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आरटीओ को नहीं खबर कि कहां की गई स्कूल वाहनों की चैकिंग

Akhilesh Lodhi

Publish: Jul 20, 2019 08:00 AM | Updated: Jul 19, 2019 20:34 PM

Tikamgarh

हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिलों में संचालित होने वाले निजी स्कूल बसों की गुणवत्ता को लेकर चैकिंग की जानी थी।

टीकमगढ़.हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिलों में संचालित होने वाले निजी स्कूल बसों की गुणवत्ता को लेकर चैकिंग की जानी थी। लेकिन जिला सहित कस्बों में आरटीओ और यातायात पुलिस की चैकिंग का कोई असर नहीं दिखा है। वहीं आरटीओ को यह भी जानकारी नहीं की चैकिंग कहां और कितने स्कूल वाहनों की हुई है। जिसके कारण जिले के कई स्कूल संचालकों द्वारा स्कूल वाहन फिटनेस, लायसेंस, फ स्र्ट एंड बॉक्स के साथ अन्य सुविधाएं के बगैर संचालित किए जा रहे है। जिम्मेदारों द्वारा अगर सुबह और दोपहर में सभी जगहों से वाहनों की जांच की जाए तो सैकड़ों की संख्या में वाहनों की कतार लग जाएगी।
जिला प्रशासन स्कूल वाहनों और यात्री वाहनों की चैकिंं ग जब करता है, तब कोई प्रदेश में बड़ी घटना घटित हो या फिर सुप्रीम और हाईकोर्ट के निर्देश पर ही चैकिंग की जाती है। इसके अलावा जिले में चाहे निजी स्कूल वाहन हो या फिर यात्री बसें हो। इनकी कभी भी चैकिंग नहीं की जाती है। चैकिंग नहीं होने के कारण जिले के निजी स्कूल नियम विरूद्ध तरीके से वाहनों को संचालित कर रहे है। अगर प्रशासन द्वारा ऐसे वाहनों की चैकिंग नियम विरूद्ध तरीके से की जाती है तो आनेवाली अनहोनी को टाला जा सकता है।
सुरक्षा के लिए बनाए गए कई नियम
बच्चों के सुरक्षा को लेकर कई तरह के नियम-कानून बनाए गए है। लेकिन यह धरातल पर कोई भी नियम दिखाई नहीं नहीं दे रहे है। बारिश और ठंड के मौसम में भी कई निजी विद्यालय संचालक खुले बॉडी स्कूली वाहन से बच्चों को लाने और घर तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। नियमों की अनदेखी कर आए दिन खटारा वाहनों से छात्र-छात्राओं को ढोया जा रहा है। जिसके कारण बच्चों का जीवन हमेशा खतरा में रहता है। कई स्कूल में ऐसे भी वाहन संचालित हैं। जो परिवहन विभाग ने उसे बेकार घोषित कर दिया है। स्कूल के नाम पर सड़कों पर सरपट दौड़ रहे वाहन विभाग की भी नजरों से ओझल दिखता है। सड़क पर दौड़ रहे ऐसे जर्जर वाहन से निकले धुआं नौनिहालों के स्वास्थ्य को तो प्रभावित करता ही है। इसके साथ ही वातावरण में जहर घोलने का काम करता है।
जिले में नहीं दिखा चैकिंग का कोई असर
प्रदेश के जिला और कस्बों में संचालित स्कूलों के वाहनों की चैकिंग मजिस्ट्रेड, आरटीओ और यातायात पुलिस द्वारा की गई। लेकिन टीकमगढ़ जिले किसी भी सड़क पर आरटीओ की चैकिंग दिखाई नहीं दी है। जिसके कारण स्कूल वाहन चालकों के हौंसले बुलंद बने हुए है। चैकिंग नहीं होने के कारण छात्रों-सहित अभिभावकों में रोश बना हुआ है।
वाहन चालकों के लिए ये होगा जरूरी
स्कूल वाहन चलाने का पाच वर्ष का अनुभव, चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस, चालक नाम पट्टिका के साथ स्लेटी शर्ट और पैंट होना चाहिए।


बसों और वैन के लिए होंगे यह नियम
स्कूली वाहनों की डीजल चालित गाडिय़ों की आयु सीमा दस वर्ष होगी। सीएनजी चालित वाहनों के लिए पंद्रह साल। स्कूल वाहन के लिए परमिट होना जरूरी है। गति सीमा निर्धारण के लिए वाहनों में स्पीड गर्वनर लगाया जाना जरूरी, लोकेशन ट्रैकिंग के लिए जीपीएस प्रणाली होना चाहिए। बसों में सीसीटीवी कैमरा ,वाहनों में अग्निशमन यंत्र, फ स्र्ट एड बॉक्स का होना जरूरी। बच्चों के बैग रखने के लिए रैक की व्यवस्था। वाहन पीले रंग का होगा। जिससे वाहन के अंदर का दृश्य स्पष्ट रूप से देख सकें। सीएनजी चालित वाहनों में फि ट किए गए। सिलिंडर के ऊपर सीट का निर्माण नहीं होगा। स्कूली वाहन में बैठने की क्षमता एवं ले आउट में अतिरिक्त बदलाव की गुंजाइश नहीं। वाहनों में किसी भी तरह की अस्थायी व्यवस्था मान्य नहीं होगी
इनका कहना
वाहनों की चैकिंग तो की गई। लेकिन जानकारी नहीं है कि कहां हुई। चैकिंग की जानकारी सैनिक के पास है। सम्र्पक कर ले।
क्षितिज सोनी आरटीओ टीकमगढ़।
यातायात पुलिस द्वारा सुबह टैक्सी चालकों को समझाइस दी गई है। टैक्सी में ज्यादा स्कूल बच्चों नहीं बैठाए। पीले कलर के वाहनों का ही उपयोग करें। वाहनों में बच्चों के लिए सभी सुविधाएं होना जरूरी है।
सीएल धु्रवेे टीआई थाना यातायात टीकमगढ़।