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दिल्ली जैसा हादसा यहां हो गया तो क्या होगा?

Vijay Kumar Jain

Publish: Dec 09, 2019 11:59 AM | Updated: Dec 09, 2019 12:08 PM

Tonk

जिला अस्पताल में नाकारा है फायर सेफ्टी सिस्टम
अन्य कार्यालयों के भी हाल-बेहाल
टोंक. सूरत के कोचिंग सेंटर में हुए अग्रिकाण्ड के बाद जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न विभागों के कार्यालयों सहित सेंटरों की जांच की। इन सेंटरों में अवधि पार अग्रिशमन यंत्र मिलने पर भी प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसा लग रहा है जैसे प्रशासन किसी हादसे के इंतजार में है।


टोंक. जिले के सबसे बड़े सआदत अस्पताल में एक वर्ष पूर्व लाखों रुपए का ठेका देकर फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया गया था। इस सिस्टम के लगाए जाने के बाद से अधिकारियों ने सुरक्षा के प्रति आंखें मूंद रखी है। गैस पाइप में भी कई जगह से दरारें आ चुके है। ऐसे में हादसा होने पर स्थिति विकट हो सकती है। हालत यह है कि आग से बचाने वाले सिलेण्डर अवधि पार हो चुके है। विगत में जांच के दौरान अस्पताल के अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। जबकि जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो हजार से अधिक लोगों की आवाजाही होती है।

नहीं बजेगा अलार्म
अस्पताल में लगे आधा दर्जन अग्निशमन यंत्रों को आठ अगस्त २०१८ को रिफिल किए गए थे। तथा इनकी अवधि पार तिथि सिलेण्डर पर १७ अगस्त २०१९ अंकित की गई है। सुरक्षा विशेषज्ञ की माने में तो आग लगने पर इन सिलेण्डरों से निकलने वाली गैस आग बुझाने में नाकाम साबित होगी। वहीं आपातकालीन इकाई में लगाए गए फायर सेफ्टी सिस्टम के कन्ट्रोल पैनल को बिजली से नहीं जोड़े से आग लगने पर अलार्म भी नहीं बजेगा, जिसके चलते लोग सचेत भी नहीं हो पाएंगे।

यहां भी हाल बेहाल
जिला मुख्यालय पर कोचिंग सेंटरों, कपड़े की दुकानों, कटले, मिष्ठान भण्डार, विभिन्न राजकीय एवं गैर राजकीय कार्यालयों, स्कूलों आदि में अग्रिशमन यंत्र नहीं है। वहीं जहां लगे हुए है, वो अवधिपार हो चुके है।

जानकारी में नहीं
गैस पाइप धूप में होने के कारण क्रेक्स आने के बारे में मिस्त्री को बताया है। पूर्व में हुए ठेके की शर्तों के बारे में पता नहीं है। अग्निशमन यंत्रों के अवधिपार होने के बारे में जानकारी नहीं है।
डॉ.नविन्द्र पाठक, प्रमुख चिकित्साधिकारी, सआदत अस्पताल टोंक

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