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टीकमगढ़ में हीरा के भंडार के संकेत मिले, खोज की तैयारी

Nitin Sadaphal

Publish: Sep 10, 2019 10:04 AM | Updated: Sep 10, 2019 00:48 AM

Tikamgarh

जिले के पांच गांव में तलाशा जाएगा हीरा

टीकमगढ़. अगले वर्ष तक जिले में हीरा खनन परियोजना का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। दो साल से केन्द्र सरकार के पास पड़ी स्वीकृति की फाइल अब अंतिम चरण में है। भारत सरकार से अनुमति मिलने के साथ ही जिले में हीरे की खोज शुरू हो जाएगी और इसके साथ ही देश में पन्ना के साथ जिला भी हीरे की लिए अपनी पहचान बना लेगा।
खास बात है कि नेशनल मिनिरल डेव्हलेपमेंट कार्पोरेशन हैदराबाद द्वारा किए गए सर्वे में जिले के कुछ क्षेत्रों में हीरा मिलने की संभावनाएं दिखाई दी थी। इसके बाद नेशनल मिनिरल डेव्हलेपमेंट कार्पोरेशन एनएमडीसी ने जिले में पांच स्थानों पर खनन की अनुमति के लिए फरवरी 201५ को खनिज विभाग में आवेदन लगाए थे। इन आवेदनों पर कार्रवाई करते हुए खनिज और राजस्व विभाग ने पूरा सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर इसे प्रदेश सरकार के पास मई 20१७ को भेज दिया था। यहां भी प्रस्ताव को अनुमति के लिए केन्द्र सरकार के पास भेज दिया गया है। इन आवेदनों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। अब दो साल से चल रही इसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है। प्रशासन की माने तो जल्द ही केन्द्र सरकार से अनुमति मिलने की संभावना है।
कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने बताया कि दोनो जिलो के तीन तहसीलों पृथ्वीपुर,जतारा और मोहनगढ़ में सर्वे किया गया है। एनएमडीसी के द्वारा खनन के लिए आवेदन लगाए गए थे। एनएमडीसी द्वारा ग्राम अचर्रा, सुनरईभाटा, दरगांयकलां, जलंधर एवं बिरौराखेत में खनन के लिए अनुमति मांगी गई थी। जहां सर्वे की रिपोर्ट अनूकूल पाई गई है। यहां के लिए खदानों के आवेदन तैयार कर राजस्व विभाग के सहयोग से अनुमति के लिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था।

78 किलोमीटर के क्षेत्र में होगा खनन
कलेक्टर सुमन ने बताया कि एनएमडीसी ने अचर्रा में 2.36 किमी, सुनरईभाटा में 10.88 किलोमीटर, दरगांयकलां में 16 किलोमीटर, जलंधर में 10 किलोमीटर एवं बिरौराखेत में 38.90 किलोमीटर में खनन के लिए अनुमति मांगी है। इस प्रकार कार्पोरेशन कुल 78.14 किलोमीटर के क्षेत्र में हीरे की तलाश करेगा। कार्पोरेशन को इन गांव में हीरे की प्रबल संभावनाएं प्रतीत हो रही है।

अंतिम चरण में फाइल, अनुमति का है इंतजार
मामला केन्द्र सरकार के पास होने के कारण जनप्रतिनिधि भी आगे नही आ रहे है, लेकिन यहां पर खदान स्वीकृत करने के लिए वन विभाग की अनुमति के साथ ही अन्य आवश्यक कार्रवाई में लगभग २ साल का समय लग चुका है। खनिज विभाग और एनएमडीसी के सूत्रों की माने तो कुछ मामलों को लेकर केन्द्र सरकार से जानकारियां चाही गई थी। जिन्हें पूरा कर दिया गया है। कलेक्अर सुमन कहते है कि सभी जानकारियां भेज दी गई है। अब यह मामला अंतिम चरण में है और जल्द ही अनुमति मिलने की संभावना है। विदित हो कि केन्द्र सरकार से हीरा खनन के लिए मिलने वाली अनुमति जिले के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी। बुंदेलखण्ड में अब पन्ना के बाद टीकमगढ़ जिले को भी हीरा कारोबार के लिए पहचाना जाएगा।

केन्द्र सरकार के पास करीब दो वर्ष से फायल स्वीकृति के लिए गई है। प्रशासन के द्वारा प्रयास करने के साथ ही भोपाल स्तर से भी प्रयास कराने की चर्चा हुई है।
सौरभ कुमार सुमन, कलेक्टर टीकमगढ़