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तीन किमी दूर बस स्टैण्ड, निजी वाहन चालकों की चांदी

Mohan Lal Kumawat

Publish: Dec 09, 2019 12:03 PM | Updated: Dec 09, 2019 12:03 PM

Tonk

जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत व तहसील मुख्यालय दूनी के वाशिंदे करीब एक दशक से अधिक समय से परिवहन के साधन रोडवेज बस सेवा से वंचित है। रोडवेज का संचालन नहीं होने से उन्हें जयपुर, कोटा, देवली, टोंक सहित अन्य शहरों में जाने के लिए मनमानी राशि दे तीन किलोमीटर दूर स्थित सरोली मोड़ बस स्टैण्ड जाकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है।

दूनी. जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत व तहसील मुख्यालय दूनी के वाशिंदे करीब एक दशक से अधिक समय से परिवहन के साधन रोडवेज बस सेवा से वंचित है। रोडवेज का संचालन नहीं होने से उन्हें जयपुर, कोटा, देवली, टोंक सहित अन्य शहरों में जाने के लिए मनमानी राशि दे तीन किलोमीटर दूर स्थित सरोली मोड़ बस स्टैण्ड जाकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है।

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हालांकि एक दशक पूर्व कस्बे में दो दर्जन फेरे कर रोडवेज की बसें यात्रियों को सुविधाएं दे रही थी, लेकिन वर्तमान में एक मात्र रोडवेज को संचालित है, जो जयपुर से आवां वाया दूनी चल रही, इससे उन्हें समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि एक दशक पूर्व टोंक डिपो की आधा दर्जन बस टोंक-देवली वाया दूनी व देवली-टोंक वाया दूनी के बारह घंटों में करीब चौबीस फेरे करती थी, इससे क्षेत्र के व्यापारियों, कर्मचारियों व बाहर के तकनीकी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को सुविधा मिल रही थी।

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इसके बाद विभाग ने रूट पर घाटा बताकर एक-एक कर सभी बसों को बंद कर दिया। आवां क्षेत्रवासियों की मांग पर विभाग ने कुछ साल पूर्व जयपुर-आवां वाया दूनी के लिए एक बस का संचालन किया, लेकिन उक्त बस रात्रि को आवां में रूक कर सुबह ६ बजे जयपुर के लिए रवाना होती है और शाम को ६ बजे वापस आवां पहुंच जाती है। बस के सुबह-शाम चलने से दिन भर यात्रियों को कस्बे से तीन किलोमीटर दूर स्थित सरोली बस स्टैण्ड पर जाकर बस पकडऩे के साथ वही उतरना भी पड़ रहा है।

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रात को नहीं मिलता वाहन
उल्लेखनीय है की दूनी तहसील मुख्यालय देवली व टोंक के मध्य स्थित होने के साथ ही सरोली-बूंदी व सरोली-सवाईमाधोपुर राज्य राजमार्ग से भी जुड़ा हुआ है। दूनी तहसील मुख्यालय से जुड़ी करीब दो दर्जन से अधिक पंचायतों के वाशिंदे तहसील मुख्यालय से होकर ही राजधानी, जिला व उपखण्ड़ मुख्यालय सहित बाहर के शहरों में जाते है। ऐसे में परिवहन के साधन नहीं होने से गांव से निकलने व वापस आने का कोई साधन उपलब्ध नहीं है।

दिन में तो निजी वाहनों से आना-जाना हो जाता है, लेकिन रात्रि के समय तो उन्हें महंगे दामों पर निजी वाहन किराए पर लेना पड़ता है। हालांकि सरोली-बूंदी व सरोली-सवाईमाधोपुर राज्य राजमार्ग के रूट पर निजी बसें संचालित है। नगरफोर्ट निवासी पूर्व तहसीलदार बजरंगलाल शर्मा, सरोली निवासी मदनलाल जाट, घाड़ के दिनेश बाहेती, आवां के रमेशचंद गोयल, बड़ोली के रामप्रसाद शर्मा,

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सतवाड़ा के राकेश मीणा सहित अन्य लोगों ने बताया कि तहसील मुख्यालय पर कार्य से जाने के लिए कोई परिवहन का साधन उपलब्ध नहीं है उन्हें निजी वाहनों में अधिक राशि देकर यात्रा करनी पड़ती है। विभाग इन रूटों पर रोडवेज बसों का संचालन करते ताकि क्षेत्र के लोगों को सुविधा मिलने के साथ कार्य आसान हो।

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