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दश लक्षण पर्व के आठवें दिन बताया त्याग करने के महत्व

Sanket Shrivastava

Publish: Sep 11, 2019 09:18 AM | Updated: Sep 10, 2019 23:30 PM

Tikamgarh

पयुर्षण पर्व पर भगवान जिनेन्द्र का किया अभिषेक

टीकमगढ़. मझार जैन मंदिर में पर्यूषण एवं दशलक्षण पर्व के आठवें दिन मंगलवार को माता जी के सान्निध्य में पूजन का आयोजन किया गया। सर्व प्रथम भगवान जिनेन्द्र का अभिषेक किया गया। उसके बाद शांतिधारा की गई। शान्तिधारा के बाद आदर्शमति माताजी के सानिध्य में संगीतमय पूजन किया गया।
मझार जैन मन्दिर में संगीतमय पूजन में संगीतकार चिन्तामन झा आजाद वगौरा वेन्जो पूरनलाल ढोलक जीतू झींका पर केशव सिंह शामिल है । धर्मसभा में माता जी ने त्याग के बारे में प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा कि धन का दान सभी करते हैं लेकिन सही दान तो त्याग है। त्याग तो अपनी क्रियाओं का करना चाहिए जिससे मनुषय की मोह माया कम हो। उन्होंने कहा कि संसारी आदमी रुपए पैसों के पीछे दौड़ता हुआ अपनी पूरी जिंदगी निकाल देता है लेकिन ना कुछ लेकर आता है ना कुछ लेकर जाता है। तब भी उसको लगता है कि धन दौलत के बिना कुछ नहीं होगा । पूरी जिंदगी धन दौलत कमाने में निकाल देता है । जब अंत समय आता है तब सब कुछ यही छूट जाता है खाली हाथ जाना पड़ता है ।
उन्होंने गलत आदतों को त्याग करने व संयम, सत्य, अहिंसा के पथ पर अग्रसर होने की सलाह दी। संयम ब्रत का पालन करते हुए जो धन कमाएंगे वह सही रहेगा यदि बेईमानी से धन कमाया हुआ रुपए पैसे को दान भी करेंगे तो उसका पुत्र लाभ नहीं मिलेगा।