एवं राजू से मोबाइल बैट्री मिली।
जिला कारागृह जालोर

२९ अप्रेल को लावारिस मोबाइल व सिम मिला, वहीं मोबाइल नम्बर लिखा हुआ बनियान मिला।
जिला कारागृह सिरोही

५ जून १९ को लावारिस सिम व बंदी दिनेश के पास एक मोबाइल व सिम मिला।
केन्द्रीय कारागृह बीकानेर

१९ जनवरी १९ बंदी राजू से एक मोबाइल व एक सिम मिला। १४ फरवरी १९ को बंदी दिलीप से १ मोबाइल दो सिम मिले। ७ मार्च १९ से बंदी छोटूराम से १ सिम व मोबाइल मिला। एक सिम व मोबाइल लावारिस हालत में मिले।
केन्द्रीय कारागृह श्रीगंगानगर

२३ जनवरी १९ से लेकर २४ अप्रेल तक हुए निरीक्षण में लावारिस हालत में दो मोबाइल बरामद, बंदी सुनील से मोबाइल व सिम, बलकरण, मनीष व अक्षय से एक-एक मोबाइल के अलावा चार्जर, पावर बैंक व लीड मिले। सुरेश से मोबाइल व सिम मिले।
उप कारागृह राजगढ़

२२ मार्च से तीन अप्रेल तक लावारिस दो मोबाइल व एक सिम, विनोद से अमल व लुग्दीनुमा सुल्फा मिला। साथ ही बंदी अजय से एक मोबाइल व एक सिम मिला।
जिला कारागृह हनुमानगढ़

१४ मार्च से ३ जून तक राहुल से तथा बंदी राजाबली के पास एक-एक मोबाइल व सिम मिले।
उप कारागृह नोहर

१८ जनवरी को मुख्यालय की टीम ने बंदियों से ११ मोबाइल व सात सिम बरामद किए।
केन्द्रीय कारागृह भरतपुर

९ जनवरी से ३० अप्रेल तक निरीक्षण में रामौतार से एक मोबाइल व एक सिम, ११ मोबाइल व एक सिम लावारिस, आकाश से एक मोबाइल व एक सिम, रामदत्त से एक सिम व मोबाइल मिले।
उच्च सुरक्षा कारागृह अजमेर

१८ फरवरी से ५ मई तक लावारिस हालत में एक मोबाइल व एक सिम, मांगीलाल से मोबाइल व सिम, महिपाल व देवेन्द्र पाल के पास दो मोबाइल दो सिम सहित एक चार्जर व इयर फोन, सुरेश से एक मोबाइल एक सिम, दिनेश से दो माबाइल एक सिम, १ इयरफोन व एक चार्जर मिले।
उप कारागृह परबतरसर

२५ मई को एक सिम मिला
केन्द्रीय कारागृह जयपुर

२१ जनवरी से २३ मई १९ तक हुए निरीक्षण में मनीष से एक मोबाइल, लावारिस हालत में जमीन के अंदर से तीन माबाइल व दो सिम, कृष्णकुमार से एक-एक मोबाइल व सिम मिले।
केन्द्रीय कारागृह अलवर

२२ मार्च १९ से ९ मई तक चरणसिंह, अमित, हाकम, जगमोहन सोनी, प्रवीण, जितेन्द्र व लावारिस मिलाकर ८ मोबाइल व चार सिम मिले। नशे के लिए लाए गए ३० पैकेट कुबेर तम्बाकू व ५ बीडी के बंडल मिले।
जिला कारागृह झुंझुनूं

७ अप्रेल १९ से लेकर २९ मई तक रमेश, सुशील के पास एवं लावारिस सहित १६ मोबाइल व ५ सिम मिले। यहां एक चार्जर, एक डाटा केबल, दो बैट्री मिले
जिला कारागृह बांसवाड़ा

जिला एवं सेशल न्यायाधीश ने निरीक्षण में बांसवाड़ा जिला कारागृह में एक मोबाइल मिला, तम्बाकू के पाउच व एक बेल्ट पाए।
उदयपुर जेल के हाल

गत दिनों उदयपुर में हुए निरीक्षण में कई १३ मोबाइल, चार्जर सहित नशे की कई वस्तुएं मिली।
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आनंदपाल के भाई के पास जेल में मिला था एंड्रॉयड मोबाइल
गत नौ अगस्त को उदयपुर केन्द्रीय कारागृह में कैदियों से 14 मोबाइल बरामद किए गए। इनमें हाई सिक्यूरिटी वार्ड में बंद कुख्यात अपराधी रहे आनंदपाल के भाई रूपेन्द्रपाल से एंड्रॉयड मोबाइल मिला था। सर्वाधिक छह मोबाइल मैस में आटा व शक्कर के कट्टों में रखे थे। अन्य मोबाइल बैग, बिस्तर के अलावा कैदियों ने दीवारों व फर्श पर गड्ढे खोद इन्हें छिपा रखे थे। पुलिस ने चार्जर, ईयर फोन भी बरामद किए थे।

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अन्दर सब आता है बस जेब भरी हो

जेल सुरक्षा में लगे एक होमगार्ड जवान ने बताया कि बाहर से हर चीज अन्दर उपलब्ध हो जाती है। सुरक्षा में लगे स्थानीय कार्मिक सब कुछ उपलब्ध करवाते हैं। यदि बीड़ी या सिगरेट जैसा कोई भी नशा हो तो उनकी कीमत कई गुना हो जाती है, तो मोबाइल या सिम के लिए तो खूब पैसे लगते हैं। मामला हजारों में जाता है।

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ये कमियां इसलिए रह जाती हैं क्योंकि एक जेल की सुरक्षा में अलग-अलग प्रकार की एजेंसियां काम करती हैं। एेसे में उन्हें एक साथ निर्देशित क्रम में चलाना मुश्किल है। साथ ही अनुभवहीन व्यक्ति को सुरक्षा में लगने पर उसे रिफ्रेशर कोर्स नहीं मिलने से यह परेशानी होती है। यदि जो गलती कर रहा है कि वह यह समझ जाए कि उसके एक कदम से कितना और क्या-क्या नुकसान हो सकता है तो वह एेसा कभी नहीं करेगा।

सुरेन्द्रसिंह शेखावत, जेल अधीक्षक उदयपुर केन्द्रीय कारागार