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जनसमस्याओं को बोझ समझ रहे सरकारी विभाग, पोर्टल पर लगा अम्बार

bhuvanesh pandya

Publish: Aug 21, 2019 21:35 PM | Updated: Aug 21, 2019 21:35 PM

Udaipur

स्लग....सम्पर्क पोर्टल

7 साढ़े चार हजार जनसमस्याएं पिटारे में बंद
- जिनके निराकरण का दाव, उनमें भी केवल ‘जवाब’

- जन समस्याओं का पोर्टल पर बढ़ता बोझ

 

भुवनेश पण्ड्या
केस 1

कौमी एकता मंच के हसन अली ने बताया कि उन्होंने पोर्टल पर काफी समय से अपनी समस्या लिखवा रखी है, लेकिन कोई निराकरण नहीं कर रहा। मैं अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ रहता हूं। किसी काम से अजमेर जाना अनिवार्य है। मुझे सिलिकोसिस की बीमारी है, मैं प्रशासन से इसमें मदद मांग रहा हूं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

केस 2

शांतिलाल मेहता ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग बिन्दुओं पर 100 से अधिक समस्याओं के बारे में सम्पर्क पोर्टल पर लिखा, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं। नगर निगम ने कुछ समस्याओं को हल तो नहीं किया लेकिन गलत और उल्टे जवाब दिए हैं। फतहसागर की दुर्दशा सहित कई जन समस्याओं को प्रशासन ने अनदेखा कर दिया।

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उदयपुर . जनता विभिन्न समस्याओं से त्रस्त है और अधिकारियों के पास दफ्तर से बाहर निकलने का समय तक नहीं है। आमजन अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखते-रखते थक गए हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। जिले में रिकॉर्ड जनसमस्याएं की लम्बित हैं। दिनों-दिन इसका आंकड़ा बढ़ रहा है।

पत्रिका ने सम्पर्क पोर्टल पर जन समस्याओं के निराकरण की पड़ताल की तो सामने आया कि एवीवीएनएल, सहकारिता, बाल अधिकारिता, प्रारंभिक शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, नगरीय निकाय जैसे कई विभागों में लोगों की समस्याओं के ढेर हैं, लेकिन कोई सुनवाई करने वाला नहीं। लोग महीनों तक दफ्तरों के चक्ककर लगाते हैं, लेकिन उनके प्रति कोई जवाबदेह नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर जन प्रतिनिधि सब कुछ इस स्थिति से वाकिफ है लेकिन जनता की राहत के लिए कदम बढ़ाने में हिचकिचा रहे हैं।

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इसलिए भी खूब समस्याएं आ रही सामने

वर्ष 2017 से पहले मैन्युअल व ऑनलाइन प्रार्थना पत्र के जरिए सम्पर्क पोर्टल पर शिकायतों को भेजा जाता था, लेकिन जब से सीधे फोन के जरिए टेलीफोन नम्बर 181 की शिकायतें दर्ज की जाती है, तब से शिकायतों की संख्या भी काफी बढ़ती जा रही है। जिले में पिछले वर्षों में 160587 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से 156107 शिकायतों को हल बताया गया है। आंकड़ों की मानें तो 4480 समस्याएं लम्बित हैं, जबकि जिन समस्याओं को निस्तारित दर्शाया गया है, उनमें से भी कई समस्याएं हल नहीं हो पाई हैं।

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विभागवार लम्बित समस्याएं
कृषि 29

एवीवीएनएल 568
नगरीय निकाय- 290

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य 64
चिकित्सा शिक्षा- 63

सहकारिता 92
देवस्थान 31

प्रारंभिक शिक्षा 32
आबकारी 14

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग 13
कॉलेज शिक्षा 12

पशु चिकित्सा-11
खाद्य सुरक्षा 136

वन 18
उच्च शिक्षा 20

सूचना एवं संचार 24
श्रम 17

कानून- 39
मनरेगा 57

खनन 110
नगर निगम उदयपुर- 201

पंचायतीराज 899
पुलिस- 139

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी- 142
सार्वजनिक निर्माण विभाग- 211

राजस्थान आजीविका मिशन- 16
राजस्थान सेल्फ सलेक्शन बोर्ड- 24

राजस्थान राज्य कॉपरेटिव बैंक- 26
आरएसआरडीसी- 34

राजस्व - 340
ग्रामीण विकास- 114

सैकन्डरी एजुकेशन- 59
सामाजिक न्याय एव अधिकारिता- 40

ट्रांसपोर्ट- 16
स्टेट इंश्योंरेंस पीएफ- 13

कोष एवं लेखा- 26
यूआईटी- 164

सिंचाई- 18
महिला एवं बाल विकास- 19