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जानें यहां: दीपावली तक क्यों करना होगा इंतजार?

Vineet Sharma

Publish: Oct 15, 2019 18:05 PM | Updated: Oct 15, 2019 18:07 PM

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मनपा ने अगस्त में शुरू किया था रिपेयर का काम, दीपावली बाद ही खुलेगा सरदार ब्रिज का बंद रास्ता

सूरत. अठवागेट से अडाजण को जोड़ते सरदार ब्रिज के रास्ते की मरम्मत का काम दीपावली बाद तक चलने की उम्मीद है। ऐसे में उन लोगों को निराश होना पड़ सकता है, जो मानकर बैठे थे कि दीपावली से पहले यह ब्रिज यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
बीमार पुलों की मरम्मत के लिए मनपा प्रशासन ने कंसलटेंट एजेंसी को काम सौंपा था। उसकी रिपोर्ट के मिलने के बाद पहले चरण में सरदार ब्रिज के अडाजण से अठवागेट को जोड़ते हिस्से पर काम शुरू किया गया था।

यह रास्ता बारिश से पहले ही आवागमन के लिए खोल दिया गया था। बीती २८ अगस्त से मनपा प्रशासन ने अठवागेट से अडाजण को जोड़ते हिस्से पर मरम्मत का काम शुरू किया था। मरम्मत के दौरान इस रास्ते को आवागमन के लिए बंद किया गया है। अधिकारियों ने उस वक्त दावा किया था कि २६ अक्टूबर तक काम पूरा कर लिया जाएगा। इसी दावे पर यकीन करते हुए लोग मान रहे थे कि दीपावली से पहले इस रास्ते पर आवागमन शुरू हो जाएगा।

जिस गति से साइट पर काम हो रहा है, इसका दीपावली से पहले पूरा हो पाना संभव नहीं दिखता। अधिकारियों ने हालांकि ठेकेदार फर्म को काम में तेजी लाने की हिदायत दी है, लेकिन ब्रिज सेल भी मानकर चल रहा है कि दीपावली से पहले काम पूरा नहीं हो पाएगा। दीपावली के दौरान कंस्ट्रक्शन उद्योग में लगी लेबर अपने मूल प्रदेशों को लौट जाती है, इसलिए दीपावली बाद भी समय पर काम शुरू हो पाना मुश्किल ही है। ऐसे में तय है कि इस रास्ते पर नवंबर के अंतिम दिनों में ही आवागमन शुरू हो पाएगा।

घूम कर जा रहे लोग

अठवागेट से अडाजण को जोड़ते सरदार ब्रिज के रास्ते को बंद कर देने के बाद से लोगों को अडाजण जाने के लिए दूसरे विकल्प आजमाने पड़ रहे हैं। उन्हें या तो वनिता विश्राम के सामने फ्लाइओवर से जाना पड़ रहा है या फिर केबल ब्रिज या स्वामी विवेकानंद ब्रिज होकर नदी पार करनी पड़ रही है।

जानें यहां: दीपावली तक क्यों करना होगा इंतजार?

इसलिए पड़ी थी जरूरत

बीते दो-तीन दशक में 326 वर्गकिमी दायरे में पांव पसार चुके शहर को रफ्तार देने के लिए मनपा प्रशासन ने नदी, खाड़ी और फ्लाइओवर पुलों का निर्माण कराया। शहरभर में कई ब्रिज तो ऐसे हैं, जिन्हेें बने हुए 30-40 साल से ज्यादा हो गए। छिटपुट काम को छोड़ दें तो निर्माण के बाद से ही अधिकांश पुलों की मरम्मत तक नहीं हो पाई है। बीते दिनों मनपा प्रशासन ने एक साथ पुराने पुलों की मरम्मत पर ध्यान और 34 ऐसे पुलों को चिन्हित किया था, जिनको तत्काल मरम्मत की दरकार है। इनमें भी सात पुलों को मेजर श्रेणी में मरम्मत के लिए चुना गया है, जिनमें दो पुल ऐसे हैं जिनका निर्माण राज्य सरकार ने किया था और बाद में महानगर पालिका को सौंप दिया गया। इसके अलावा रिपोर्ट में नदी और खाड़ी पर बने पुल व फ्लाईओवर समेत 27 छोटे पुलों की भी मरम्मत कराई जाने की जरूरत बताई गई थी।