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सीकर के कर्मचारियों ने की ऐसी हरकत, प्रदेश में होगी जांच

Ajay Sharma

Publish: Aug 14, 2019 02:09 AM | Updated: Aug 14, 2019 02:09 AM

Sikar

बैंक ने सभी कर्मचारियों से मांगी डिग्री की जानकारी

सीकर. सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक में फर्जी डिग्री के सहारे वेतन वृद्धि का मामला उजागर होने के साथ ही राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) से सभी कर्मचारियों से सम्बंधित फाइल ही गायब हो गई। तलाश के बाद भी फाइल नहीं मिली तो अब बैंक ने वेतन वृद्धि लेने वाले कर्मचारियों से ही उनकी डिग्री से का सर्टिफिकेट मांगा है। बैंक ने कर्मचारियों को तकनीक से जोडऩे के लिए वर्ष 14 वें वेतन समझौते में विशेष व्यवस्था की थी। इसके तहत तय हुआ कि जो कर्मचारी एमएससी (आइटी), एमसीए, एम. टेक (सीएस) की डिग्री हासिल करेगा उसे दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि दी जाएगी। यह प्रावधान 1 जनवरी 2009 को लागू किया गया। इस प्रावधान के बाद कई कर्मचारियों ने डिग्री पेश कर एक साथ दो वेतन वृद्धि ली। वेतन वृद्धि के लिए कई कर्मचारियों ने फर्जी डिग्री पेश कर दी। बैंक प्रबंधन ने बिना किसी जांच के उनके आधार पर वेतन वृद्धि दे दी। मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ माह पहले सीकर के कर्मचारियों की शिकायत हुई। जांच में बैंक प्रबंधन ने माना कि कुछ कर्मचारियों की डिग्रियां मान्य नहीं हैं। इस आधार पर सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय ने पांच कर्मचारियों की वेतन वृद्धि को गलत मानते हुए उसे वसूली योग्य माना। सीकर के बाद इस तरह की डिग्रियों से वेतन वृद्धि पाने वाले सभी कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं। ऐसे में बैंक ने सभी डिग्रियों की जांच करने का निर्णय लिया। जांच शुरू होती उससे पहले कर्मचारियों की यह फाइल ही गायब हो गई। सूत्रों के मुताबिक फाइल तो दो वर्ष पहले ही किसी ने खुर्दबुर्द कर दी थी। किसी एक कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करने के बजाय बैंक ने फाइल की तलाश के लिए लुक आउट नोटिस जारी कर दिया। हालांकि इस पर भी फाइल नहीं मिली। बैंक ने अब कर्मचारियों से ही पूछा है कि उन्होंने कौन से डिग्री पेश की थी। सम्बंधित कर्मचारियों से तय पाठ्यक्रम उत्तीर्ण करने का सर्टिफिकेट मांगा है। बैंक अपने स्तर पर अब इन सर्टिफिकेट की जांच कराएगा। गौरतलब है कि इस तरह की डिग्रियों से बैंकों में सहायक कर्मचारी से लेकर महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों ने अतिरिक्त वेतन वृद्धि हासिल की थी।