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बारिश से अंचलों में गिरे आशियाने खेतों में भरा पानी, किसान परेशान

Sanket Shrivastava

Publish: Sep 20, 2019 10:20 AM | Updated: Sep 19, 2019 23:55 PM

Tikamgarh

बारिश का कहर

चंदेरा. लगातार हो रही बारिश ने लोगों के आशियानों पर इस कदर कहर ढाया है कि अब इन गरीबों को सिर ढकने के लिए छत भी नसीब नहीं रही। किस्मत ने गरीब विधवा महिला शांति पर पहले ही सितम ढाया जब डेढ़ दशक पूर्व उनकेजीवन साथी मुन्नालाल चल बसे।बच्चों के सिर से पिता का साया उठने केबाद वह जैसे-तैसे मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही थी। रहने के लिए कच्चा मकान और ओढने बिछाने के कपड़े सहित खाने के लिए चंद बर्तन ही उसकी संपत्ति थी। गत दिनों तेज बारिश में वह कच्चा मकान भी ढह गया। वहीं ग्राम में भगवान दास अहिरवार ग्राम से बाहर रहकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। जब उसे यह पता चला उसका मकान गिर गया है तो बिना देरी किए अपने घर वापस लौटा लेकिन गरीबी की मार ने उसकी यहां भी कमर तोड़ दी। उसने बताया कि उसके पास इतनी आमदनी नहीं है वह वह अब घर को ठीक करा सके। गुल्लीलाल चौरसिया, शोभाराम चौरसिया, बालाराम चौरसिया सहित ग्राम मडोरी निवासी विजय सिंह दांगी एवं खुरमपुर निवासी रामचरन बुनकर सहित दर्जनों लोगों के आशियाने बारिश की भेट चढ़ गए।
खेत बने तालाब
ग्राम सहित मडोरी, खुरमपुर, घियागर, पेतपुरा, स्यावनी, गोटेट, सगरवारा, वीरपुरा, अजनारा, पचौरा के किसानो ने बताया कि खेतों में खड़ी फसल जल भराव के कारण खराब हो चुकी है। अत्यधिक बारिश के कारण फलियंा फिर से अंकुरित हो गई हैं।बारिश ने हमारे मुंह तक आया निवाला हमसे छीन लिया है। किसान हरप्रसाद ने बताया कि हमारे खेतों में मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल पूरी तरह अंकुरित हो चुकी है। यह मंजर अपनी जिंदगी के पांच दशक में हमने कभी नहीं देखा था। वहीं किसान देवीदीन का कहना है कि फसलों की यह स्थिति चिंताजनक है। बैंक का कर्ज है और फसल बर्बाद हो चुकी है। ऐसे में बैंक का कर्ज कैसे दूंगा और परिवार का पालन पोषण कैसे करूंगा, यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
पुलिया टूटने से बढ़ा जान का खतरा
वहीं ग्राम पंचायत मडोरी के समीप से निकली सुखनई नदी पर करीब एक दशक पहले डाला गया पुल जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने से लोगों में भय का माहौल है। पुल के दोनों तरफ लंबी दरारें पड़ गई हैं। ग्राम मडोरी निवासी रामकुमार पटौन्दिया, धर्मेन्द्र बेध, अशोक अहिरवार सहित अन्य लोगों ने बताया कि ग्राम में आवागमन का मात्र एक ही रास्ता है। भारी वाहन तो बारिश की शुरुआत से ही नहीं निकले, अब हालात यह है की लोग इसपर चलने से भी डरने लगे हैं।जगह- जगह पुल टूटने से आवागमन करने बालों को जानमाल का खतरा बना रहता है। साथ ही ग्राम से दूर पढऩे वाले अधिकांश बच्चे स्कूल जाना ही छोड़ देते हैं।
&जिनके घर बारिश के कारण गिर गए हैं और आवेदन आए हैं तो जाकर स्वयं देखा गया है। साथ ही संबंधित पटवारियों को निर्देशित किया गया है कि जांच कर प्रतिवेदन दे। जिनकी फसलें खराब हो गई हैं तो सर्वे करवाया जाएगा।
सुनीता साहनी, तहसीलदार, लिधौरा