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ये कैसा अस्पताल नर्सिंग स्टाफ करता है इलाज

Surendra Singh Rao

Publish: Sep 15, 2019 02:22 AM | Updated: Sep 15, 2019 02:22 AM

Udaipur

(Doctor is not there for a year)

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सुलई के हाल
एक वर्ष से नहीं है चिकित्सक
एक कमरे में हो रहा संचालित
10 किलोमीटर दूर से आते हैं मरीज

उदयपुर. भाणदा. खेरवाड़ा उपखण्ड की ग्राम पंचायत सुलई स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक वर्ष से चिकित्सक नहीं होने से अस्पताल नर्सिंगस्टाफ के भरोसे हंै। आदिवासी बहुल क्षेत्र के ग्रामीणों को रोजाना नर्सिंग स्टाफ से दवाई लेकर लौटना पड ऱहा है। नर्सिंग ग्रेड द्वितीय गणेश कलाल के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 2017 में कुल 12500, 2018 में 9400 व 2019 में जनवरी माह से अगस्त तक कुल 4900 रोगियों का इलाज हो चुका है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना वर्ष 2015 में होने से भवन निर्माणाधीन है और वर्तमान में पूर्व स्थापित उपस्वास्थ्य केन्द्र के एक कमरे में अस्पताल संचालित किया जा रहा है। जिससे रोगियों की भीड़ रहने से इलाज में दिक्कत हो रही है। वर्तमान में चिकित्सक के नहीं होने पर भी रोजाना लगभग 50 से 60 ओपीडी रहती है। उक्त पीएससी में कुल पांच उपस्वास्थ्य केन्द्र सारोली, बरौठी ब्रा., देवनाल, उपला थूरिया, सामरून है। पांचों उपस्वास्थ्य केन्द्र का कार्य भी स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर होता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर एक एएनएम की पोस्ट भी खाली होने से सारोली में कार्यरत एएनएम को यहां लगाया गया है। साथ ही लेब टेक्निशयन, लेब असिस्टेन्ट, डेटा एन्ट्री, ऑपरेटर, हेल्थ सुपरवाइजर संविदाकर्मी के रूप में कार्यररत है।
नहीं है सुविधाघर की व्यवस्था
अस्पताल में सुविधाघर की व्यवस्था नहीं होने से रोगियों व कर्मचारियों को परेशानी होती है।
104 व 108 भी नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 104 या 108 की व्यवस्था भी नहीं होने से ऑनकॉल 104 व 108 उपलब्ध होती है, जिससे रोगियों को वाहन आने तक इन्तजार करना पड़ता है। कभी-कभार यदि रोगी की हालत ज्यादा ही खराब हो तब रेफर करने के लिये पहले 104 या 108 पर कॉल करके बुलाना पड़ता है। जिस पर आधे घंटे पहले वाहन की सुविधा नहीं मिल पाती है।
चिकित्सक का अभाव
चिकित्सक के अभाव में रोगियों को परेशानी हो रही है। फिर भी उपलब्ध कर्मचारियों से उपचार किया जा रहा है। भवन का अभाव है, मगर अभी भवन निर्माणाधीन है।
गणेश कलाल, नर्स ग्रेड द्वितीय
मै पीएचसी सुलई में कार्यरतत था। ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी का पदभार सौंपे जाने से कार्य का बोझ ज्यादा रहता है, जिससे सुलई जाना नहीं हो पा रहा है। व्यवस्था के रूप में बावलवाड़ा पीएचसी से चिकित्सक को लगाया गया था। मगर वहां भी एक अन्य चिकित्सक का पीजी में चयन हो जाने से चिकित्सक को पुन: भेजना पड़ा।
अरुण मीणा
ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी,खेरवाड़ा
कहता है प्रशासन
वर्तमान में सभी जगह चिकित्सकों का अभाव है। प्रदेश में चिकित्सकों की निुयक्ति की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। जैसे ही चिकित्सक उपलब्ध होंगे प्राथमिकता के आधार पर सुलई में नियुक्त कर दिया जाएगा।
दिनेश खराड़ी, सीएमएचओ, उदयपुर