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प्रसूता के इलाज में लापरवाही को माना गंभीर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निहालसिंह एपीओ

Amar Singh Rao

Publish: Oct 07, 2019 10:31 AM | Updated: Oct 07, 2019 10:31 AM

Sirohi

प्रभारी मंत्री के साथ बैठक के बाद कलक्टर ने शनिवार देर रात जारी किए आदेश

सिरोही. जिला अस्पताल में खून नहीं मिलने पर बिना उपचार प्रसूता को घर ले जाने और वहां मृत शिशु को जन्म देने के मामले में आखिरकार शनिवार रात कनिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निहाल सिंह को कार्यमुक्त (एपीओ) कर दिया गया। उन्हें जयपुर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक को उपस्थिति देने के आदेश जारी कर दिए गए।
जिला प्रभारी मंत्री भंवरसिंह भाटी की उपस्थिति में शनिवार देर रात तक चली बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इसके बाद जिला कलक्टर सुरेन्द्र कुमार सोलंकी ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के निर्देशानुसार आदेश जारी किए।
इससे पूर्व प्रभारी मंत्री ने जनाना अस्पताल में भर्ती प्रसूता से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली थी। प्रभारी मंत्री ने देर रात प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने वाले स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निहालसिंह को एपीओ किया। प्रभारी मंत्री ने जिला कलक्टर को भी निर्देश देकर प्रसूता के इलाज में लापरवाही के मामले की जांच करवाकर अन्य दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजने की बात कही।

डॉक्टर है या कसाई?
सांसद देवजी पटेल ने शनिवार शाम कलक्ट्री सभागार में आयोजित बैठक में भी राजस्थान पत्रिका की ओर से उठाए इस मामले में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि जब हिमोग्लोबिन दो ग्राम था तब प्रसूता को खून क्यों नहीं चढ़ाया गया।इस पर कार्यवाहक पीएमओ डॉ. सुनीता थरेजा ने बताया कि खून की व्यवस्था कर दी थीलेकिन प्रसूता का पति उसे लेकर चला गया।सांसद ने पूछा कि डॉ. निहाल ने उसे जाने क्यों दिया? वनवासी परिवार है, कभी झूठ नहीं बोलता है। ऐसे में डॉ. निहाल ने किया वो सत्य है या अखबार में आई खबर...। जो आदमी एक प्रसूता को उपचार के लिए यहां लाता है तो वापस कैसे जाएगा? मानवता या मानवाधिकार के तहत प्रसूता को खून चढ़ाना चाहिए था। ऐसे में उस डॉक्टर ने बच्चे की हत्या की है,यह डाक्टर है या कसाई है। अस्पताल में कोई चिकित्सक को थप्पड़ मारता है तो सभी एकजुट हो जाते हैं और संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हंै, लेकिन अब लापरवाही के कारण यह बच्चा मर गया इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?ब्लड आपको थोड़े ही देना है, कई स्वयंसेवी संस्था हंै जो रक्तदान करती हैं। इस मामले में डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए। एक बच्चे की जान चली गई और चिकित्सा विभाग अब वहां जा रहा है और खून चढ़ा रहा है। अधिकारी बस एक ही जवाब दे रहे हंै, जांच चल रही है। उन्होंने कलक्टर से भी पूछा, आखिर किस बात की जांच चल रही है?

समाचार से खुली आंखें
शिवगंज के बादला गांव के समीप कुकड़ीखेड़ा में हीराराम पुत्र भूराजी मीना के कृषि कुएं पर काम करने वाले चित्रावास के नवाराम गमेती भील की पत्नी लीला बाई को एक अक्टूबर को प्रसव पीड़ा होने पर अल सुबह राजकीय सामुदायिक अस्पताल में लाया गया था। उसे खून की कमी बताकर जिला अस्पताल रैफर कर दिया गया था। मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए राजस्थान पत्रिका ने शुक्रवार और शनिवार को लगातार इस मामले से संबंधित समाचार 'खून नहीं मिला तो बिना उपचार गर्भवती पत्नी को घर लाया, मृत शिशु का जन्मÓ और 'चिकित्सा विभाग की टीम पहुंची खेत पर, प्रसूता को अस्पताल में भर्ती करवाया, अब चढ़ा रहे खूनÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किए। खबर छपते ही प्रशासन हरकत में आया और प्रसूता को सिरोही अस्पताल में भर्ती करवाया।

अन्य जिम्मेदारों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
शहर में यह चर्चा है कि सरकार ने मामले में एक चिकित्सक को एपीओ कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की? उन्हें क्यों बचाया जा रहा है। क्या इस पूरे घटनाक्रम में अन्य दोषी नहीं है?

एडीएम और कमेटी जांच कर रहे हैं। सोमवार तक पूरी हो जाएगी। एक चिकित्सक को तो एपीओ कर दिया। विस्तृत जांच में जिम्मेदारों का पता लगाया जा रहा है। इसके बाद और कार्रवाई करेंगे।
- सुरेन्द्रकुमार सोलंकी, जिला कलक्टर, सिरोही