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कुपोषण के डेंजर जोन में सिम्प्लेक्स बस्ती, चितरंगी व देवसर विकासखंड भी कई गांव चिह्नित

Amit Pandey

Publish: Sep 13, 2019 14:27 PM | Updated: Sep 13, 2019 14:27 PM

Singrauli

जिम्मेदार उदासीन......

सिंगरौली. ऊर्जाधानी में कुछ गांव ऐसे हैं, जहां से कुपोषण दूर होने का नाम नहीं ले रहा है।बात शहरी क्षेत्रों के आस-पास की सिम्प्लेक्स बस्ती की कर रहे हैं। इन बस्तियों की हकीकत देखकर हर किसी की रूह कांप जाएगी। साथ ही चितरंगी व देवसर तहसील के कई गांवों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। बस्ती व गांवों को चिन्ह्ति करने के बाद भी जिम्मेदार कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं। इन गांवों की तस्वीर रोंगटे खड़ी कर देती है। मलीन बस्ती, गांव में साफ-सफाई शून्य, खान-पान का कोई ध्यान नहीं व जागरूकता की कमी जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है।

जानकारी के लिए बतादें कि बच्चों को पोषणयुक्त बनाने के लिए सरकार कई योजनाओं को संचालित कर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन सरकार की योजनाएं विभाग के दफ्तर में दम तोड़ देती हैं। खास बात ये है कि विभागीय अधिकारी दिखावा तो खूब करते हैं लेकिन जमीनी हकीकत देखी जाए तो अधिकारियों की सारी कवायद बेमानी जान पड़ती है। शासन की तमाम योजनाएं इन बस्तियों से कोसों दूर हैं।

पोषण माह में दिखावा
सितंबर महीना पोषण माह के रुप में मनाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य व महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से अलग-अलग दिन गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। पोषण माह के अवसर पर अधिकारियों की ओर से जागरूकता का दिखावा तो किया जाता है लेकिन इसके बाद कार्यक्रम व जागरूकता करना विभागीय अफसर भूल जाते हैं।

जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे अफसर
आधा दर्जन से अधिक बस्तियों व गांवों की स्थिति से अवगत होने के बावजूद अधिकारी न केवल निष्क्रिय हैं। बल्कि जिम्मेदारी से भी पल्ला झाड़ रहे हैं। दलील है कि ग्रामीणों को तमाम तरह की समझाइश दी गई। योजनाओं से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद उनकी ओर से गौर नहीं फरमाया जाता है। यह दलील देने वाले अधिकारी ये भूल जाते हैं कि लोगों में अज्ञानता है।इसी वजह से उन्हें जागरूक करने की जिम्मेदारी दी गई है।

ये गांव जहां कुपोषण ही कुपोषण
ब्लाक गांव
बैढऩ शहरी क्षेत्र सिंप्लेक्श बस्ती
चितरंगी क्रमांक-२ गोंदवाली, सेमुआर
देवसर बरका, पुरैल, करदा, कुसेड़ी