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तो ये है पीपलू को पंचायत समिति का दर्जा मिलने का कारण, जानने के लिए पढ़े ये खास खबर...

Pawan Kumar Sharma

Publish: Nov 18, 2019 14:07 PM | Updated: Nov 18, 2019 14:07 PM

Tonk

Reorganization of Panchayats: पीपलू के जनप्रतनिधि पिछले लंबे समय से पीपलू को पंचायत समिति बनाने की मांग कर रहे थे। पीपलू में नई पंचायत समिति के सृजन के आदेश के बाद राजनीतिक हलचल तेज हुई है।

पीपलू (रा.क.). जिले में पीपलू को सातवीं पंचायत समिति के रूप में राज्य सरकार की ओर से मिले दर्जे के बाद क्षेत्र में विकास की उम्मीद बंधी है। पंचायत समिति खुलने से विकास के आयाम स्थापित होंगे। वहीं शिक्षा, चिकित्सा, सडक़, बिजली, पानी जैसे विभागों के कार्यालय खुलने से भी लोगों को राहत मिलेगी।

पीपलू के जनप्रतनिधि पिछले लंबे समय से पीपलू को पंचायत समिति बनाने की मांग कर रहे थे। पीपलू में नई पंचायत समिति के सृजन के आदेश के बाद राजनीतिक हलचल तेज हुई है। पंचायत समिति की घोषणा के साथ ही राजनीति उठापटक भी तेज हो गई है।

वर्ष 2014 में भी पंचायतीराज चुनाव के ठीक पहले भाजपा की ओर से पंचायतों का पुनर्गठन किया गया था। अब कांग्रेस की सरकार ने पंचायतीराज चुनाव से कुछ माह पहले नई पंचायत समितियां व पंचायतों का सृजन कर गांव तक की सत्ता को हासिल करने का दावपेंच खेला है।

भाजपा सरकार के समय वर्ष 2014 में पीपलू को पंचायत समिति बनाने को लेकर संघर्ष किया गया। कस्बे में प्रदर्शन, रैलियां सहित ग्रामीण जयपुर तक पहुंचे थे, लेकिन पीपलू को पंचायत समिति का दर्जा नहीं मिल पाया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीपलू में नि:शुल्क जांच की शुरुआत व उससे पूर्व पशु मेले के अवसर पर पीपलू को पंचायत समिति का दर्जा दिलाए जाने की घोषणा की थी।

इधर, विधायक प्रशांत बैरवा ने बताया कि निवाई विधानसभा क्षेत्र में पीपलू को टोंक से अलग कर पंचायत समिति होने के बाद अब दोनों ब्लॉकों मे विकास के आयाम स्थापित होंगे। वहीं ब्लॉक स्तरीय कार्यालय खुलने से आमजन को राहत मिलेगी।


इसलिए जरूरी था पंचायत समिति का खुलना
पीपलू तहसील मुख्यालय 6 6 हजार 159 हैक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। वहीं क्षेत्र में 25 पंचायतों में 126 गांव हैं, जिनकी जनसंख्या सवा लाख से अधिक है। तहसील के तहत 35 पटवार मंडल व 9 गिरदावर मंडल है। पीपलू तहसील की सभी पंचायतें टोंक पंचायत समिति में हैं।

वहीं तहसील, उपखंड, उपकोष कार्यालय के अलावा पानी, बिजली, सडक़, शिक्षा, चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास, न्यायालय से सम्बन्धित तहसील स्तरीय कई कार्यालय टोंक में होने से यहां के ग्रामीणों को टोंक आजाने से समय व धन की अनावश्यक बर्बादी वहन करनी पड़ती है।


अब यह हैं उम्मीदें
पीपलू कस्बे को भले ही राज्य सरकार ने उपखंड़ मुख्यालय का दर्जा दे दिया हो, लेकिन 17 वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर ढाणियों जैसी स्थिति बनी हुई है। यह कस्बा मूलभूत सुविधाओं के अभाव के साथ विकास की दौड़ में भी पिछड़ा हुआ था।

साथ ही अब पीपलू उपखंड मुख्यालय पर सस्ता व सुलभ न्याय मिले के लिए मुंसिफ न्यायालय खुलवाने, उपखंड क्षेत्र के रानोली में बालिका शिक्षा को लेकर पृथक से राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय सृजित करवाने, सामुदायिक चिकित्सालय पीपलू को 30 बेड से 50 बेड में क्रमोन्नत कर आधुनिक चिकित्सा सुविधा दिलाने, कई रिक्त पदों को भरने के साथ सर्जन व महिला चिकित्सक समेत अन्य रोग विशेषज्ञों के नए पद सृजित कर नियुक्ति कराने की आस है।

पीपलू कस्बे की परिवहन समस्या का स्थाई निराकरण कराना, पीपलू के लिए लाइफलान माने जाने वाले माशी बांध किनारे स्थित जोधपुरिया देवधाम के नाम से विख्यात पौराणिक प्राचीन तीर्थ स्थान, पीपलू जौंला के श्री चारभुजा जी, पीपलू के भूतेश्वर उद्यान मंदिर, नानेर के गुरू महाराज स्थित गढ़ गणेश, बगड़ी के प्राचीन किला को पर्यटन क्षेत्र घोषित करवाना, दमकल के प्रबंध करवाना, उपखण्ड की सडक़ों के सुदृढीकऱण के साथ क्षेत्र के सभी गांव, ढ़ाणियों को पंचायत एवं उपखण्ड मुख्यालय को सडक़ों से जुड़वाने, टोंक से मालपुरा व मालपुरा से टोंक चलने वाली सभी रोड़वेज बसों का संचालन वाया पीपलू-काशीपुरा होकर करवाया जाने, कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने एवं किसानों को समृद्ध बनाने के लिए पीपलू में कृषि मंडी सृजित करवाने की उम्मीद हैं।

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