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युवा जिंदगी की उम्मीदों पर सरकारी 'अंधेरगर्दी का साया

Sushil Kumar Singh Chauhan

Publish: Dec 06, 2019 06:00 AM | Updated: Dec 05, 2019 23:35 PM

Udaipur

higer education 7 साल में भी इस महाविद्यालय को नसीब नहीं हुए 7 व्याख्याता, रिक्त व्याख्याता पदों के बीच अंधकार में युवा पीढ़ी का भविष्य

उदयपुर/ धरियावद. Higer Education जनजाति बाहुल्य इलाकों में शिक्षा के उजियारे से गरीब युवा पीढ़ी का भविष्य सुधारने का दम भरने वाली प्रदेश की सरकार की हकीकत वादों से विपरीत है। सरकारी उपेक्षा का एक उदाहरण धरियावद में संचालित राजकीय महाविद्यालय है। कहने को इस महाविद्यालय का शुभारंभ हुए 7 साल हो गए, लेकिन कड़वा सच यह है कि बीते सालों के दौरान सरकार यहां शैक्षणिक गतिविधियों को यथावत बनाए रखने के लिए 7 व्याख्याता नहीं उपलब्ध करा पाई। स्थिति इतनी विषम है कि मात्र 3 व्याख्याताओं के भरोसे महाविद्यालय संचालित हो रहा है। इसमें भी एक व्याख्याता के पास कार्यवाहक प्राचार्य का दारोमदार है। बता दें कि महाविद्यालय में वर्तमान में 365 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए यहां विषय व्याख्याताओं की कमी के चलते भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गरीब परिवार के इन युवाओं को शैक्षणिक कार्य यथावत रखने के लिए कोचिंग सेंटर का सहारा लेना पड़ रहा है। या फिर विषय अध्यापक की तलाश कर ट्यूशन कर भविष्य बचाने की होड़ करनी पड़ रही है। अव्यवस्थाओं के बीच कई प्रतिभाओं का भविष्य भी दांव पर लगा हुआ है। शिकायत, आंदोलन सहित कई तरह के हुए प्रदर्शन के बावजूद किसी स्तर पर इन विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर कोई सुध नहीं ली जा रही है।

कहते हैं हालात
हकीकत पर गौर करें तो रिक्त पदों के बीच शैक्षिक गतिविधियां ही नहीं वरन अशैक्षिक कार्य भी बाधित हैं। यहां मंत्रालयिक कार्मिकों के अलावा चतुर्थ श्रेणी पद भी रिक्त हैं। पूर्व में राजकीय महाविद्यालय का संचालन राउमावि परिसर में हो रहा था, जबकि जुलाई 2019 से उक्त महाविद्यालय को नई बिल्डिंग मिल गई है, लेकिन महाविद्यालय की अधूरी चार दीवारी अब भी बड़ा संकट बना हुआ है। इससे पहले रिक्त पदों को लेकर स्थानीय छात्रसंघ और ग्रामीणों की ओर से कई बार आंदोलन किए जा चुके हैं। प्रशासनिक स्तर पर आश्वासन के अलावा इन विद्यार्थियों को कुछ नसीब नहीं हुआ।

महाविद्यालय का इतिहास
लगातार उठ रही आवाज एवं आंदोलनों के बीच सितम्बर 2013 में यहां धरियावद को राजकीय महाविद्यालय की सौगात मिली थी। उसके बाद करीब 5 साल तक इस महाविद्यालय का संचालन स्थानीय राउमावि परिसर में हुआ। इसके बाद जुलाई 2019 में वजपुरा मार्ग स्थित नए भवन में इस महाविद्यालय का स्थानांतरण हुआ। तब से इसका संचालन वहीं हो रहा है।

कक्षाओं में मवेशी
सरकारी रहमोकरम से महाविद्यालय को नया भवन तो नसीब हो गया, लेकिन चार दीवारी को लेकर अब भी सरकार की मेहरबानी का इंतजार है। खामी ही है कि चार दीवारी के अभाव में आवारा मवेशी कभी कभार कक्षाकक्षों तक में घुस जाते हैं। मैदान में घास की मौजूदगी के बीच स्थानीय चरवाहे भी पशुओं को इस परिसर में चराते दिखते हैं।

रिक्त पदों के हाल
वर्तमान में महाविद्यालय में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के कला संकाय के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके लिए प्रशासनिक स्तर पर सात व्याख्याताओं के पद स्वीकृत हैं, जिसके जवाब में वर्तमान में तीन पदों पर ही व्याख्याता सेवाएं दे रहे हैं। वहीं चार पद वर्षों बाद भी रिक्त ही बता रहे हैं। हिन्दी साहित्य, अंग्रेजी साहित्य, अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र के व्याख्याताओं की कमी के बीच विद्यार्थियों का शैक्षणिक कार्य प्रभावित है। तीन में भी एक व्याख्याता के पास कार्यवाहक प्राचार्य की जिम्मेदारी है, जो कि अधिकांश मौकों पर कालांश लेने की बजाए विभागीय कामकाज, जिला स्तरीय बैठकों जैसे आयोजनों में व्यस्त रहते हैं।

यहां भी बदहाली
गैर शैक्षणिक कार्य की बात करें तो यहां पर अध्यापन कार्यों से अलग कुल 13 पद स्वीकृत हैं, लेकिन दुर्भाग्य ही है कि 12 पद रिक्त चल रहे हैं। रिक्त पदों में वरिष्ठ लिपिक, कनिष्ठ लिपिक, प्रयोगशाला सहायक, डाक वाहक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, आशुलिपिक, सहायक लेखाधिकारी, पुस्तकालय अध्यक्ष के पद लम्बे रिक्त हैं। मजबूरी में व्याख्याताओं को ही गैर शैक्षणिक गतिविधियों को भी संभालना पड़ता है।

समस्याएं जस की तस
महाविद्यालय में व्याख्याताओं के रिक्त पदों को लेकर महाविद्यालय आयुक्त सहित अन्य उच्चाधिकारियों को निरंतर अवगत कराते हैं। चार दीवारी को लेकर भी विभागीय संपर्क यथावत है। higer education समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन हल नहीं निकल रहा है।
सतपाल बसेर, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय धरियावद

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