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छोटे से गांव का विद्यालय स्काउट गतिविधि में बना राजस्थान का सिरमौर

Mahesh Parbat

Publish: Sep 05, 2019 09:04 AM | Updated: Sep 05, 2019 09:04 AM

Sirohi

यहां हर बच्चे की रग-रग में स्काउटिंग गतिविधियां रची-बसी हैं। कक्षा 6 से 10 तक हर बच्चा इनसे जुड़ा हुआ है।

सिरोही. यहां हर बच्चे की रग-रग में स्काउटिंग गतिविधियां रची-बसी हैं। कक्षा 6 से 10 तक हर बच्चा इनसे जुड़ा हुआ है। यहां हर प्रकार की गतिविधि स्काउट के माध्यम से ही होती हंै। स्काउटिंग एक सह शैक्षणिक गतिविधि नहीं है बल्कि जुनून है। हर दिवस और उत्सव को इको फेंडली मनाया जाता है। इसके बूते विद्यालय जिले ही नहीं राजस्थान में स्काउटिंग का सिरमौर बन चुका है।
हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर स्थित फलवदी के राजकीय माध्यमिक विद्यालय की। 2013 में नियुक्त स्काउट प्रभारी संदीप महला ने आने के बाद छात्रों की गतिविधियां ही बदल दीं। इसमें अन्य शिक्षकों और कार्मिकों का भी सहयोग मिला। मंगलवार और शुक्रवार को विद्यालय स्काउट के रंग में रंग जाता है। महला बताते हैं कि इसका मुख्य मकसद है कि बच्चा पढ़ लिख कर डॉक्टर बने, इंजीनियर बने, वकील बने या फिर प्रशासनिक अधिकारी बने यह अलग बात है पर इन सबसे ज्यादा जरूरी है कि वह एक आदर्श नागरिक बने। स्काउटिंग की यही अवधारणा है। विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ ही स्काउटिंग से जोड़कर चरित्रवान और सभ्य नागरिक बनाया जा सकता है। सरकार और शिक्षा विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद कई विद्यालय ऐसे हैं जहां या तो स्काउटिंग गतिविधि संचालित ही नहीं की जा रही या फिर मात्र औपचारिकता पूरी की जा रही है लेकिन सिरोही के इस सरकारी विद्यालय के कण-कण में स्काउटिंग बसा है।
ऐसे हुई शुरुआत
2013 तक विद्यालय में स्काउट गतिविधियां औपचारिक रूप से ही संचालित होती थीं, बच्चों को स्काउट यूनिफार्म भी भामाशाहों ने उपलब्ध करवाई थी। 2013 में आए स्काउट प्रभारी संदीप ने स्थिति ही बदल दी। उन्होंने अभिभावकों और विद्यार्थियों को स्काउट के लिए प्रेरित किया। छोटे कैम्प, सामाजिक कार्यों, सेवा कार्यों व इको क्लब गतिविधियों में स्काउट के बच्चों को भागीदार बनाया और प्रोत्साहित किया। साथ ही, स्वयं ने आगे बढ़कर इको गतिविधियों का सफल संचालन किया। मंगलवार व शुक्रवार को बच्चे स्काउट यूनिफार्म में ही आते हैं। नतीजतन सभी बच्चे स्काउट से जुड़ गए ।
ये गतिविधि शामिल
यहां प्रार्थना से छुट्टी तक हर गतिविधि स्काउट के माध्यम से होती है। प्रार्थना, प्रतिज्ञा, सामान्य ज्ञान आदि होते हैं। प्रभारी संदीप महला व अन्य स्टाफ बच्चों को संस्कारयुक्त गतिविधि करवाते हैं। सेवा कार्य के रूप में मंदिर की सफाई, पेड़ों की सुरक्षा, गली मोहल्लों में रैली, परिसर को प्लास्टिक मुक्त करने का अभियान, नए परिंडे व घोंसले, पशुओं को चारा, आपसी सहयोग जैसे कार्य किए जाते हैं। इन्हीं गतिविधियों का नतीजा है कि विद्यालय स्वच्छागृह की रिपोर्ट में भारत के टॉप टेन विद्यालयों में शामिल हुआ। सीईई राजस्थान और अडानी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में 'स्वच्छता किसकी जिम्मेदारी हैÓ थीम पर स्काउटिंग के बलबूते पर ही विद्यालय का छात्र स्वच्छागृह पुरस्कार दिलवा चुका है।