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वर्दी की आड़ में हेड कांस्टेबल ने खूब मचाई गुंडागर्दी, एक के बाद एक हो रहा काले कारनामों का खुलासा

Madhulika Singh

Publish: Sep 11, 2019 11:46 AM | Updated: Sep 11, 2019 11:49 AM

Udaipur

घूसखोर हेड कांस्टेबल मालीराम जाट के कई मामले अब आ रहे सामने, रिमांड अवधि समाप्त होने पर न्यायालय में पेश किया फ‍िर जेल भेज दिया

उदयपुर . करोड़ों के आसामी निकले घूसखोर हेड कांस्टेबल मालीराम जाट के काले कारनामों के चिट्ठेे लगातार खुल रहे हैं और नित नए प्रताडि़त सामने आ रहे हैं। सोमवार को मिले दो परिवाद में दोनों पक्षों में लेन-देन के प्रकरण में आरोपी द्वारा खाकी की आड़ में धमकियां देना एवं दुर्घटना के एक मामले में समझौता होने के बावजूद कार सवार से 18 हजार रुपए की वसूलना सामने आया है। एसीबी ने इन परिवादों को रिकॉर्ड पर लिया है, वहीं पुलिस भी अपने स्तर पर जांच में जुटी है। इससे पूर्व पेंशन के नाम पर वृद्धा की जमीन हड़पने व एक जमीन सौदे में लिखा-पढ़ी नहीं कराने के मामले में दर्ज हुए परिवाद की जांच में तत्कालीन उपाधीक्षक ने आरोपी हेड कांस्टेबल की स्पष्ट संलिप्तता मानते हुए उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की थी। इधर, एसीबी ने आरोपी हेड कांस्टेबल फुलेरा निवासी मालीराम जाट की रिमांड अवधि समाप्त होने पर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया।

गौरतलब है कि आरोपी मालीराम को एसबी ने तीन दिन पूर्व जीवनसिंह देवड़ा से 11 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा था। आरोपी ने यह रिश्वत राजीनामा के एक प्रकरण में ली थी। एसीबी ने गिरफ्तारी के बाद हेड कांस्टेबल के आवास की तलाशी ली तो उन्हें वहां 30-35 भूखंडों सहित कई बेनामी सम्पत्ति के मूल दस्तावेज मिले हैं। अधिकतर दस्तावेज गरीब, अनपढ़, बेवा व उन आदिवासियों की जमीनों के हैं जिन्हें आरोपी ने पुलिस के डोर-टू-डोर सर्वे अभियान में दौरान पेंशन व सरकारी सुविधाएं दिलाने की आड़ में धोखे से हड़पे। एएसपी सुधीर जोशी के नेतृत्व में सीआई हरीशचन्द्र सिंह मय टीम अभी इन दस्तावेजों की जांच में जुटे हैं।

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लगातार सामने आ रहे हैं हेड कांस्टेबल की प्रताडऩा के मामले

केस-1

भूखंड का सौदा कर लिखा-पढ़ी नहीं करवाई
परिवादी- भुवाणा निवासी हीरालाल पुत्र लेहरूलाल तेली

मामला- आरोपी मालीराम ने परिवादी को हवाला गांव में एक भूखंड का 4.21 लाख रुपए में सौदा कर नकद राशि प्राप्त कर ली। भूखंड की लिखा-पढ़ी की मांग की तो बार-बार टालमटोल करता रहा। उच्चाधिकारियों को शिकायत करने पर धमकियां दी। उपाधीक्षक ने मामले की जांच की तो पाया कि परिवादी ने मालीराम से भूखंड खरीदने के बाद कब्जा प्राप्त किया। एक कमरे का निर्माण का बिजली कनेक्शन लिया। मालीराम को भुगतान करने के बाद उसने रसीद नहीं दी।
नतीजा- मालीराम का यह कृत्य पुलिस विभाग की छवि को ठेस पहुंचाने वाला है। मालीराम पुलिस विभाग में कार्यरत और उसका यह कृत्य सेवा नियमों के विरुद्ध है। सेवा नियमों के तहत उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए।

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केस-2

विधवा पेंशन के नाम पर हड़प ली जमीन
परिवादी- पराया की भागल निवासी तारू पुत्र रूपाजी भील

मामला- आरोपी जाट के विरुद्ध एसपी को परिवाद दिया था कि उसकी सास नवली भील के बैरण पटवार क्षेत्र के कालीवास (राजसमंद) गांव में जमीन है। मैं व पत्नी रामुड़ी सास के साथ रहकर देखभाल करते हैं। सुखेर थाने पर पदस्थापन के दौरान मालीराम ने उसकी साल को विधवा पेंशन दिलाने के नाम पर तहसील कार्यालय ले जाकर उसकी कृषि भूमि का पंजीयन करवा लिया। आरोपी व उसके आदमी जमीन पर कब्जा लेने आए तो पूरा खुलासा हुआ।
नतीजा- तत्कालीन उपाधीक्षक ने जांच के बाद मामला राजसमंद का होने से एसपी राजसमंद को भिजवाने की अनुशंसा की।

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केस-3

दोनों पक्षों की लेनदेन, हेडकांस्टेबल कर रहा था वसूली
परिवादी- रामगिरी बडग़ांव निवासी संतोष पुत्र उदयलाल पटेल

मामला- परिवादी ने एसीबी को शिकायत की कि उसने महेन्द्र सिंह चौहान व किशनसिंह डुलावत से तीन लाख रुपए उधार लिए। वसूली के लिए उन्होंने मालीराम से सम्पर्क किया जिसने ब्याज सहित मूल रकम से कई ज्यादा की मांग करते हुए धमकियां दी। सुखेर थाने में पदस्थापन के दौरान वह घर तक पहुंच गया। महेन्द्र सिंह ने अम्बामाता थाने में परिवाद दिया तो मालीराम अन्य थाने में तैनात होने के बावजूद लगातार धमकाता रहा। इस संबंध में उसने आईजी व एसपी को लिखित रिपोर्ट दी।
नतीजा- उपाधीक्षक गिर्वा मामले की जांच कर रही है वहीं एसीबी ने भी इस परिवाद को लिया रिकॉर्ड पर

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केस-4

दुर्घटना पर ले लिए 18 हजार
परिवादी- सेक्टर-14 निवासी रामकिशोर सिंह पुत्र उमरावसिंह

मामला- गत 13 अगस्त को कार से सुमेरपुर से लौटाते समय गोगुन्दा में एक गाड़ी बाइक से टक्कर हो गई। बाइक सवार से वार्ता के बाद खर्चा देना भी तय हो गया। इस बीच अचानक हेडकांस्टेबल मालीराम वहां पहुंच गया। राजीनामा की बात कहने के बावजूद से दोनों को थाने ले आया। बाइक वाले को उसने भेज दिया। उसके बाद तलाशी ली। बाद में छोडऩे के एवज में 20 हजार की मांग की। बमुश्किल 18 हजार रुपए का भुगतान करने के बाद मालीराम ने उसे छोड़ा।
नतीजा- एसीबी ने शिकायत को लिया रिकॉर्ड पर