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विदेश के इस पेड़ ने यहां नाक में कर दिया है दम

Gaurav Saxena

Publish: Aug 19, 2019 18:57 PM | Updated: Aug 19, 2019 18:57 PM

Sikar

(जूली फ्लोरा) यानी विलायती बबलू इन दिनों कई जगहों पर हादसे का सबब बनते जा रहे हैं। काटने से और अधिक पनपते हैं।

नीमकाथाना. ग्रामीण क्षेत्र की सडक़ों के किनारें विलायती बबूल (जूली फ्लोरा) फैली होने से वाहन चालकों को काफी परेशानी हो रही है। सडक़ के दोनों किनारों पर विलायती बबूल के पेड़ खड़े है। बड़े वाहनों के सामने से आने पर छोटे वाहन चालकों को साइड लेने में काफी परेशानी हो रही है। बारिश के इस मौसम में विलायती बबूलों ने सडक़ पर साम्राज्य कर रखा है। टोडा से गणेश्वर, लादीकाबास, दीपावास, दरीबा, सांवलपुरा तंवरान आदि गांवों में जाने वाली सडक़ किनारे हजारों विलायती खड़ी है। सडक़ किनारे खड़ी ये बबूल हादसे का कारण बनी हुई है।
यही नहीं इन सडक़ पर बने मोड़ में भी बबूलों ने आधिपत्य कर रखा। जिससे सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देने पर हादसे की संभावना बनी रहती है। सडक़ किनारे खड़ी इन बबूलों को काटने की जहमत कोई नहीं उठा रहा है। पीडब्ल्यूडी व वन विभाग भी इन अंग्रेजी बबूलों को काटने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। ये बबूलें दिन दोगनी व रात चौगुनी बढ़ रही है।
सडक़ के दोनों तरफ अंग्रेजी बबूल इतनी फैल चुकी है की सामने से बड़े वाहन के आ जाने पर छोटो को साइड़ नहीं मिल रही हैं। अंग्रेजी बबूल से लोगों को फायदा कम, नुकसान ज्यादा हो रहा है। धीरे-धीरे ये विलायती बबूल पूरे क्षेत्र में फैलती जा रही है। इन अंग्रेजी बबूलों का कांटा लंबा व मोटा अधिक होता है। सामने से बड़े वाहनों के आने पर दुपहिया वाहन चालक बाइक को सडक़ किनारे से नीचे उतार लेता है तो सडक़ पर पड़ा कांटा लगने पर टायर पंक्चर हो जाने से काफी परेशानी होती है।
विलायती बबूल के हरियाली के फायदे कम, नुकसान ज्यादा हैं। जिस जमीन पर यह पैदा होता है। वहां कुछ और नहीं पनपने देता है। पर्यावरण की दृष्टि से इसका उपयोगी नहीं है। यह पेड़ बहुत कम कार्बन सोखता है। इस पेड़ का तना, शाखा, छाल आदि किसी काम की नहीं है। ईंधन के रूप में भी यह काम नहीं आती है। इन्हें काटने के बाद लंबे समय तक रखा जाता है तो इसमें कुछ दिनों बाद दीमक से अपने आप नष्ट हो जाती है।अंग्रेजी बबूलों को जितना अधिक काटा जाता है। ये उससे ज्यादा तेजी से बढ़ती है। इनके बीज जहां पर पड़ते है। वहां बिना पानी के ही अकुंरित होकर पेड़ का रूप ले रही है। सडक़ किनारे खड़ी विलायती बबूल से वाहन चालक सबसे अधिक प्रभावित है।