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मुफ्त का चंदन, घिस मेरे नंदन

Vinod Singh Chouhan

Publish: Sep 22, 2019 17:30 PM | Updated: Sep 22, 2019 17:30 PM

Sikar

ऋणमाफी में बढ़ा खेल, पासबुक में कोई बकाया नहीं फिर भी सरकार से उठा ली ऋणमाफी
मुफ्त का चंदन, घिस मेरे नंदन
अब रुपए पाने के लिए चार माह से भटक रहा है किसान, जिम्मेदार एक दूसरे पर झाड रहे पल्ला, डूकिया ग्राम सेवा सहकारी समिति का मामला

सीकर. मनमर्जी कहें या किसान का दुर्भाग्य। फसली ऋण की पासबुक में ऋण की कोई बकाया राशि भी नहीं और किसान के नाम से सरकारी ऋणमाफी का लाभ उठा लिया गया। यह सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन यह हकीकत दांतारामगढ़ के डूकिया ग्राम सेवा सहकारी समिति में देखने को मिली है। कर्ज के बोझ तले डूबे किसानों को उबारने के लिए प्रदेश सरकार ने 50 हजार रुपए तक के फसली ऋण माफी योजना को सरकार के कारिंदे ही चूना लगा है।

आश्चर्य की बात है कि सरकार को चूना लगाने वाले इस वाकये की जानकारी उच्चाधिकारियों को होने के बाद भी इस संबंध में कोई कार्रवाई तक नहीं की जा रही है। इस प्रमाण पत्र में ऋणमाफी की राशि को कहां भेजा इसकी जानकारी तक किसान को नहंी दी जा रही है। अब किसान इस ऋणमाफी की राशि को लेने के लिए जीएसएस और सहकारी बैंक के चककर लगा रहा लेकिन किसी प्रकार की कोई कार्रवाई तक नहीं हुई है। किसान का आरोप है कि जीएसएस पर लम्बे समय से मनमर्जी का खेल चल रहा है मामले की निष्पक्ष जांच तो कई भोले-भाले किसान इस ठगी से बच सकते हैं। इस जिम्मेदार किसान को फौरी आश्वासन देते रहे बाद में जब किसान ने लिखित शिकायत दी तो अधिकारी मामले की जानकारी से बचते रहे।
यह है मामला
प्रदेश की सरकार ने 30 नवम्बर 2018 को बकाया राशि वाले किसानों के दो लाख हजार रुपए तक के फसली ऋण माफ करने की घोषणा की। डूकिया ग्राम सेवा सहकारी समिति में यहीं से खेल शुरू हुआ। जीएसएस के कर्मचारियों ने ऋणमाफी की सूची में किसान का नामतो शामिल कर लिया लेकिन किसान पर दवाब बनाया कि वो ऋण की बकाया राशि जमा करवा देगा तो उसे ऋणमाफी का पैसा मिल जाएगा।
इस पर किसान भागीरथमल ने पांच नवम्बर 2018 को अपने फसली ऋण 50133 रुपए और ब्याज के 15190 रुपए रसीद संख्या 481807 के जरिए जमा करवा दिए और व्यवस्थापक ने पासबुक में यह राशि प्रार्थी के खाते में जमा कर ली और फसली ऋण की राशि को शून्य दर्शा दिया। जबकि ऋणमाफी की पात्रता की प्रमुख शर्त थी कि संबंधित किसान का 30 नवम्बर 2018 को बकाया होगा तो ही वह किसान पात्रता के दायरे में आएगा। ऋणमाफी का प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी किसान को न तो बकाया राशि का भुगतान हो सका ओर न ही किसान की पासबुक की इस राशि की एंट्री की गई। इस प्रकार किसान और सरकार को इस राशि का चूना लगा दिया गया।
बकाया था इसलिए हुई ऋणमाफी
किसान के पासबुक में एंट्री सही है या नहीं इसकी जानकारी ली जाएगी। बैंक के रेकार्ड के अनुसार पांच नवम्बर 2018 को किसान की बकाया राशि थी इस कारण किसान को ऋणमाफी के दायरे में लिया गया है।
महादेव सिंह ऐचरा, व्यवस्थापक ग्राम सेवा सहकारी समिति डूकिया