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हरियाणा के यह सात सांसद मंत्री बनने को अंतिम समय तक करते रहे लॉबिंग, काम नहीं आए राजनीतिक समीकरण

Prateek Saini

Publish: May 31, 2019 18:59 PM | Updated: May 31, 2019 18:59 PM

Sonipat

शाह भी घोषणा के बावजूद नहीं कर पाए बृजेंद्र की मदद...

 

(चंडीगढ़,सोनीपत): हरियाणा की सभी दस सीटों से पर चुनाव जीतने वाली भाजपा के सात सांसद मोदी मंत्रिमंडल में स्थान हासिल करने के लिए अंतिम समय तक लॉबिंग करते रहे। इसके बावजूद वह कामयाब नहीं हो सके। हालांकि इस बात की अटकलों का दौर भी शुरू हो गया है कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जातिगत समीकरणों को साधते हुए आने वाले समय में एक और सांसद को केंद्र में प्रतिनिधित्व मिल सकता है। मोदी सरकार में शामिल नहीं होने पर सबसे बड़ा झटका हिसार के सांसद बृजेंद्र सिंह को लगा है। बृजेंद्र आईएएस की नौकरी छोडक़र राजनीति में कूदे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले हिसार में चुनावी रैली के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जनसभा में यह ऐलान किया था कि अगर हिसार की जनता यहां से भाजपा को जितवाती है तो केंद्र में मंत्री बनवाना उनकी जिम्मेदारी होगी लेकिन अमित शाह अपनी घोषणा को पूरा नहीं करवा सके हैं।

 

काम नहीं आया हुड्डा व चौटाला के गढ़ ढहाने का तर्क

हरियाणा में भाजपा के तीन सांसद ऐसे हैं जिन्होंने मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए हुड्डा व चौटाला के गढ़ में सेंध लगाने जैसे तर्क अंतिम समय तक दिए। सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हराया, एमएलए अरविंद शर्मा ने दीपेंद्र सिंह हुड्डा को हराकर हुड्डा का गढ़ कहे जाने वाले सोनीपत, रोहतक व झज्जर जिलों में भी कमल खिलाया है। दोनों सांसद इसी तर्क पर मोदी सरकार में हिस्सेदारी चाहते थे। सिरसा की सांसद सुनीता दुगगल का तर्क था कि उन्होंने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष को हराया है वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के गढ़ में कमल खिलाया है। इसके बावजूद इन तीनों सांसदों का कोई तर्क नहीं चल पाया और टीम मोदी का हिस्सा बनने से वंचित रह गए।

 

सर्वाधिक वोट से जीते हैं करनाल के सांसद

करनाल लोकसभा सीट से सांसद बने विजय भाटिया खुद तथा उनके लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी अंतिम समय तक लॉबिंग करते रहे। विजय भाटिया पंजाबी समुदाय से हैं और मुख्यमंत्री के करीबी तथा संघ के सक्रिय नेता रहे हैं। भाटिया ने कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को छह लाख 54 हजार 269 वोटों से हराया है। यह अपने आप में एक रिकार्ड है। भाटिया की जीत हरियाणा में रिकार्ड है और देश में वह तीसरे नंबर पर हैं। इसके बावजूद भाजपा हाईकमान ने विजय भाटिया के राजनीतिक तर्कों को ज्यादा अहमियत नहीं दी।