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पर्युषण पर्व: दशलक्षण पर्व पर उत्तम त्याग धर्म की पूजा कर भगवान शांतिनाथ का कलशाभिषेक किया

Vijay Kumar Jain

Publish: Sep 11, 2019 17:35 PM | Updated: Sep 11, 2019 17:35 PM

Tonk

Paryushan parv: दिगम्बर जैन बिचला मंदिर में दशलक्षण पर्व के अवसर पर उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई।

 

निवाई. दिगम्बर जैन बिचला मंदिर में दशलक्षण पर्व के अवसर पर आचार्य विभव सागर के सान्निध्य में मंगलवार को उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। समोशरण में सौधर्म इन्द्र हेमचन्द संघी बह्म इन्द्र पुनीत संघी द्वारा भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा की गई।

इसके बाद नित्य नियम पूजा व दशलक्षण की पूजा कर अर्ध एवं श्रीफल चढ़ाया गया। जैन समाज के प्रवक्ता राकेश संघी व विमल जौला ने बताया कि सौधर्म इन्द्र के साथ सभी इन्द्र- इन्द्राणियों ने नव देवता पूजा में अरिहन्त, सिद्ध, आचार्य,सर्व साधु, जिनधर्म, जिनागम,जिन चैत्य व चैत्यालय की पूजा की।

इस दौरान महाआरती कर प्रश्नमंच व प्रतियोगिता के विजेताओं को राजकुमार कासलीवाल द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। दशलक्षण पर्व के अवसर पर शहर में जैन समाज के पदमचन्द संघी, नवरत्न टौंग्या द्वारा 10 दिनों के उपवास किए जा रहे है।

त्याग सबसे महान तप-आर्यिका
टोडारायसिंह. दिगम्बर जैन समाज की ओर से दशलक्षण पर्व के अंतर्गत आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म मनाया गया। श्रद्धालुओं ने जैन मन्दिर में त्याग धर्म कि पूजा की साथ ही धर्मावलम्बियो की ओर से चार प्रकार के दान (औषधि, शास्त्र, अभय व आहार दान) किए गए। इस दौरान आर्यिका यशस्विनी माताजी के सानिध्य में सुबह अभिषेक, शांतिधारा के पश्चात दशलक्षण मण्डल विधान पूजन किया गया।

प्रवक्ता मुकुल जैन ने बताया पूजन में शांतिधारा निर्मल, अशोक, नीरज अभिषेक छाबड़ा ने किया।इसी प्रकार आदिनाथ मंदिर, पदमप्रभू जिनालय, मण्डी मंदिर के अलावा उनियाराखुर्द स्थित पदमप्रभू जिनालय में उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। पूर्व प्रधान मदनलाल जैन ने बताया कि सुबह शांति धारा व अभिषेक के बाद पूजा अर्चना की गई।


भगवान शांतिनाथ का कलशाभिषेक
टोंक. पर्युषण पर्व का आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई। इस अवसर पर शांतिनाथ मंदिर पुरानी टोंक में भगवान शांतिनाथ, मुनिसुव्रतनाथ, आदिनाथ एवं सुपाŸवनाथ का अभिषेक एवं शांति धारा की गई। समाज के प्रवक्ता राजेश अरिहंत ने बताया कि श्रावकों द्वारा उत्तम त्याग धर्म की पूजा कर श्रीजी को 31 अघ्र्य एवं श्री फ ल चढ़ाए।