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सोशल मीडिया पर बच्चों की तसवीरें पोस्ट करने से पहले लेनी होगी उनकी इजाज़त

Mohmad Imran

Publish: Aug 04, 2019 16:17 PM | Updated: Aug 04, 2019 16:17 PM

Special

जनरेशन जेड तय कर रही माता-पिता क्या शेयर करें क्या नहीं


-जनरेशन जेड अपनी प्रोफाइल और ऑनलाइन छवि को लेकर बहुत ज्यादा जागरूक है।


-अभिभावकों में 'शेयरटिंग' का इस कदर शौक है कि वे अपने बच्चों की तस्वीरें ऑनलाइन साझा करते हैं। लेकिन साइबर सुरक्षा और चाइल्ड अब्यूज के इस दौर में यह ढुलमुल रवैया उचित नहीं है।

सोशल मीडिया की डिजिटल दुनिया से आज युवा ही नहीं किशोर और बुजुर्ग भी जुड़ चुके हैं। तकनीकी रूप से सक्षम युवा पीढ़ी अपने माता-पिता और दादा-दादी को भी सोशल मीडिया के विभिन्न पहलुओं से रुबरु करवा रही है। उनके अभिभावक उनकी तस्वीरों और वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सबसे ज्यादा शेयर करते हैं। एक तरह से वे बड़ों की डिजिटल दुनिया के सुपरस्टार हैं। लेकिन इसके बावजूद जनरेशन जेड इस बात को लेकर जागरुक है कि उनके माता-पिता उनकी कैसी तस्वीरें अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। डिजिटल दुनिया में जहां बड़े अपनी गोपनीयता को लेकर ज्यादा फिक्रमंद नजर नहीं आते वहीं बच्चों का यह नजरिया दिखाता है कि आज की जनरेशन जी अपनी छवि और प्रतिष्ठा को लेकर कितनी संवेदनशील है।

अब बच्चे भी देने लगे हैं राय
आर्सेन और उसकी 11 साल की बहन एल्सा अपने माता-पिता के सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की जाने वाली तस्वीरों, कमेंट्स और जानकारी के बारे में बेबाक राय देते हैं। यह उस पीढ़ी के प्रतिनिधी हैं जो डिजिटल दुनिया में अपनी ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर बहुत ज्यादा फोकस्ड हैं और इसे कौन शेयर करेगा इस पर भी पूरी नजर रखते हैं। जनरेशन जी आज इस बात को लेकर चिंतित है कि सूचना युग में उनकी प्रोफाइल और ऑनलाइन जानकारी उनकी कैसी छवि बनाती है। वे अपनी सोशल लाइफ और डिजिटल पहचान को लेकर इसलिए भी जागरूक हें क्योंकि कॉलेज में एडमिशन साक्षात्कार या नौकरी के वक्त अगर नियोक्ता सोशल मीडिया अकाउंट को चेक करेंगे तो वे इन तस्वीरों को देखकर क्या महसूस करेंगे? क्योंकि अब डिजिटल प्रोफाइल को भी इंटरव्यू के समय चेक किया जाता है। इसलिए युवा अपनी प्रभावी छवि चाहते हैं।

किशोर चाहते हैं अपने हाथ में कंट्रोल
जनरेशन जेड पीढ़ी अपनी ऑनलाइन छवि खुद गढऩा चाहती हैं। इसलिए वे अपनी निजी तस्वीरों, खास पलों और जानकारियों पर ज्यादा से ज्यादा कंट्रोल चाहते हैं। 11 से 15 साल तक के इन किशोरों का मानना है कि यह मेरी पहचान और भविष्य के लिए मायने रखता है। अभिभावकों को भी 'किड्स अप्रूव्ड' को अहं से जोडऩे की बजाय बच्चों की सुरक्षा के रूप में देखना होगा।

माता-पिता भी समझें अपनी ज़िम्मेदारी
बच्चों के किशोर होने पर उनके अपने अधिकारों के बारे में जानने की ललक बढ़ जाती है। पोज करने और सोने में फर्क है। चाइल्ड अब्यूज के मामलों को देखने वाली वकील स्टेसी स्टीनबर्ग का कहना है कि इन दिनों अभिभावकों में 'शेयरटिंग' इस कदर शौक है कि वे अपने बच्चों की कैसी भी तस्वीरें ऑनलाइन साझा करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि ये तस्वीरें हैं किसकी? इसलिए माता-पिता भी तस्वीरें शेयर करने से पहले पूछने लगे हैं। यह एक तरह से कॉपीराइट का पारिवारिकरण है।