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गांवों में हाजरी नापेगा कैमरा, शहर में दिया तले अंधेरा - -

bhuvanesh pandya

Publish: Aug 21, 2019 22:10 PM | Updated: Aug 21, 2019 22:10 PM

Udaipur

गांवों में हॉस्पिटल आते-जाते का वीडियो डालो तब भरेगी हाजिरी

- सीएमएचओ तैयार कर रहे हैं ‘गोताखोरों’ के खिलाफ सिस्टम

- पीएचसी और सीएचसी के लिए अलग-अलग ग्रुप

भुवनेश पण्ड्या

उदयपुर. जिले में चिकित्सा क्षेत्र में उल्टी गंगा बह रही है, गांवों में जहां हाजिरी के लिए चिकित्सा विभाग कड़ाई करने की तैयारी कर रहा है, वहीं शहरी चिकित्सकों पर किसी की नजर नहीं। गांवों में अब बकायदा चिकित्सकों को तब ही उपस्थित माना जाएगा जब वे तय ग्रुप में अपना वीडियो बनाकर आते-जाते वक्त डालेंगे तो दूसरी ओर आरएनटी मेडिकल कॉलेज के वे चिकित्सक को दोनों सैटेलाइट हॉस्पिटलों में व्यवस्थार्थ लगाए गए हैं, उनकी हाजरी बायोमैट्रिक तक नहीं हो रही।

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ये गांवों के लिए आदेश: चिकित्सकों से लेकर स्टाफ ड्यूटी टाइम पर घर आराम फ रमाता है या समय से पूर्व केवल मुंह दिखाई कर घर की राह पकड़ लेता है। ऐसे कार्मिकों को सबक सिखाने के लिए चिकित्सा विभाग नई रणनीति बनाने में जुट गया है। विभाग जल्द ही चिकित्सकों और स्टाफ के लिए सोशल मीडिया के दो अलग.अलग ग्रुप बना रहा है। ग्रुप में प्रत्येक स्टाफ को आते.जाते समय का कुछ सैकंड का वीडियो बनाकर भेजना होगा ताकि यह पता चल जाए कि वह ड्यूटी पर इतनी बजे पहुंचा है और इतनी बजे लौट रहा है।

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शहर में गड़बड: उदयपुर शहर में आरएनटी मेडिकल कॉलेज से दोनो सैटेलाइट चिकित्सालयों में 9 चिकित्सक लगाए गए हैं। इन चिकित्सकों की बायोमैट्रिक हाजरी वहां नहीं हो पाती क्योंकि ये व्यवस्थार्थ है और इन मशीनों में केवल नियमित चिकित्सकों के ही थंब इम्प्रेशन जोड़े गए हैं। ऐसे में केवल रजिस्टर के बूते इनकी हाजरी हो रही है। अम्बामाता स्थित जिला सैटेलाइट हॉस्पिटल में 3 और हिरण मगरी स्थित सैटेलाइट में 6 चिकित्सक व्यवस्थार्थ कार्यरत हैं।

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शिकायतों से लिया सबक: चिकित्सा विभाग के पास ग्रामीण अंचल से कुछ स्वास्थ्य केन्द्र के बंद रहने की लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं। हालांकि विभाग ने ऐसे केन्द्रों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इन शिकायतों को दूर करने का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं होगा। प्रदेश में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है जो डिजिटल प्लेटफiर्म के जरिए सीधी मोनिटरिंग करेगा। जिले में करीब 20 स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैंए जिनकी विभाग को कई बार शिकायतें मिल चुकी है कि स्टाफ का कोई धणी.धोरी नहीं है और चिकित्सक भी ज्यादातर समय नदारद रहते हैं।.

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सीएचसी और पीएचसी का अलग.अलगसामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के ग्रुप अलग. अलग बनाए जाएंगे ताकि सभी की जानकारी मिल सके। ग्रुप में एक कार्मिक ऐसा जोड़ा जाएगा जो पूरे ग्रुप की रिपोर्ट तैयार करेगा। यदि किसी दिन किसी कार्मिक का वीडियो नहीं आता है तो उसे नोटिस जारी किए जाएंगे।

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हम इसकी शुरुआत मॉडल तौर पर कर रहे हैं ताकि आदतन गायब रहने वालों पर प्रभावी कार्रवाई होगी। जो कार्मिक नियमित आते हैंए उन्हें तो वीडियो भेजने में कोई समस्या नहीं होगी। जो नियमित आने.जाने में गड़बड़ कर रहे हैं, उन पर शिकंजा कसा जाएगा।

डॉ दिनेश खराड़ी सीएमएचओ उदयपुर

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यहां मत अलग-अलग जो जहां काम कर रहा है हाजरी भी वहीं होगी, यदि व्यवस्थार्थ है तो भी।

डॉ डीपी सिंह, प्राचार्य आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर

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जो चिकित्सक व्यवस्थार्थ हिरणमगरी सैटेलाइट हॉस्पिटल में काम कर रहे हैं उनके थंब इम्प्रेशन वहां मशीनों में जुड़े नहीं है, ऐसे में उनकी हाजरी कई बार यहां हो जाती है तो कई बार वे चूक जाते हैं, कु छ चिकित्सक सुबह यहां आठ से नौ बजे तक आरएनटी कक्षा के लिए पहुंचते हैं तो उनकी हाजरी हो जाती है।डॉ मधुबाला चौहान, अधीक्षक जनाना हॉस्पिटल उदयपुर

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वो तो वहां बायोमैट्रिक हाजरी देते हैं

.जो व्यवस्थार्थ चिकित्सक यहां कार्य कर रहे हैं उनकी हाजरी बायोमैट्रिक मशीन में आरएनटी में होती है, यहां तो रजिस्टर में एन्ट्री होती है। डॉ राहुल जैन, अधीक्षकअम्बामाता सैटेलाइट हॉस्पिटल

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हमारे यहां तो केवल रजिस्टर में एन्ट्री होती है बायोमैट्रिक में नहीं हमारे यहां तो केवल व्यवस्थार्थ चिकित्सकों की रजिस्टर में ही एन्ट्री हो रही है, बायोमैट्रिक में तो उनके नाम नहीं जोड़े गए हैं।

डॉ. केएल धानक, अधीक्षक हिरण मगरी उदयपुर