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विकास कार्यों को लगा निर्माण एजेंसियों की सुस्ती का ग्रहण

Ajit Shukla

Publish: Oct 14, 2019 12:49 PM | Updated: Oct 14, 2019 12:49 PM

Singrauli

स्वीकृत 616 कार्यों में केवल 100 हो पाए पूरे, 18 कार्य शुरू ही नहीं हुए....

सिंगरौली. जिले के विकास में निर्माण एजेंसियों की सुस्ती बड़ी बाधा बन गया है। निर्माण कार्यों की कछुआ चाल के चलते डेढ़ वर्ष बाद भी उन सुविधाओं को मुहैया नहीं कराया जा सका है, जिसको लेकर डेढ़ से दो वर्ष पहले बजट उपलब्ध करा दिया गया। बात डीएमएफ से स्वीकृत कार्यों की कर रहे हैं।

जिला खनिज प्रतिष्ठान समिति ने जिले का विकास करने के उद्देश्य से वर्ष 2017, 2018 और 2019 में कुल 616 निर्माण कार्यों की स्वीकृति देते हुए बजट उपलब्ध कराया। कार्य समय से पूरा हो सके। इसको लेकर आनन-फानन में विभागों की ओर से निर्माण एजेंसियों का निर्धारण भी कर लिया, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका।

निर्माण एजेंसियों की लापरवाही व सुस्त कार्य प्रणाली का अंदाजा महज इस बात से लगाया जा सकता है कि स्वीकृत 616 कार्यों में केवल 100 कार्य पूर्ण हो पाए हैं। 516 कार्यों को अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। हैरत भरी बात यह है कि इनमें से ज्यादातर कार्यों को पूर्ण करने की अवधि महीनों पहले पूरी हो गई है। इतना ही नहीं एजेंसियों की ओर से स्वीकृत कार्यों में करीब 18 कार्य अभी तक शुरू ही नहीं किए जा सके हैं।

संविदाकार जानबूझ कर करते हैं लापरवाही
निर्माण एजेंसियों की ओर से निर्माण में लगे संविदाकार कार्य पूरा करने में जानबूझ कर देरी करते हैं। यह खेल इसलिए किया जाता है ताकि समय-सीमा पूरी होने और बाद में महंगाई का हवाला देते हुए नया स्टीमेट लगाकर स्वीकृत राशि में बढ़ोत्तरी कराई जा सके। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत भी होती है।

पुराने पूरे नहीं हुए, नए का कब आएगा नंबर
डीएमएफ से अभी हाल 115 करोड़ रुपए के कार्यों को स्वीकृति मिली है, लेकिन उन कार्यों के शुरू होने और समय पर पूरे होने में संशय जान पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि निर्माण एजेंसियां अभी पुराने कार्य ही नहीं कर पाई हैं। ऐसे में नए कार्यों को जल्द पूरा होने में संशय जान पड़ रहा है।

516 करोड़ रुपए के बजट का स्वीकृत है कार्य
डीएमएफ से पिछले तीन वर्षों में 516 करोड़ रुपए के बजट का कार्य स्वीकृत है, लेकिन अभी तक इनमें से 400 करोड़ रुपए से अधिक का कार्य पूरा होना बाकी है। इनमें से ज्यादातर बड़े कार्य पीडब्ल्यूडी के जिम्मे है। छोटे-छोटे कार्यों को पूरा कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग को ही दी गई है।