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मच्छर की मार झेल रही शहरी आबादी, वीआईपी कालोनी तक सिमटी फोगिंग व्यवस्था

Amit Pandey

Publish: Sep 17, 2019 16:27 PM | Updated: Sep 17, 2019 16:27 PM

Singrauli

मच्छर रोधी उपाय शून्य......

सिंगरौली. जिला मुख्यालय के शहरी क्षेत्र की अधिकतर आबादी वर्षा के मौसम में मच्छर की मार झेल रही है। समूचे शहर के अधिकतर क्षेत्र में मच्छरों से जनता परेशान है और लोगों को रात को चैन की नींद तक नसीब नहीं हो रही। इस समस्या पर काबू पाने के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त इंतजाम हैं मगर इसका अधिकतर जनता को लाभ नहीं मिल रहा। इससे लोगों का स्वास्थ्य बिगडऩे की आशंका को टाला नहीं जा सकता। असल में नगर निगम अपने संसाधनों से मच्छर रोधी उपाय तो कर रहा है मगर वे केवल वीआईपी कालोनियों से बाहर नहीं आ रहे। इस कारण अधिकतर शहरी आबादी मच्छरांें की समस्या से जूझने के लिए अपनी व्यवस्था पर ही निर्भर हैं।

शिकायत है कि नगर निगम की ओर से शहर की कुछ मुख्य या वीआईपी कालोनी में ही फोगिंग मशीन से मच्छर रोधी उपाय किए जाते हैं जबकि इस मामले में शेष अधिकतर शहर की अनदेखी हो रही है। इसके चलते शहरी क्षेत्र की ढाई लाख से अधिक आबादी मच्छरों की समस्या का शिकार है। बताया गया कि नगर निगम के पास फोगिंग की तीन मशीन चालू हालत में हैं जबकि एक नई मशीन तैयार होने का इंतजार कर रही है। इसके बावजूद लोगों को मच्छरों की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए प्रभावी उपाय नहीं हो रहे। नगर निगम का अमला इस मामले में केवल बैढऩ व विंध्यनगर के कुछ वीआईपी इलाकों पर ही मेहरबान है।

इसके मुकाबले शहर के शेष क्षेत्र की अनदेखी हो रही है। शिकायत है कि शहरी क्षेत्र का हिस्सा पचखोरा, बलियरी, तेलाई, नौगढ़, तेलगवां, पचौर, जुवाड़ी जैसे दूरदराज वाले इलाकों में अब तक एक बार भी फोगिंग नहीं की गई। इसलिए इन सभी कालोनियों या आबादी क्षेत्र में लोग मच्छरों की समस्या झेल रहे हैं। पचखोरा व शासकीय कालेज के पीछे कालोनी के नागरिकों की शिकायत है कि इस क्षेत्र में अब तक एक बार भी फोगिंग नहीं की गई। इसके चलते नागरिकों की ओर से नगर निगम के स्तर पर सुविधाएं मुहैया कराने में भेदभाव की बात भी कही जा रही है। शिकायत है कि इन कालोनियों में नियमित सफाई व कचरे का उठाव भी नहीं होता। इसके चलते वहां मच्छरों की समस्या अधिक है। इसलिए वहां प्राथमिकता से फोगिंग करवाई जानी चाहिए पर लगता है नगर निगम को लोगों की इस परेशानी से कोई सरोकार नहीं है।