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रामायण के भरत को नजरों के सामने पाकर रो पड़े भक्त

pankaj vaishnav

Publish: Dec 09, 2019 01:40 AM | Updated: Dec 09, 2019 01:40 AM

Udaipur

कथा समापन पर भाव विभोर हुए भक्त

उदयपुर . वैदिक संस्कृति प्रचार संघ की ओर से विद्या निकेतन सभागार में आयोजित आयोजित तीन दिवसीय संगीतमय रामकथा के अंतिम दिन कथावाचक अंजली आर्या ने राम वनवास और भरत को राजतिलक के प्रसंग से परिवार में स्वधर्म पालन और प्रेम का आदर्श दृश्य प्रस्तुत किया। जब भरत ने चरण पादुकाएं सिंहासन पर रख नन्दी ग्राम में कुटिया बनाकर तपस्वी जीवन जीना स्वीकार किया तो श्रद्धा से सभी श्रोताओं की अश्रु धारा बहने लगी। कथावाचक ने बड़े ही मार्मिक रूप से भगवान राम के वनवास और भरत की भाई के प्रति भक्ति का प्रसंग प्रस्तुत किया। एक बारगी लगा मानो भरत भक्तों के सामने खड़े हैं। ऐसे काल्पनिक दृश्यों से भक्तों की आंखें छलक पड़ी।

विभिन्न प्रसंगों में रामायण पर लगे अनेक आक्षेप-प्रक्षेपों की तर्क सम्मत व्याख्या की। कथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वि.स. नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, विशिष्ट अतिथि प्रदेश कांग्रेस महामंत्री, इंटक अध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली, जिला महामंत्री हरीश शर्मा थे। डॉ. भूपेन्द्र शर्मा ने स्वागत किया। सरला गुप्ता ने आभार जताया।

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