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सरकार के इस कदम से माकपा का आंदोलन खत्म, अब निगाहें 28 पर

Sachin Mathur

Publish: Sep 23, 2019 11:04 AM | Updated: Sep 23, 2019 11:04 AM

Sikar

सीकर. छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के मामले में कलक्ट्रेट के सामने चल रहा माकपा का महापड़ाव रविवार रात समाप्त हो गया। इसके साथ ही माकपा कार्यकर्ताओं के साथ शहरवासियों की खुशियों की राह खुल गई।


सीकर. छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज के मामले में कलक्ट्रेट के सामने चल रहा माकपा का महापड़ाव रविवार रात समाप्त हो गया। इसके साथ ही माकपा कार्यकर्ताओं के साथ शहरवासियों की खुशियों की राह खुल गई। माकपा की आंदोलन के बीच पुलिस उपाधीक्षक सौरभ तिवाड़ी का तबादला हो गया। माकपा नेताओं ने इसे अपनी जीत बताया है। देर रात माकपा ने आंदोलन समाप्ति के साथ कलक्ट्रेट के सामने से रास्ता भी खोल दिया। किसान नेता अमराराम ने पत्रकार वार्ता कर आंदोलन समाप्ति का ऐलान किया।
पूर्व विधायक अमराराम ने महापड़ाव से घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने उनकी सभी मांगे मान ली है। सात दिन चले महापड़ाव के बाद सरकार ने डीएसपी सौरव तिवाड़ी का जोधपुर तबादला कर दिया है। उन्होंने कहा कि आईपीएस तबादला सूची में एसपी गगनदीप सिंगला का तबादला करने की बात कहीं है। उन्होंने कहा कि संभागीय आयुक्त केसी वर्मा पुलिस के लाठीचार्ज और मतगणना के दौरान हुई धांधलेबाजी की जांच कर रहे है। वे जांच की रिपोर्ट 28 सितम्बर को सरकार को सौपेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले कॉलेज प्राचार्या दुल्लड को एपीओ कर दिया था। साथ ही एसआई सुनील जागिड और सिपाही मनोज ढाका को भी हटा दिया था। महापड़ाव में घोषणा करने के बाद सभी कार्यकर्ता खुशी से झूमने लगे। इसके बाद कुछ ही देर में सडक़ पर लगे टैंट हटा और दरियों को हटा लिया गया। महापड़ाव में लगे मंच को सडक़ से हटाना शुरू कर दिया। पूर्व विधायक अमराराम ने बताया कि सरकार ने सात दिन चले महापड़ाव के बाद मांगे मानी है।


राज्य सरकार से विधायक बलवान पूनिया कर रहे थे मानिटरिंग
पूर्व विधायक अमराराम ने बताया कि भादरा विधायक बलवान पूनिया रविवार दोपहर से सरकार के कई मंत्रियों के साथ वार्ता कर रहे थे। सरकार की ओर से कई मंत्री व विधायक मंडल में शामिल हुए थे। राज्य सरकार की ओर से सोमवार को प्रस्तावित जिला और तहसील मुख्यालय पर धरने-प्रदर्शन को रद्द किए जाने की बात कहीं जा रही थी। राज्य सरकार की ओर से दोपहर बाद मांगे मान लिए जाने का आश्वस्त किया। इसके बाद उन्हें डीएसपी की तबादला सूची के बारे में बताया। रात को करीब आठ बजे विधायक बलवान पूनिया ने अमराराम को फोन कर मांगे लिए जाने की बात कहीं। तब महापड़ाव के दौरान मंच से ही अमराराम ने घोषणा की।


बरसात में भी 11 सदस्य तिरपाल लगा कर क्रमिक अनशन पर बैठे
कलक्ट्रेट पर रविवार को भारी बरसात में भी प्रदर्शनकारी जुटे रहे। बरसात के दौरान तिरपाल मंगाकर 11 सदस्य क्रमिक अनशन पर बैठे। बरसात आने पर सडक़ पर बैठे लोग इधर-उधर भागने लगे। रविवार को सीटू अध्यक्ष सुभाष नेहरा के नेतृत्व में 11 सदस्य क्रमिक अनशन पर बैठे। सचिव किशन पारीक ने बताया कि सुंदर जागिड़, भगवान सिंह, सुरेंद्र आंतरी, दिलीप मिश्रा, महेंद्र खीचड़, अशोक पेंटर, भोलाराम आर्य, बलबीर बगडिया, महेंद्र खीचड, फारूख घोड़ी, हंसराज मावलिया क्रमिक अनशन पर बैठे।


नारेबाजी करने की पुलिस ने शुरू की जांच
कोतवाली पुलिस ने चार दिन पहले कलक्ट्रेट पर आम रास्ते को जाम कर नारेबाजी किए जाने का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस का कहना है कि कलक्ट्रेट पर जबरन मांगों को लेकर लोग टेंट लगा कर बैठे हुए है। लाउडस्पीकर पर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे है। पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस रिपोर्ट में अशोक ढाका, मुकेश ढाका, प्यारेलाल, नरेश कुमार, बजरंगलाल,चिमनाराम, सुभाष ढाका, सुल्तान खाखर, भंवर सिंह, बन्ने सिंह, बलबीर बाजिया, भोलाराम, अमर सिंह, श्रवण सिंह, रामेश्वर, हरीकिशन भूकर, अर्जुन सैनी, मुगल सिंह, घासीराम, रामचंद्र खीचड़, ओमप्रकाश सैनी, मोहन धायल, बेगाराम, पूरण सिंह, दशरथ सिंह, महेंद्र सिंह, महेंद्र खीचड़, बलबीर मावलिया, अशोक पेंटर, मोहन फौजी, हरदेवाराम, बजरंगलाल, भगवानाराम, गुल्लाराम मुवाल, झाबरमल, प्रेमसिंह, पूरण सिंह गढवाल, संतकुमार, पन्नाराम, भोजाराम सहित 150-200 लोगों को जांच में शामिल किया है।

व्यापारियों और छात्रों से परेशानी के लिए मांगी माफी
पूर्व विधायक अमराराम और पेमाराम ने कहा कि सात दिनों से महापड़ाव के कारण शहर के व्यापारी और छात्र परेशान हो रहे थे। रास्ता बंद होने से लोगों को भी दिक्कत हो रही थी। उन्होंने व्यापारियों और छात्रों से माफी मांगते हुए कहा कि बेटियों के सम्मान में आंदोलन किया गया था। इस दौरान व्यापारियों को काफी नुक्सान भी हुआ। कोचिंग पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को पैदल ही कोचिंग के लिए जाना पड़
रहा था।