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हरियाणा:धान की खेती रोकने के सुझाव से किसान नाराज, कृषि समस्याओं के समाधान के लिए रखी यह विशेष मांगें

Prateek Saini

Publish: May 22, 2019 19:50 PM | Updated: May 22, 2019 19:50 PM

Sonipat

खेतों में नहरी व बरसाती पानी देने को तैयार हो योजना

 

(चंडीगढ़,सोनीपत): एक तरफ जहां हरियाणा सरकार किसानों को धान की पैदावार से पीछे हटाने के लिए कई योजनाओं को लागू करने की कवायद में है वहीं किसानों ने सरकार पर पलटवार करते हुए किसान विरोधी नीतियों पर घेराबंदी कर दी है। किसानों ने सरकार को एमएसपी के मुद्दे पर घेरते हुए कई सवाल उठाए हैं।


भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढुनी ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हरियाणा सरकार पानी कि जल संकट कि स्थिति पर गंभीरता दिखाते हुए सात हल्कों में धान कि खेती के बिजाए मक्के व अरहर कि खेती के लिए पायलट परियोजना लागू कि गई है, जबकि सच्चाई दावों से कोसो दूर है। गुरनाम सिंह ने बताया कि हर खेत में पानी कैसे पहुंचे इसकी कोई योजना सरकार द्वारा तैयार नहीं की गई है। सरकार ने डार्कजोन की जीवन रेखा दादुपुर नलवी नहर में पानी चालू करवाने कि बजाए उसे बंद करने का काम किया। किसान के खेत में पानी पहुंचाने की योजना तैयार करना किसानों की सबसे अहम मांग है।


उन्होंने बताया कि पिछले साल मक्का खरीद के मामले में हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को भी गुमराह करते हुए दावा किया था कि किसान मंडियों में मक्का लेकर ही नहीं आए। किसान नेता ने कहा कि सरकार का नलकूप कनैक्शन बंद करना किसानों को सीधा-सीधा मारना है क्योंकि नलकूप से केवल धान ही नहीं अन्य फसलों की सिंचाई भी होती है। उन्होंने बताया कि खेती व सिंचाई पर लगातार बजट कम हो रहा है जिस कारण यह समस्या गंभीर रूप धारण कर रही है। सरकार अपनी खामियों को छिपाने के लिए धान की पैदावार को रोक रही है। जबकि सच्चाई यह है कि किसानों के हित में कोई योजना नहीं है।