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दिव्यांग बच्चों ने किया सरकारी स्कूल से किनारा

Gaurav Saxena

Publish: Oct 21, 2019 18:53 PM | Updated: Oct 21, 2019 18:53 PM

Sikar

पिछले तीन साल में कक्षा एक से आठ तक के दिव्यांग बच्चों के नामांकन में 39.45 प्रतिशत की कमी आई हैं। नामांकन में तेजी से गिरावट का मुख्य कारण सरकारी स्कूलों में विशेष शिक्षकों का नहीं होना है।

सीकर. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में दिव्यांग बच्चों का नामांकन लगातार घटता जा रहा हैं। पिछले तीन साल में कक्षा एक से आठ तक के नामांकन में 39.45 प्रतिशत की कमी आई हैं। नामांकन में तेजी से गिरावट का मुख्य कारण सरकारी स्कूलों में विशेष शिक्षकों का नहीं होना है। विशेष शिक्षकों के अभाव में दिव्यांग बच्चे सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने में रुचि नहीं दिखाते हैं। यदि प्रवेश लेते भी है, तो एक या दो साल में गुणवतापूर्ण शिक्षा के अभाव में ड्रॉप आउट हो जाते हैं।
स्कूलों में हो समावेशी शिक्षा
सरकार दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों की पालना में प्रत्येक स्कूल को समावेशी शिक्षा से युक्त नहीं कर पाई है। तीन साल में 39.45 प्रतिशत तक नामांकन में गिरावट होना सरकारी शिक्षा व्यवस्था में भारी खामी को इंगित करता है, जो चिंता का विषय है।
21 कै टेगरी में दिव्यांग
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत दिव्यांगता को 21 कैटेगरी में बांटा गया। इसके चलते वर्ष 2018-19 के आंकड़ों की सूची भी दिव्यांगजनों की 21 कैटेगरी को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। जबकि वर्ष 2015-16 में दिव्यांगता के आंकड़े केवल 10 कैटेगरी में शामिल थे। कैटेगरी बढऩे के बावजूद स्कूलों में नामांकन कम होता जा रहा हैं।
उपकार नहीं, मिलें अधिकार
विशेष योग्यजन कल्याण व पुनर्वास समिति सीकर की अध्यक्ष सुनीता का कहना है कि सरकार को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 की पालना में सभी स्कूलों को समावेशी शिक्षा से युक्त करना चाहिए। इसके लिए सरकार को विशेष शिक्षकों की भर्ती के लिए भर्ती अभियान चलाना चाहिए। दिव्यांगो को उपकार नहीं चाहिए, लेकिन अधिकार तो उनको मिलना चाहिए।
एक नजर आंकड़ों पर भी...
वर्ष दिव्यांग बच्चों का नामांकन
2015-16 1,16,683
2016-17 1,07,299
2017-18 91,529
2018-19 70,641

राज्यभर में 3400 शिक्षकों पर गिरेगी गाज
सीकर. स्कूल शिक्षा विभाग ने बालिका स्कूल में पढ़ाने वाले उन पुरुष शिक्षकों का डाटा कलेक्ट कराया है, जिनकी उम्र 50 वर्ष से कम है। प्रदेशभर की बालिका स्कूल में करीब 3400 पुरूष शिक्षक पढ़ा रहे हैं, जिनकी उम्र 50 वर्ष से कम है। ऐसे में सरकार भविष्य में इन स्कूलों में महिला शिक्षिकाओं की नियुक्ति का प्रयास कर रही है। प्रदेश भर में 65 हजार 215 सरकारी स्कूल है, जिनमें से करीब 1177 सैंकडरी सेटअप की बालिका स्कूल हैं। ऐसे में प्रशासन ने अब इन बालिका स्कूल में पढ़ाने वाले पुरुष शिक्षकों का डाटा जुटाया है।