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आला अधिकारियों को गुमराह कर अधीनस्थ अधिकारी प्रतिबंधित रूट से करा रहे कोल परिवहन, कलेक्टर से सीधी बात

Ajit Shukla

Publish: Nov 15, 2019 12:46 PM | Updated: Nov 15, 2019 12:46 PM

Singrauli

पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर ने माजन मोड़ से कोल परिवहन पर लगा दिया था प्रतिबंध....

सिंगरौली. ट्रांसपोर्टरों को शह देकर प्रतिबंधित रूट से कोल परिवहन कराने की चाहत में अधीनस्थ अधिकारी आला अधिकारियों को भी गुमराह करने से बाज नहीं आए हैं। पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर अनुराग चौधरी ने बाकायदा जनसंपर्क कार्यालय से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर माजन मोड़ से कोल परिवहन को पूरी तरह से प्रतिबंधित किए जाने की सूचना सार्वजनिक कराई थी।

कई दिनों तक कोयला परिवहन पूरी तरह से प्रतिबंधित भी रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पुलिस और प्रशासन के अधीनस्थ अधिकारियों ने निर्देश को धता बताते हुए एक-एक कर कई ट्रांसपोर्टरों को माजन मोड़ से कोल परिवहन की इजाजत दे दी। आलम यह है कि अधिकारियों की ट्रांसपोर्टरों से मिलीभगत का खामियाजा प्रतिबंधित रूट पर बसे बस्तियों के लोग भुगत रहे हैं।

मनमाने तरीके से कोल परिवहन कर रहे ट्रांसपोर्टर उन्हें हरीझंडी देने वालों की तो जेब भर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों को कोयले की धूल परोसने में भी कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं। यह सब केवल कम लागत में अधिक मुनाफा के चक्कर में किया जा रहा है। पूर्व में अधीनस्थों की ओर से नियमों को धता बताते हुए कोल परिवहन की इजाजत देने का मामला भी चर्चा में आया था।

तत्कालीन एसडीएम नागेश सिंह ने जहां माजन मोड़ से कोल परिवहन के लिए किसी को भी किसी भी तरह की इजाजत नहीं होने की बात कही थी। वहीं परिवहन से रोकने का जिम्मा संभालने वाले पुलिस के अधीनस्थ अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टरों को रोकने के बजाए परिवहन की हरीझंडी दे दी। अधिकारियों ने खुद की मनमानी को धीरे-धीरे नियम बना दिया और आला अधिकारियों की अदला-बदली के बाद उन्हें गुमराह करते हुए पूर्व से परिवहन जारी होने का हवाला दे दिया।

यातायात पुलिस कार्रवाई करने की नहीं समझती जरूरत
अधीनस्थ अधिकारियों की मिलीभगत के चलते यातायात पुलिस भी कार्रवाई करने से कन्नी काटती है। जबकि मनमानी तरीके नियमों को ताक पर रखकर ट्रांसपोर्टर माजन मोड़ पर यातायात पुलिस की नाक के नीचे से कोल परिवहन कर रहे हैं। पूछने पर यातायात पुलिस भी अनुमति मिले होने का हवाला देते हुए कागज दिखाती है। वजह जो भी हो, हकीकत यही है कि यातायात पुलिस को कोल परिवहन में लगे वाहनों पर कार्रवाई किए हुए महीनों बीत गए। जबकि नियमों की धज्जियां हर रोज उड़ाई जाती हैं।

कलेक्टर केवीएस चौधरी से सीधी बात में बयां हुआ अधीनस्थ अधिकारियों का कारनामा

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Patrika IMAGE CREDIT: Patrika
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रिपोर्टर:- क्या आपने ट्रांसपोर्टरों को माजन मोड़ से कोल परिवहन की इजाजत दी है, एसडीएम और यातायात पुलिस अनुमति होने की बात कर रहे हैं। क्या उनके अधिकार क्षेत्र में यह है क्योंकि पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर ने प्रतिबंध लगाया था।

कलेक्टर - मेरे यहां आने के बाद बताया गया कि कई ट्रांसपोर्टरों को रात में परिवहन की इजाजत है। मेरे द्वारा किसी भी ट्रांसपोर्टर को अनुमति न ही दी गई और न ही देने को कहा गया है। पूर्व की स्थिति क्या रही है, इसकी जांच कराएंगे।

रिपोर्टर - कोल परिवहन से संबंधित एनजीटी की ओवर साइट कमेटी के निर्देशों का पालन करना क्या जिला प्रशासन के लिए अनिवार्य है? है तो फिर कई प्रमुख नियमों को नजर अंदाज क्यों किया जा रहा है। जबकि नियम व निर्देश जनहित से जुड़े भी हैं।

कलेक्टर - कमेटी के निर्देशों का पालन किया जाना अनिवार्य है। निर्देश जनहित से जुड़ा है। सडक़ मार्ग से कोल परिवहन के लिए जो भी नियम निर्धारित किए गए हैं, उनका पालन किया जाना आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों को इस बावत निर्देशित किया गया है। फिर से उन्हें सख्ती से पालन कराने का निर्देश देेंगे।

रिपोर्टर - कोल परिवहन करने वाले वाहन हर रोज ओवरलोड होकर गुजरते हैं। वाहन की ट्राली को ढकने के लिए उपयोग में लाया गया कवर केवल नाम मात्र का होता है। वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं हैं, लेकिन चेकिंग और कार्रवाई हुए महीनों बीत गए हैं। पुलिस कार्रवाई करने से कन्नी काट रही है, आखिर क्यों?

कलेक्टर - नियमों को नजर अंदाज करने वाले ट्रांसपोर्टरों के वाहन पर कार्रवाई कराई जाएगी। कोई अधिकारी नियमों को नजर अंदाज कर रहे वाहनों को संरक्षित करता है तो उससे भी पूछताछ की जाएगी। बात चर्चा में आई है तो मैं खुद औचक निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लूंगा।

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