स्लो इंटरनेट स्पीड होने पर आपको पत्रिका लाइट में शिफ्ट कर दिया गया है ।
नॉर्मल साइट पर जाने के लिए क्लिक करें ।

हिदायत तमाम, नहीं आया काम, एनआरसी खाली होने का क्या है वजह

Amit Pandey

Publish: Jan 16, 2020 12:13 PM | Updated: Jan 16, 2020 12:13 PM

Singrauli

पर्यवेक्षकों को जारी किया गया है नोटिस....

सिंगरौली. कुपोषण दूर करने को लेकर संबंधित अधिकारियों को भले ही तमाम तरह का निर्देश जारी हो, लेकिन कोईभी हिदायत काम नहीं आ रही है।हकीकत यह कि एनआरसी अब भी खाली है। सेक्टर पर्र्यवेक्षकों को नोटिस जारी करने के बावजूद बच्चे एनआरसी में नहीं पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित एनआरसी का भी बुरा हाल है। बतादें कि अधिकारियों की ओर से पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया जाता है। मगर, पर्यवेक्षक हैं कि अफसरों का निर्देश मानने को तैयार नहीं हैं। देखा जाए तो जिले में डेढ़ हजार से अधिक मासूम अति कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। फिर भी जिला अस्पताल सहित ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की एनआरसी खाली पड़ी है।

अफसरों के लापरवाही का आलम यह है कि सब कुछ निर्देश तक सीमित रह गया है। यही कारण है कि कुपोषित बच्चों को पोषणयुक्त बनाने की कवायद फेल साबित हो रही है। एनआरसी में सन्नाटा पसरा है। बेड खाली पड़े हैं। एनआरसी व आंगनवाड़ी में सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं। मगर, इसका लाभ गांव के गरीब लोगों को नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि बच्चे कुपोषण की जद में हैं और महकमा कागजी खानापूर्ति में जुटा है। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही पर्यवेक्षकों की मानी जा रही है। जाहिर सी बात है कि जब मैदानी अमला सुस्त पड़ जाए तो लाभ कैसे मिल पाएगा।

अभियान में करते हैं दिखावा
वैसे तो महिला बाल विकास विभाग में खूब अभियान चलाए जाते हैं। मगर, यह अभियान भी दिखावे तक सीमित रहता है। बौर करने की बात यह है कि गत सितंबर माह में महिला बाल विकास विभाग की ओर से पोषण माह अभियान चलाया गया था। इस दौरान एनआरसी में बच्चों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से भी अधिक रहा। जैसी ही अभियान समाप्त होता है, स्थिति ठीक इसके विपरीत हो जाती है। अफसर लगातार गौर फरमाते रहें तो स्थिति बेहतर होने की संभावना है।

सुस्त पड़ गया महकमा
कागजी खानापूर्ति के बाद ढिंढोरा पीटने वाला महकमा सुस्त पड़ गया है। नर्सों ने बताया कि महिला बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक बच्चों को भर्ती कराती थी लेकिन काफी दिनों से कुपोषित बच्चों की ओर नजरें इनायत नहीं हुई है। जिला अस्पताल सहित देवसर, चितरंगी व सरई में संचालित एनआरसी की क्षमता 20 बेड की है। वर्तमान में एनआरसी में बेड खाली पड़े हैं। इस गंभीर मसले को लेकर विभाग के अफसर अनजान बनकर बैठे हैं।

यह है हाल:
एनआरसी भर्ती बच्चों की संख्या
जिला अस्पताल 03
देवसर 02
चितरंगी 02
सरई 00

वर्जन:-
ठंड के कारण बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराने से परिजन इंकार कर देते हैं। गांवों में भ्रमण के दौरान हमने स्वयं बच्चों को भर्ती कराने के लिए लोगों से बात करते हैं।
प्रवेश मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग।

[MORE_ADVERTISE1]